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सोमवार, 28 मार्च 2011

ये ब्लाग मुझे अच्छा नहीं लगता । पहचान कौन ?

1 वन्स अपान ए टाइम..ए स्माल स्वीट बेबी लिव्ड इन लखनाओ..आफ़्टर..? यीयर शी..(.छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा ) । 2 एक बार राधिका ने कहा - (....) यार तुम पका देती हो । ( छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा ) ।
3 एक समय की बात है । स्मायली स्माल बेबी स्वीटी एन्ड नाओ दिस टाइम हार्ड हर्टी..( छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा )
कैसे लिखूँ यार ! कोई साफ़्ट कार्नर ही नहीं मिल रहा । यहाँ तो । उफ़ !
हाँ..मिल गया क्लू..4 इनकी पोस्ट पर लोग कमेंट नहीं करते । बल्कि छोटी मोटी पोस्ट ही लिख देते हैं । ( छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा ) । 5 कभी नबाबी शान बान के लिये प्रसिद्ध शहर लखनऊ से अब थाईलेंड में.. ( छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा )
उफ़..! कितने बिगेनिंग प्वाईंट से लिखना शुरू किया । पर ये " आयरन " कोई शेप ही नहीं ले रहा । इसलिये छोङो । इनके ब्लाग के बारे में बताना । आप यहाँ क्लिक करके इनके ब्लाग पर जाकर खुद ही देख लें । ये किसका ब्लाग है ??
( डर के मारे ) डिस्क्लेमर - ऊपर लिखी बातों से " राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ " का कोई लेना देना नहीं हैं । ये बातें " शिखा जी " ने (......जी ?  ) हमारी लङाई करवाने के उद्देश्य से लिखी हैं । जिन ....? के बारे में यह पोस्ट है । वह बहुत भावुक और अच्छे ह्रदय युक्त सुशील संस्कारवान......? हैं । धन्यवाद ।
मैं ( डर के मारे ) जा  रहा हूँ । अगर कोई युद्ध नहीं छिङा । तो जल्दी ही आ जाऊँगा ।

4 टिप्‍पणियां:

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

अजी शिखा जी ,ब्लोक पर जाने से पहले ही मालुम पड गया की किस की बात हो रही है 'हम सब की आयरन लेडी ' दिव्या जी की !

ZEAL ने कहा…

हा हा ...राजीव जी , मस्ती करना कोई आप से सीखे।

शिखा कौशिक ने कहा…

ise kahte hain doosre ke kandhe par rakh kar bandook chalana.ye kam rajeev ji hi itni khoobsurti se kar sakte hain aakhir chhip kar baithe bhi to guru ji ke peechhe hain.

शालिनी कौशिक ने कहा…

bahut prayas ke bad bhi rajeev ji samjh nahi payee ki aakhir aap itni mehnat swayam karte hain ya aapke bhi kuchh aur chele hain jo aapki madad is punay karya me karte hain fir bhi aapki mahanta ke kya kahne ki mehnat swayam karte hain aur shrey doosron ko de dete hain .blog links jo diye hain ab dekhoongi ki aakhir aapko maza kyon nahi aaya.