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शुक्रवार, 17 जून 2011

चर्चामंच की स्थापना आदरणीय रूपचंद शास्त्री मयंक जी ने की - Dr. Anwer Jamal


आज आपको जानकारी देते हैं चर्चामंच की । ‘धार्मिकता की सच्ची कसौटी‘ शीर्षक से मेरा लेख आज की चर्चा में भी शामिल है।
यह मंच नियमित रूप से इतने अच्छे लिंक देता है कि पढ़कर वाक़ई मज़ा आ जाता है।
इस मंच की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भेदभाव नहीं किया जाता किसी से भी । यही इसे लोकप्रिय बनाता है। मैं इसे शुरू से ही ब्लॉग जगत में भेदभाव झेलता आ रहा हूं और इसे मिटाने के लिए लड़ता भी आ रहा हूं। जब लड़ता हूं तो लोग कहते हैं कि यह विवाद पैदा करता है। जुल्म के खि़लाफ़ आवाज़ उठाने वाले पर ही बदनामी का ठप्पा लगा देते हैं नालायक़ लोग !
ख़ैर, आदरणीय रूपचंद शास्त्री मयंक जी ने चर्चामंच की स्थापना की है। आज तो कई लोग इस मंच पर अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं लेकिन एक समय था कि 3 माह तक उन्होंने अकेले ही इस मंच को संभाला। यह वाक़ई अद्भुत है, ख़ासकर वृद्धावस्था में। बुढ़ापे में भी मुझे उनमें बुढ़ापे का कोई लक्षण बहुत दिनों से नहीं मिला। शायरी वह ऐसी करते हैं कि आदमी को ‘सिद्ध मकरध्वज रस‘ खाने की नौबत ही न आए। यह आयुर्वेद की एक महौषधि है। डाक्टर साहब एक आयुर्वेदिक चिकित्सक भी हैं। इसलिए इस दवा का ज़िक्र कर दिया।
जनाब बच्चों के लिए भी गीत लिखते हैं। मुझे जनाब से मिलकर इतना मज़ा आया जितना कि आजकल आम चूस कर आता है।
उनकी बाल कविताएं पढ़कर मेरे अंदर का बचपन मेरे मन की सतह पर उभर आता है।
चर्चामंच का लिंक यह रहा :

"खूब लड़ी मर्दानी वह तो..." (चर्चा मंच-549)



और मेरी पोस्ट जो चर्चामंच पर है उसका लिंक यह है

धार्मिकता की सच्ची कसौटी - Dr. Anwer Jamal

कभी इस देश का हाल यह था कि रानी लक्ष्मीबाई ने ज़नाना लिबास उतार कर मर्दाना लिबास पहन लिया और घोड़े पर बैठकर दुश्मन की तरफ़ हमला करने भागीं और आज यह आलम है कि जो लड़ने निकला था भ्रष्टाचारियों से वह मर्दाना लिबास उतार ज़नाना लिबास में लड़ाई के मैदान से ही भाग निकला और फिर औरतों की ही तरह वह रोया भी।आज जिसके पास चार पैसे या चार आदमियों का जुगाड़ हो गया। वह एमपी और पीएम बनने के सपने देख रहा है। पहले तो केवल भ्रष्टाचारी और ग़ुंडे-बदमाश ही नेतागिरी कर रहे थे और फिर हिजड़े और तवायफ़ें भी नेता बन गए। उसके बाद अब समलैंगिक भी नेता बनकर खड़े हो रहे हैं कि देश को रास्ता हम दिखाएंगे।आप एक बार देश के सभी नेताओं पर नज़र डाल लीजिए। उनमें सही लोगों के साथ-साथ ये सभी तत्व आपको नज़र आ जाएंगे।जनता इन सबसे आजिज़ आ चुकी है। जिस पर भी वह विश्वास करती है, वही निकम्मा निकल जाता है। लोगों में निराशा घर कर रही है। जिसकी वजह से जगह-जगह आक्रोश में आकर लोग हत्या-आत्महत्या कर रहे हैं। हम सब एक भयानक भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में सांप्रदायिक राष्ट्रवाद कोढ़ में खाज की तरह समस्या को और ज़्यादा बढ़ा रहा है।ये हालात हैं जिन्हें हम एक दम तो नहीं बदल सकते लेकिन फिर भी लोगों के दिलों में आशा का दीपक ज़रूर जला सकते हैं। आप कुछ करें या न करें लेकिन लोगों की आशा और उनके सपनों को हरगिज़ मरने न दें। आदमी रोटी-पानी और हवा से नहीं जीता बल्कि वह एक आशा के सहारे जीता है। उसे यह आशा बनी रहती है कि एक समय आएगा, जब सब ठीक हो जाएगा।वह समय कब आएगा ?.....
यह देश धर्म-अध्यात्म प्रधान देश है तो यहां सबसे बढ़कर शांति होनी चाहिए।
अगर हम विभिन्न मत और संप्रदायों में भी बंट गए हैं और अपने अपने मत और संप्रदाय को सत्य और श्रेष्ठ मानते हैं तो हमें एक ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित रहते हुए शांति और परोपकार के प्रयासों में एक दूसरे से बढ़ निकलने के लिए भरपूर कम्प्टीशन करना चाहिए।

