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सोमवार, 11 जुलाई 2011
अंदाज ए मेरा: वतन पर जो फिदा होगा अमर वो नौजवां होगा.........
अंदाज ए मेरा: वतन पर जो फिदा होगा अमर वो नौजवां होगा.........: "शहीद श्री वीके चौबे और जवान(पूरे जवानों की तस्वीरें नहीं मिल पाईं) नक्सलवाद का नासूर। न जाने कितने घरों को तबाह करेगा। कभी किसी मां क..."
रविवार, 10 जुलाई 2011
गुरुपूर्णिमा उत्सव पर आप सभी बन्धु सादर आमन्त्रित हैं
गुर्रुबृह्मा गुर्रुविष्णु गुर्रुदेव महेश्वरा । गुरुः साक्षात पारबृह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः ।
प्रातःस्मरणीय परम पूज्यनीय श्री श्री 1008 श्री स्वामी शिवानन्द जी महाराज " परमहँस "
अनन्तकोटि नायक पारबृह्म परमात्मा की अनुपम अमृत कृपा से ग्राम - कौरारी । फ़रिहा । फ़िरोजाबाद में सदगुरु पूर्णिमा उत्सव बङी धूमधाम से सम्पन्न होने जा रहा है ।
गुरुपूर्णिमा उत्सव का मुख्य उद्देश्य इस असार नाशवान संसार में व्याकुल पीङित एवं अविधा से गृसित श्रद्धालु भक्तों को दिव्य ग्यान अमृत का पान कराया जायेगा ।
यह जीवात्मा करोंङो वर्षों से सनातन काल से जनम मरण की चक्की में पिसता हुआ धक्के खा रहा है । व जघन्य यातनाओं से त्रस्त एवं बैचेन है ।
जिसे उद्धार करने एवं दिव्य ग्यान रूपी आत्म अमृत पिलाकर सदगुरुदेव यातनाओं से अपनी कृपा से मुक्ति करा देते हैं । अतः ऐसे सुअवसर को न भूलें । एवं अपनी आत्मा का उद्धार करें ।
सदगुरुदेव का कहना है कि मनुष्य यदि पूरी तरह से ग्यान भक्ति के प्रति समर्पण हो । तो आत्मा को परमात्मा को जानने में सदगुरु की कृपा से 15 मिनट का समय लगता है । इसलिये ऐसे पुनीत अवसर का लाभ उठाकर आत्मा की अमरता प्राप्त करें ।
नोट - यह आयोजन 15 - 07 - 2011 को कौरारी ( फ़रिहा ) में कौरारी पुलिया ( के निकट ) होगा । जिसमें दो दिन पूर्व से ही दूर दूर से पधारने वाले संत आत्म ग्यान पर सतसंग करेंगे ।
विनीत -
राजीव कुलश्रेष्ठ । आगरा । पंकज अग्रवाल । मैंनपुरी । पंकज कुलश्रेष्ठ । आगरा ।
अजब सिंह परमार । जगनेर ( आगरा ) । राधारमण गौतम । आगरा । फ़ौरन सिंह । आगरा । रामप्रकाश राठौर । कुसुमाखेङा ।
भूरे बाबा उर्फ़ पागलानन्द बाबा । करहल । चेतनदास । न . जंगी मैंनपुरी । विजयदास । मैंनपुरी ।
बालकृष्ण श्रीवास्तव । आगरा । संजय कुलश्रेष्ठ । आगरा । रामसेवक कुलश्रेष्ठ । आगरा । लज्जाराम यादव । करहल । चरन सिंह यादव । उवाली ( मैंनपुरी ।
प्रीत इन्दर । पटियाला । कुलदीप सिंह । चण्डीगढ । मदनलाल और मिन्टू । मोहाली । निर्मल बंसल । भिलाई । सन्तोष । टिब्बी - हनुमान गढ ।
उदयवीर सिंह यादव । उवाली ( मैंनपुरी । मुकेश यादव । उवाली । मैंनपुरी ।
