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सोमवार, 27 जून 2011

दीपक जी को आपके प्यार और स्नेहिल भावनाओं की जरूरत है

वैसे आम तौर पर मैं हँसी मजाक के बिना पोस्ट नहीं लिखता । पर कुछ ऐसे इंसान मिल जाते हैं । जिनकी भावनात्मक बातें और दिल से निकली सच्चाई अन्दर तक प्रभावित करती है । तब हँसी मजाक चाहकर भी नहीं हो पाता । आज अचानक ऐसे ही एक इंसान दीपक जी और उनके ब्लाग से परिचय हुआ ।
दीपक जी के प्रोफ़ायल में मुझे एक अलग ही वेदना और टीस महसूस हुयी ।
इसलिये मैं चाहता हूँ कि पहले आप उनके आत्मकथ्य को ही पढें -
मैं एक छोटे से गाँव में रहता हूँ । 2011 में मैंने 12 वीं क्लास पास किया है । मेरा काम हमेशा यही रहता है कि मैं बिना किसी के मदद के ज्यादा से ज्यादा काम को अंजाम दूँ । मेरी हमेशा यही इच्छा रही है कि मैं कुछ अलग करूँ । मैं अपने बारे में यही कहूँगा कि मैंने अपनी लाइफ में हर किस्म के लोगो की संगत की है । और हकीकत तो यह है कि कोई मुझे पसंद नहीं करता । इसका कारण यह है कि मैं जो करना या कहना होता है । वो मैं चोरी छुपे नहीं करता । यही बात पसंद नहीं है । लोगों को मैं जैसा हूँ । वैसा ही मैंने अपना विवरण यहाँ दिया है । लेकिन एक दिन ऐसा जरुर आएगा कि जो लोग मुछसे नफरत करते हैं । वही प्यार करेंगे । मेरे परिवार में 4 लोग हैं । मैं । भाई । डैड और दादी । मेरी माँ बचपन में ही चल बसी थी


- इनकी एक ही लाइन - मेरी माँ बचपन में ही चल बसी थी..किसी भी समझदार इंसान को दृवित कर सकती हैं । माँ के प्यार के बिना बच्चे का बचपन और आगे की जिन्दगी कितनी सूनी सूनी रहती है । इसे कोई भी संवेदनशील इंसान समझ सकता है ।
मुझे ऐसा लगता है कि दीपक जी को आपके प्यार और स्नेहिल भावनाओं की जरूरत है । बाकी समझदार को इशारा काफ़ी होता है । क्योंकि इनका प्रोफ़ायल थोङे शब्दों में ही बहुत कुछ कह रहा है ।
*** दीपक जी ! ने अपनी फ़ोटो नहीं लगायी । इसलिये परिचय बिना फ़ोटो के प्रकाशित है ।
साथ ही मेरा शिखा जी और शालिनी जी से निवेदन है कि मैं बहुत शर्मीला स्वभाव का हूँ । अतः यहाँ लगायी परिचय पोस्ट की सूचना संबन्धित व्यक्ति को नहीं करता । अतः आप लोग मेरा इतना तो काम कर ही दिया करें । धन्यवाद ! आप सभी का आभार ।
इनके ब्लाग - दिल की जुवान । ब्लाग जमावङा हिन्दी ब्लाग की नयी पुरानी खबरें

6 टिप्‍पणियां:

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut achchhi post Rajeev ji .dil ko chhoo gayee .aabhar .

शालिनी कौशिक ने कहा…

deepak ji se ham poorv parichit hain aur unke blog ko yahan lene ki soch rahe the kintu jaise ki ''ab pachhitaye hot kya jab chidiya chug gayee khet''mashhoor hai aur aapne ye punya karya kar hi diya hai to ham itne bhi kroor nahi ki aap jaise sharmeele sadhu vyakti ka kaha tal den .ham ye karya avashay karenge.
vaise deepak ji ka blog sarahniy hai aur ham sabhi ki sarahna ka haqdar bhi.
nice post.

RAJEEV KULSHRESTHA ने कहा…

वाकई शालिनी जी ! आपके विचारों में काफ़ी साधुता है ।
परोपकारिक भावना है । आपको पार्ट टाइम साधुगीरी
भी करनी चाहिये । साधुगीरी की फ़ंडामेंटल नालेज
मैं आपको बता दूँगा ।
बस आप राधे राधे कटेगी बाधे करने को तैयार हो जाओ ।

dipak kumar ने कहा…

thanks rajiv ji aapko mera blog achha laga iske liye aapka bahut-2 abhar aapne mere blog ko yaha sthan diya yahi mere liye badi baat hai aap logo ki duaye rahi to mai jarur ek din kamyab insaan banuga
salini ji ka abhar mere blog me apna yogdaan dene ke liye thanks salini ji hame utsah bardhan dene ke liye dhanybaad

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

जानकारी बढ़ी , अच्छा लगा ।

S.N SHUKLA ने कहा…

Deepak ji,
salini ji ne apake blog se parichay karaya ,shalini ji ka abhar,saath hee main aapake bare men vistar se jajana chahta hoon, yadi apako uchit lage to.
S.N.Shukla