11 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

चर्चा मंच एक निष्काम सेवा है!
--
कबिरा खड़ा बाजार में,
सबकी माँ गे खैर!
ना काहू से दोस्ती,
ना काहू से बैर!

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

जनाब शास्त्री जी ! आपका कमेंट तो बिजली की सी तेज़ी से आता है। अभी पोस्ट डालकर आपको लिंक भेजा और पेज रिफ़्रेश किया तो पता चला कि आपने लेख पढ़ भी लिया है।
वाक़ई, मज़ेदार रही यह पोस्ट भी।
शुक्रिया !
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/06/dr-anwer-jamal_13.html

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Mayankji dwara banaye gaye is platform ki jitni sarahana ki jaye kam hai.... Charcha manch sabhi bloggers ke liye ek sunder manch hai... unka abhar...... Apka dhanyawad

Patali-The-Village ने कहा…

Charcha manch sabhi bloggers ke liye ek sunder manch hai.

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

चर्चामंच निःसंदेह तेरा-मेरा की भावना से परे निष्पक्ष रुप से अपना कार्य कर रहा है ।
वाकई ये ब्लाग अच्छा लगा । आभार...

शालिनी कौशिक ने कहा…

dr.sahab jis tarah se blog jagat me charcha manch vishesh sthan rakhta hai usi tarah se sabhi bloggars me aap ka bhi mahtvapoorn sthan hai aur ye bat dr.roop chandra shastri ji bakhoobi samjhte hain isi liye unka charcha manch nishpaksh bhav se sabhi achchhi post ko sthan deta hai.aapki ye post ye blog achchha laga ki mahtvapoorn post hai aur aap aage bhi aisee prastuti yahan karte rahenge aisee aasha hai.

शिखा कौशिक ने कहा…

charcha manch sabhi bloggars ke liye blog jagat me vishesh sthan rakhta hai .aapki prastuti sarahniy hai .badhai .

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ शालिनी कौशिक जी ! हुआ यूं कि आज जनाब मयंक जी गूगल चैट पर हमकलाम हुए तो उनके बारे में हम जैसा महसूस करते हैं, हमने उन्हें बता दिया। तभी हमें यह ख़याल आया कि ‘नाइस ब्लॉग‘ पर प्रस्तुति दिए हुए भी बहुत दिन हो गये और हमारे पास चर्चामंच के बारे में भी अच्छा ख़ासा लिखित मैटर तैयार हो गया है। सो एक पंथ दो काज करता ही है बड़ा ब्लॉगर। हमारा मैटर भी सेव हो गया और आपके ‘नाइस ब्लॉग‘ की सेवा भी हो गई, जो कि ड्यू चल रही थी।
आपके आग्रह पर मैं इस ब्लॉग के लिए कम अंतराल पर लिखने की कोशिश करूंगा।
आप ‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘ के लिए लिख रही थीं, उसका क्या हुआ ?
लेख कब तक मिलेंगे ?
आपको सुपरिचित बनाने के लिए हर संभव प्रयास हम करेंगे।
अच्छे जज़्बात के लिए मैं आपका शुक्रगुज़ार हूं।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ शिखा जी ! आप हमें शालिनी जी से ज़्यादा बेहतर ढंग से पहचानती हैं!!!
हा हा हा
कुछ हास्य भी होना बहुत ज़रूरी है।
रूटीन टाइप का आभार मुझे बोर करता है।
क्या नास्तिक बंधु इस नई साइंसी खोज को स्वीकार करेंगे ? - Dr. Anwer Jamal

वीना ने कहा…

चर्चा मंच की जितनी भी तारीफ करी जाए कम है...
बहुत उम्दा आधार तैयार किया है शास्त्री जी ने....

Manish Kr. Khedawat ने कहा…

nisandeh charcha manch , achhi rachnao ko pane ka behtareen platform hain

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