रामवीर सिंह यादव । बुझिया का पुल । करहल । सत्यवीर सिंह यादव । बुझिया का पुल । करहल । कायम सिंह । रमेश चन्द्र । नेत्रपाल सिंह । अशोक कुमार । सरवीर सिंह ।
**** बाहर से आने वाले लोग बस या ट्रेन से फ़िरोजाबाद आकर कोटला चुंगी से कौरारी के लिये बस में बैठे । कौरारी फ़रिहा से लगभग 5 किमी आगे है । जिस स्थान पर सदगुरु पूर्णिमा उत्सव कार्यकृम होगा । वह कौरारी पुलिया ( के निकट ) के नाम से पसिद्ध है । फ़िर भी कोई परेशानी होने पर 0 96398 92934 पर श्री महाराज जी से पूछ सकते हैं ।
प्रातःस्मरणीय परम पूज्यनीय श्री श्री 1008 श्री स्वामी शिवानन्द जी महाराज " परमहँस "
अनन्तकोटि नायक पारबृह्म परमात्मा की अनुपम अमृत कृपा से ग्राम - कौरारी । फ़रिहा । फ़िरोजाबाद में सदगुरु पूर्णिमा उत्सव बङी धूमधाम से सम्पन्न होने जा रहा है ।
गुरुपूर्णिमा उत्सव का मुख्य उद्देश्य इस असार नाशवान संसार में व्याकुल पीङित एवं अविधा से गृसित श्रद्धालु भक्तों को दिव्य ग्यान अमृत का पान कराया जायेगा ।
यह जीवात्मा करोंङो वर्षों से सनातन काल से जनम मरण की चक्की में पिसता हुआ धक्के खा रहा है । व जघन्य यातनाओं से त्रस्त एवं बैचेन है ।
जिसे उद्धार करने एवं दिव्य ग्यान रूपी आत्म अमृत पिलाकर सदगुरुदेव यातनाओं से अपनी कृपा से मुक्ति करा देते हैं । अतः ऐसे सुअवसर को न भूलें । एवं अपनी आत्मा का उद्धार करें ।
सदगुरुदेव का कहना है कि मनुष्य यदि पूरी तरह से ग्यान भक्ति के प्रति समर्पण हो । तो आत्मा को परमात्मा को जानने में सदगुरु की कृपा से 15 मिनट का समय लगता है । इसलिये ऐसे पुनीत अवसर का लाभ उठाकर आत्मा की अमरता प्राप्त करें ।
नोट - यह आयोजन 15 - 07 - 2011 को कौरारी ( फ़रिहा ) में कौरारी पुलिया ( के निकट ) होगा । जिसमें दो दिन पूर्व से ही दूर दूर से पधारने वाले संत आत्म ग्यान पर सतसंग करेंगे ।
विनीत -
राजीव कुलश्रेष्ठ । आगरा । पंकज अग्रवाल । मैंनपुरी । पंकज कुलश्रेष्ठ । आगरा ।
अजब सिंह परमार । जगनेर ( आगरा ) । राधारमण गौतम । आगरा । फ़ौरन सिंह । आगरा । रामप्रकाश राठौर । कुसुमाखेङा ।
भूरे बाबा उर्फ़ पागलानन्द बाबा । करहल । चेतनदास । न . जंगी मैंनपुरी । विजयदास । मैंनपुरी ।
बालकृष्ण श्रीवास्तव । आगरा । संजय कुलश्रेष्ठ । आगरा । रामसेवक कुलश्रेष्ठ । आगरा । लज्जाराम यादव । करहल । चरन सिंह यादव । उवाली ( मैंनपुरी ।
प्रीत इन्दर । पटियाला । कुलदीप सिंह । चण्डीगढ । मदनलाल और मिन्टू । मोहाली । निर्मल बंसल । भिलाई । सन्तोष । टिब्बी - हनुमान गढ ।
उदयवीर सिंह यादव । उवाली ( मैंनपुरी । मुकेश यादव । उवाली । मैंनपुरी ।
रामवीर सिंह यादव । बुझिया का पुल । करहल । सत्यवीर सिंह यादव । बुझिया का पुल । करहल । कायम सिंह । रमेश चन्द्र । नेत्रपाल सिंह । अशोक कुमार । सरवीर सिंह ।
