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बुधवार, 6 जुलाई 2011

आओ चलें अनजान शायर के ब्लॉग पर-पप्पू परिहार जी के ब्लॉग पर.

    कल मेरी मुशायरे ब्लॉग पर प्रस्तुति पर एक टिप्पणी आयी 

Pappu Parihar said...

किधर से शुरू करून, किधर से ख़तम करून |
जिन्दगी का फ़साना, कैसे तेरी नज़र करून |
है ख्याल जिन्दगी का, कैसे मुनव्वर करून |
मगरिब के जानिब खड़ा, कैसे तसव्वुर करून |
टिप्पणी इतनी खास थी कि मन किया की इसे करने वाले शायर के ब्लॉग पर स्वयं जाकर देखा जाये क्या हर बार ''राजीव कुलश्रेष्ठ ''जी की  सलाह पर ध्यान लगा कर बैठ गए और नया ब्लॉग ढूंढ लिया.अब जब हम वहां पहुंचे तो हमने देखा कि सुन्दर अशआर से भरा यह ब्लॉग वास्तव में सभी के सहयोग का अधिकारी है.इनके ब्लॉग का लिंक है-
परिचय केवल इतना सा ही दिया है पप्पू जी ने-
My Photo




और उनकी आज की प्रस्तुति देखिये कितनी शानदार है-

नसीब से देखा

दर्द को पी गया |
जिन्दगी को जी गया |
मौत को करीब से देखा |
तुझे को नसीब से देखा |

अब यदि देखना चाहे हमारी इस नयी खोज को तो लिंक पर मोंउस  को क्लिक करें और पहुँच जाएँ वहां पर जहाँ एक से एक अशआर आपका इंतजार कर रहे हैं.

शालिनी कौशिक 

8 टिप्‍पणियां:

S P Singh ने कहा…

आभार

शिखा कौशिक ने कहा…

this ''pappu'' is really good .thanks Shalini ji for introducing this new blog

Sawai SIingh Rajpurohit ने कहा…

आदरणीय शालिनी कौशिकजी
इस ब्लॉग पर में भी गया अच्छा लगा और ब्लॉग जगत की हलचल की ताज़ा जानकारी के लिए आभार

रेखा ने कहा…

शालिनीजी मैं उनका ब्लॉग जरूर देखूंगी ..आभार

रेखा ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Akshita (Pakhi) ने कहा…

बढ़िया है यह ब्लॉग...

Pappu Parihar ने कहा…

शालिनी कौशिक जी

आपके तार्रुफ़ का,
आपकी हौसला अफजाई का,
आपके बड़प्पन का,
तहे दिल से शुक्रिया,
अदा करता हूँ,

आपने इस जहाँ से मेरा तार्रुफ़ करवाया |
आपने इस जहाँ से मुझे जुड़वाया |
आपने इस जहाँ से मुझे प्यार दिलवाया |
आपका तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया |

शालिनी कौशिक ने कहा…

aabhar aapke shukriya ka.aabhar aapke yahan aane ka,aabhar hamari mehnat ko sarahne ka,aabhar hame naye naye ashaar padhvane ka.