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मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

हो जाये कुछ खट्टा मीठा तीखा

बहुत दिनों से विभिन्न ब्लोग्स पर मैं एक नाम देख रही थी सच कह रही हूँ ध्यान तो मेरा ''कौशिक '' संबोधन के कारण ही गया  किन्तु मैं उनके ब्लॉग को खोल कर नहीं देख पाई किन्तु आज जब मैंने उनकी टिप्पणी अपने ब्लॉग पर देखी तो मैं उनका ब्लॉग देखने से खुद को रोक नहीं पाई और जैसा की ''जहाँ चाह वहां राह'' पहुँच गयी उनके प्रोफाइल पर और देखा की ब्लोग्स की भरमार है उनमे से एक ब्लॉग मन को सहज ही अपनी और खींच ले गया और खोल लिया उसे और वास्तव में मिला कुछ ''खट्टा-मीठा -तीखा सा ''योगेन्द्र जी ने आलेख कुछ समय पूर्व लिखा है किन्तु विडंबना ये है की ये विषय आज भी सामायिक है और शायद हमेशा रहेगा आप भी इस ब्लॉग को देखेंगे तो मुझसे सहमत हुए बगैर नहीं रहेंगे.ब्लॉग का url  है-

5 टिप्‍पणियां:

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut achchha blog prichay prastut kiya hai aapne .aabhar .

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

बहुत बढिया।

............
ब्‍लॉगिंग को प्रोत्‍साहन चाहिए?
एच.आई.वी. और एंटीबायोटिक में कौन अधिक खतरनाक?

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

डॉ. कोशिक से मिलकर अच्छा लगा --पर उन्होंने लिखना क्यों छोड़ दिया ?

आकाश सिंह ने कहा…

aapka prayash sarahniya hai...
lage rahiye....
lagan se....
lagatar.....


Thanks... alot...

अवनीश सिंह ने कहा…

bahut achchha
http://www.avaneesh99.blogspot.com/