**** बाहर से आने वाले लोग बस या ट्रेन से फ़िरोजाबाद आकर कोटला चुंगी से कौरारी के लिये बस में बैठे । कौरारी फ़रिहा से लगभग 5 किमी आगे है । जिस स्थान पर सदगुरु पूर्णिमा उत्सव कार्यकृम होगा । वह कौरारी पुलिया ( के निकट ) के नाम से पसिद्ध है । फ़िर भी कोई परेशानी होने पर 0 96398 92934 पर श्री महाराज जी से पूछ सकते हैं ।
शनिवार, 9 जुलाई 2011
हाय कटोरी देवी..आयी फ़िर से मुझे तेरी याद..अर नजर ना लग जाय..हर र र र
कई बार मेरे बहुत से इंटरनेटी मित्रों का आग्रह रहा कि मैं अपने प्रेम सम्बन्धों ( लव स्टोरी ) के बारे में भी कुछ बताऊँ ।
हर इंसान जिन्दगी में ( कम से कम ) एक बार प्रेम और एक बार शादी और अनेक बार बच्चे अवश्य करता है ।
हाँ मैंने भी प्यार किया..( था ) कटोरी देवी से । वैसे साधु लोग प्रभु के अलावा और किसी से प्रेम ( करना तो बहुत चाहते हैं । पर आर्डर आफ़ ला.. नही ना है ) नहीं करते । पर कहते हैं ना कि - हरेक के ही अन्दर परमात्मा है । कानून की इसी धारा का फ़ायदा उठाकर " मैंने प्यार किया " भाग्य श्री से नहीं । अपनी लवली लवली कटोरी देवी से ।
प्यारी प्यारी कटोरी जी का ये प्यारा प्यारा नाम उनकी माँ बटोली देवी ने उनके बचपन से ही कटोरी शेप में एक्सट्रा फ़ूल्ले फ़ूल्ले गालों को देखकर रखा था ।
तबसे दुनियाँ बहुत बदल गयी । यहाँ तक 2012 में प्रलय भी होने वाली है । मगर मजाल कटोरी जी के सुन्दर गालों में कोई चैंज ( बदलाव ) आया हो ।
हाय कटोरी री ( बांके बिहारी ) तेरे मोटे मोटे नैन ..अर नजर ना लग जाय..हर र र र ।
कटोरी जी ने हमसे बे पनाह ( मतलब इतनी कि हम पनाह ही माँग गये ) मोहब्बत की । और शादी श्री डोंगा
बाबू चौरसिया से की । बिकाज ..इन माय थाट ऐग्री विद कटोरी । वे इंसान बाउल ( owl ) ही होते हैं । जो जिससे प्यार करते है । मैड उसी से शादी भी कर लेते हैं ।
इससे जीवन में " मुहब्बत " की कशिश नहीं रहती ना ।
खैर..कटोरी देवी इस मामले में हमेशा चैम्पियन रही कि उन्होंने जो भी किया । भरपूर फ़ुल्ली फ़ुल्ली किया । लिहाजा फ़ुलस्वरूप ( फ़लस्वरूप ) आज वे 21 तन्दुरुस्त गोल मटोल बच्चों की माँ हैं । हाय..नजर ना लग जाय..हर र र र । और 22 वें का शुभ आगमन " जल्द आ रहा है " स्टायल में होने जा रहा है ।
मैंने कटोरी जी से इस बारे में ( बच्चों की उपज ) जब
उनका जीवन दर्शन पूछा ।
तो वे खनकते बर्तनों की तरह मधुर स्वर में बोली - राजीव जी ! 24 बच्चे हर घर में होने ही चाहिये । इससे दोनों टीमें ( क्रिकेट की ) घर की ही हो जाती हैं । कोई हारे या कोई जीते । ( वर्ल्ड ) कप घर में ही आयेगा ना । इस तरह घर के बर्तन खरीदने नहीं होंगे ना । है ना ।
देखी आपने मेरी च्वाइस ! मैं हमेशा बेस्ट सिलेक्शन ही करता हूँ । थोङा चूजी ( मूजी ) हूँ ना ।
खैर..ये प्यार मुहब्बत ऐसा ( s ) pot है । कितना ही बताओ । कम है । दिल ( पेट ) ही नहीं भरता ना ।
- आज अचानक मुझे ये सब बातें अपनी ब्लागर मित्र - सुश्री रजनी मल्होत्रा नैय्यर ..के बारे में आपको बताते हुये याद आ गयीं । रजनी जी ऐसे ऐसे मुहब्बत में डूबे भाव भरे गीत लिखती हैं कि - सब सबको ही अपने अपने लोटा । गिलास । थाली । पतीली । मटका । मटकी etc
से पुरानी मुहब्बत याद आ जाती है । जैसे मुझे कटोरी जी की हो आयी ।
अभी मैं " रजनी जी " के ( दर्द भरे गीतों के ) बारे में ज्यादा वर्णन नहीं कर सकता । इससे मेरे आँसू ( कटोरी जी की याद में ) आयेंगे ना । और एक और मटका भर जायेगा ना । ठीक न होगा ना ।
अपने जीवन के जिन मधुर मोटे मोटे पलों को मैंने बमुश्किल भुलाया था । वो रजनी जी के मुहब्बती गीतों से फ़िर जीवन्त हो उठे -
हाय कटोरी देवी..आयी फ़िर से मुझे तेरी याद..अर नजर ना लग जाय..हर र र र ।
इसके बाद मैंने इनकी सभी रचनाओं को देखा । जो किसी प्रेमिका की अपने प्रेमी के लिये लिखी डायरी या प्रेम पत्रों की दिली अनुभूति कराते थे । और किसी को भी अपनी मुहब्बत के दिन याद दिलाने के लिये विवश कर देते थे ।
..इस तरह इस ब्लाग जगत में मेरा " सर्वप्रथम परिचय " जिन .. कवियत्री । शायरा । लेखिका । से एक कवियत्री और एक पाठक के तौर पर हुआ । वे सुश्री रजनी नय्यर मल्होत्रा ही थीं ।
रजनी जी अपने बारे में कहती हैं -
हजार रश्मियों से अकेली लड़ रही..मैं रजनी हूँ । पर मन का अँधेरा हर रही मैं ।..मैं रजनी मल्होत्रा विवाह के बाद
नैय्यर झारखण्ड के बोकारो थर्मल से । मेरी शिक्षा झारखण्ड एवं UP में पूरी हुई । इतिहास ( प्रतिष्ठा ) से B.A संगणक विज्ञान में BCA एवं हिंदी से B Ed इलाहाबाद से..।
मैं संगणक विज्ञान की शिक्षिका हूँ..। एक कवियत्री । शायरा । लेखिका । मेरा लालन पालन झारखण्ड के रांची में । विवाह के बाद बोकारो थर्मल में हूँ । अभी रांची के इग्नू से हिंदी से M.A कर रही । मैं फेसबुक तथा ऑरकुट पर भी हूँ । रजनी मल्होत्रा नैय्यर । Location । बोकारो थर्मल । रांची झारखण्ड ।
रजनी जी के ब्लाग - रजनी नैय्यर मल्होत्रा । मेरे मन की उलझन । शायरी मेरी कलम से । नारी बेबसी मेरे मन की उलझन ।
हर इंसान जिन्दगी में ( कम से कम ) एक बार प्रेम और एक बार शादी और अनेक बार बच्चे अवश्य करता है ।
हाँ मैंने भी प्यार किया..( था ) कटोरी देवी से । वैसे साधु लोग प्रभु के अलावा और किसी से प्रेम ( करना तो बहुत चाहते हैं । पर आर्डर आफ़ ला.. नही ना है ) नहीं करते । पर कहते हैं ना कि - हरेक के ही अन्दर परमात्मा है । कानून की इसी धारा का फ़ायदा उठाकर " मैंने प्यार किया " भाग्य श्री से नहीं । अपनी लवली लवली कटोरी देवी से ।
प्यारी प्यारी कटोरी जी का ये प्यारा प्यारा नाम उनकी माँ बटोली देवी ने उनके बचपन से ही कटोरी शेप में एक्सट्रा फ़ूल्ले फ़ूल्ले गालों को देखकर रखा था ।
तबसे दुनियाँ बहुत बदल गयी । यहाँ तक 2012 में प्रलय भी होने वाली है । मगर मजाल कटोरी जी के सुन्दर गालों में कोई चैंज ( बदलाव ) आया हो ।
हाय कटोरी री ( बांके बिहारी ) तेरे मोटे मोटे नैन ..अर नजर ना लग जाय..हर र र र ।
कटोरी जी ने हमसे बे पनाह ( मतलब इतनी कि हम पनाह ही माँग गये ) मोहब्बत की । और शादी श्री डोंगा
बाबू चौरसिया से की । बिकाज ..इन माय थाट ऐग्री विद कटोरी । वे इंसान बाउल ( owl ) ही होते हैं । जो जिससे प्यार करते है । मैड उसी से शादी भी कर लेते हैं ।
इससे जीवन में " मुहब्बत " की कशिश नहीं रहती ना ।
खैर..कटोरी देवी इस मामले में हमेशा चैम्पियन रही कि उन्होंने जो भी किया । भरपूर फ़ुल्ली फ़ुल्ली किया । लिहाजा फ़ुलस्वरूप ( फ़लस्वरूप ) आज वे 21 तन्दुरुस्त गोल मटोल बच्चों की माँ हैं । हाय..नजर ना लग जाय..हर र र र । और 22 वें का शुभ आगमन " जल्द आ रहा है " स्टायल में होने जा रहा है ।
मैंने कटोरी जी से इस बारे में ( बच्चों की उपज ) जब
उनका जीवन दर्शन पूछा ।
तो वे खनकते बर्तनों की तरह मधुर स्वर में बोली - राजीव जी ! 24 बच्चे हर घर में होने ही चाहिये । इससे दोनों टीमें ( क्रिकेट की ) घर की ही हो जाती हैं । कोई हारे या कोई जीते । ( वर्ल्ड ) कप घर में ही आयेगा ना । इस तरह घर के बर्तन खरीदने नहीं होंगे ना । है ना ।
देखी आपने मेरी च्वाइस ! मैं हमेशा बेस्ट सिलेक्शन ही करता हूँ । थोङा चूजी ( मूजी ) हूँ ना ।
खैर..ये प्यार मुहब्बत ऐसा ( s ) pot है । कितना ही बताओ । कम है । दिल ( पेट ) ही नहीं भरता ना ।
- आज अचानक मुझे ये सब बातें अपनी ब्लागर मित्र - सुश्री रजनी मल्होत्रा नैय्यर ..के बारे में आपको बताते हुये याद आ गयीं । रजनी जी ऐसे ऐसे मुहब्बत में डूबे भाव भरे गीत लिखती हैं कि - सब सबको ही अपने अपने लोटा । गिलास । थाली । पतीली । मटका । मटकी etc
से पुरानी मुहब्बत याद आ जाती है । जैसे मुझे कटोरी जी की हो आयी ।
अभी मैं " रजनी जी " के ( दर्द भरे गीतों के ) बारे में ज्यादा वर्णन नहीं कर सकता । इससे मेरे आँसू ( कटोरी जी की याद में ) आयेंगे ना । और एक और मटका भर जायेगा ना । ठीक न होगा ना ।
अपने जीवन के जिन मधुर मोटे मोटे पलों को मैंने बमुश्किल भुलाया था । वो रजनी जी के मुहब्बती गीतों से फ़िर जीवन्त हो उठे -
हाय कटोरी देवी..आयी फ़िर से मुझे तेरी याद..अर नजर ना लग जाय..हर र र र ।
इसके बाद मैंने इनकी सभी रचनाओं को देखा । जो किसी प्रेमिका की अपने प्रेमी के लिये लिखी डायरी या प्रेम पत्रों की दिली अनुभूति कराते थे । और किसी को भी अपनी मुहब्बत के दिन याद दिलाने के लिये विवश कर देते थे ।
..इस तरह इस ब्लाग जगत में मेरा " सर्वप्रथम परिचय " जिन .. कवियत्री । शायरा । लेखिका । से एक कवियत्री और एक पाठक के तौर पर हुआ । वे सुश्री रजनी नय्यर मल्होत्रा ही थीं ।
रजनी जी अपने बारे में कहती हैं -
हजार रश्मियों से अकेली लड़ रही..मैं रजनी हूँ । पर मन का अँधेरा हर रही मैं ।..मैं रजनी मल्होत्रा विवाह के बाद
नैय्यर झारखण्ड के बोकारो थर्मल से । मेरी शिक्षा झारखण्ड एवं UP में पूरी हुई । इतिहास ( प्रतिष्ठा ) से B.A संगणक विज्ञान में BCA एवं हिंदी से B Ed इलाहाबाद से..।
मैं संगणक विज्ञान की शिक्षिका हूँ..। एक कवियत्री । शायरा । लेखिका । मेरा लालन पालन झारखण्ड के रांची में । विवाह के बाद बोकारो थर्मल में हूँ । अभी रांची के इग्नू से हिंदी से M.A कर रही । मैं फेसबुक तथा ऑरकुट पर भी हूँ । रजनी मल्होत्रा नैय्यर । Location । बोकारो थर्मल । रांची झारखण्ड ।
रजनी जी के ब्लाग - रजनी नैय्यर मल्होत्रा । मेरे मन की उलझन । शायरी मेरी कलम से । नारी बेबसी मेरे मन की उलझन ।
शुक्रवार, 8 जुलाई 2011
पाखी माने पक्षी या चिड़िया - अक्षिता पाखी
कल एक चिङिया उङती हुयी मेरे ब्लाग पर आयी । मैंने कहा - हल्लो डियर लिटिल बर्ड ।
तब चिङिया ने कहा - मैं चिङिया नहीं हूँ । मेरा नाम चिङिया है । पाखी माने पक्षी या चिड़िया ।
मैंने कहा - डियर ! आप चिङिया हो । तभी तो आपका नाम पाखी है । अब चिङिया को खरगोश कहते सुना है किसी से ?
पाखी ने कहा - ओफ़्फ़ोह अंकल ! वैसे तो मैं एक प्यारी बच्ची हूँ । पर मैं दिन भर चिङिया की तरह इधर उधर फ़ुदकती हूँ ना । इसलिये मम्मी ने मेरा नाम पाखी रख दिया ।
अच्छा ! मैंने आश्चर्य से कहा - और आपके पापाजी का नाम क्या है ?
पाखी - अंकल ! माय फ़ादर नेम इज श्री कृष्ण कुमार यादव । ( उफ़ ! अब इस बच्ची को कौन समझाये कि मुझे इंगलिश बिल्कुल भी नहीं आती )
मैंने कहा - फ़िर आपकी ममा का नाम जरूर राधा यादव होगा । स्योर !
पाखी ने झुँझलाकर माथे पर हाथ मारा । और बोली - उफ़ ! अंकल लगता है । आपने शेक्सपियर को नहीं पढा कि ..नाम में क्या रखा है ?
मैंने कहा - अगर नाम में कुछ नहीं रखा । तो फ़िर मैं आपको कैसे बुलाऊँगा । और आप मुझे कैसे बुलाओगी ? सब लोग एक दूसरे को कैसे बुलायेंगे ?
अच्छा अंकल ! पाखी चुटकी बजाकर बोली - आपका नाम राजीव है । और राजीव माने कमल । तो क्या आप कमल हो गये । मीन एक फ़्लावर । ( उफ़ ! अब इस स्वीट बच्ची को कैसे बताऊँ कि पर्यायवाची शब्दों का पेज मैंने चूरन रखने के लिये किताब से फ़ाङ ही दिया था )
इसलिये मैंने टापिक बदलते हुये कहा - खैर छोङो । एक बात बताओ । आप तो पाखी हो । इसलिये समुद्र के ऊपर से हनुमान जी की तरह उङकर हमारे सबके ब्लाग पर आ जाती हो । लेकिन हम सभी ब्लागर आपके ब्लाग पर जाने के लिये समुद्र कैसे पार करें ?
पाखी दो मिनट तक सोचती रही । और फ़िर खुश होकर बोली - अंकल ! आप विक्रम वैताल वाले वैताल के द्वारा आ जाना ।
और फ़िर मुझे आगे बोलने का अबसर दिये बिना " फ़ुर्र " से टाटा बाय बाय करते हुये पोर्ट ब्लेयर को उङ गयी ।
और ये है । प्यारी नन्ही अक्षिता पाखी का परिचय -
मेरा नाम अक्षिता है । सब मुझे प्यार से पाखी नाम से बुलाते हैं । मेरा ये निकनेम अच्छा है ना । आप भी मुझे पाखी कहकर बुला सकते हैं । पाखी माने पक्षी या चिड़िया । मैं भी तो एक चिड़िया ही हूँ । जो दिन भर इधर उधर
फुदकती रहती हूँ ।
मेरा जन्म 25 मार्च को हुआ । अब इसे अपने दिमाग की डायरी में नोट कर लीजिये । तभी तो आप मुझे जन्मदिन की बधाई देंगे । और ढेर सारे गिफ्ट भी । और हाँ..खूब सारा प्यार और आशीर्वाद भी ।
मुझे अच्छा लगता है - खेलना । नृत्य करना । चित्र बनाना । आइसक्रीम खाना और ढेर सारी शरारतें करना ।
मेरे ममा श्रीमती आकांक्षा पापा श्री कृष्ण कुमार यादव हैं । मेरा ददिहाल आजमगढ़ और ननिहाल सैदपुर (गाजीपुर) में है ।
फ़िलहाल ममा पापा के साथ पोर्टब्लेयर (अंडमान) में हूँ । मेरी छोटी बहन तन्वी भी है । मैं LKG में पढ़ती हूँ ।
'पाखी की दुनिया' में आप पायेंगें मेरी ढेर सारी बातें । घूमना फिरना । मेरी क्रिएटिविटी । मेरी फेमिली और स्कूल की बातें और भी बहुत कुछ ।
यह ब्लॉग 24 जून 2009 को आरंभ हुआ । अब तो यहाँ भी खूब फुदक फुदक करुँगी । इनका ब्लाग - पाखी की दुनियाँ
तब चिङिया ने कहा - मैं चिङिया नहीं हूँ । मेरा नाम चिङिया है । पाखी माने पक्षी या चिड़िया ।
मैंने कहा - डियर ! आप चिङिया हो । तभी तो आपका नाम पाखी है । अब चिङिया को खरगोश कहते सुना है किसी से ?
पाखी ने कहा - ओफ़्फ़ोह अंकल ! वैसे तो मैं एक प्यारी बच्ची हूँ । पर मैं दिन भर चिङिया की तरह इधर उधर फ़ुदकती हूँ ना । इसलिये मम्मी ने मेरा नाम पाखी रख दिया ।
अच्छा ! मैंने आश्चर्य से कहा - और आपके पापाजी का नाम क्या है ?
पाखी - अंकल ! माय फ़ादर नेम इज श्री कृष्ण कुमार यादव । ( उफ़ ! अब इस बच्ची को कौन समझाये कि मुझे इंगलिश बिल्कुल भी नहीं आती )
मैंने कहा - फ़िर आपकी ममा का नाम जरूर राधा यादव होगा । स्योर !
पाखी ने झुँझलाकर माथे पर हाथ मारा । और बोली - उफ़ ! अंकल लगता है । आपने शेक्सपियर को नहीं पढा कि ..नाम में क्या रखा है ?
मैंने कहा - अगर नाम में कुछ नहीं रखा । तो फ़िर मैं आपको कैसे बुलाऊँगा । और आप मुझे कैसे बुलाओगी ? सब लोग एक दूसरे को कैसे बुलायेंगे ?
अच्छा अंकल ! पाखी चुटकी बजाकर बोली - आपका नाम राजीव है । और राजीव माने कमल । तो क्या आप कमल हो गये । मीन एक फ़्लावर । ( उफ़ ! अब इस स्वीट बच्ची को कैसे बताऊँ कि पर्यायवाची शब्दों का पेज मैंने चूरन रखने के लिये किताब से फ़ाङ ही दिया था )
इसलिये मैंने टापिक बदलते हुये कहा - खैर छोङो । एक बात बताओ । आप तो पाखी हो । इसलिये समुद्र के ऊपर से हनुमान जी की तरह उङकर हमारे सबके ब्लाग पर आ जाती हो । लेकिन हम सभी ब्लागर आपके ब्लाग पर जाने के लिये समुद्र कैसे पार करें ?
पाखी दो मिनट तक सोचती रही । और फ़िर खुश होकर बोली - अंकल ! आप विक्रम वैताल वाले वैताल के द्वारा आ जाना ।
और फ़िर मुझे आगे बोलने का अबसर दिये बिना " फ़ुर्र " से टाटा बाय बाय करते हुये पोर्ट ब्लेयर को उङ गयी ।
और ये है । प्यारी नन्ही अक्षिता पाखी का परिचय -
मेरा नाम अक्षिता है । सब मुझे प्यार से पाखी नाम से बुलाते हैं । मेरा ये निकनेम अच्छा है ना । आप भी मुझे पाखी कहकर बुला सकते हैं । पाखी माने पक्षी या चिड़िया । मैं भी तो एक चिड़िया ही हूँ । जो दिन भर इधर उधर
फुदकती रहती हूँ ।
मेरा जन्म 25 मार्च को हुआ । अब इसे अपने दिमाग की डायरी में नोट कर लीजिये । तभी तो आप मुझे जन्मदिन की बधाई देंगे । और ढेर सारे गिफ्ट भी । और हाँ..खूब सारा प्यार और आशीर्वाद भी ।
मुझे अच्छा लगता है - खेलना । नृत्य करना । चित्र बनाना । आइसक्रीम खाना और ढेर सारी शरारतें करना ।
मेरे ममा श्रीमती आकांक्षा पापा श्री कृष्ण कुमार यादव हैं । मेरा ददिहाल आजमगढ़ और ननिहाल सैदपुर (गाजीपुर) में है ।
फ़िलहाल ममा पापा के साथ पोर्टब्लेयर (अंडमान) में हूँ । मेरी छोटी बहन तन्वी भी है । मैं LKG में पढ़ती हूँ ।
'पाखी की दुनिया' में आप पायेंगें मेरी ढेर सारी बातें । घूमना फिरना । मेरी क्रिएटिविटी । मेरी फेमिली और स्कूल की बातें और भी बहुत कुछ ।
यह ब्लॉग 24 जून 2009 को आरंभ हुआ । अब तो यहाँ भी खूब फुदक फुदक करुँगी । इनका ब्लाग - पाखी की दुनियाँ
'ब्लॉग की ख़बरें', हिंदी ब्लॉग जगत का पहला समाचार पत्र
इस बात को दो जगह कहा गया है
दरअस्ल यह पोस्ट हमने लिखी थी साहित्य प्रेमी संघ के लिए। इस संघ की स्थापना इंजीनियर सत्यम शिवम साहब ने की है और यह साहित्य सुमन उगाता है और ख़ुशबू फैलाता है। हमने हमेशा साहित्य की रचना तभी की है जबकि उसका कोई असर व्यक्ति के जीवन और उसके चरित्र पर पड़ता हो। मात्र मनोरंजन के लिए साहित्य लिखना हमारी नज़र में समय को बेकार गंवा देना है।
समाज में चारों ओर समस्याएं हैं, हमें उनके हल के बारे में सोचना चाहिए और ऐसा साहित्य रचना चाहिए जो सबको रास्ता दिखा सके।
एक नज़र आपको ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ पर भी डालनी चाहिए, जो ब्लॉग जगत का सबसे पहला समाचार पत्र है और निष्पक्ष है।
ग़लत बात को ग़लत कहने में और धोखाधड़ी को उजागर करने में यारी और बिरादरी का कोई लिहाज़ नहीं करता। यहां आप अपने ब्लॉग का मुफ़्त प्रचार कर सकते हैं।
अंदाज ए मेरा: अन्ना और बाबा.... बोलने से पहले सोचो तो.....
अंदाज ए मेरा: अन्ना और बाबा.... बोलने से पहले सोचो तो.....: "अन्ना हजारे शोहरत इंसान को किस कदर बडबोला बना देती है, इसका उदाहरण हैं अभी हाल ही में मीडिया के माध्यम से हीरो बना दिए गए दो सज्ज..."
बुधवार, 6 जुलाई 2011
आओ चलें अनजान शायर के ब्लॉग पर-पप्पू परिहार जी के ब्लॉग पर.
कल मेरी मुशायरे ब्लॉग पर प्रस्तुति पर एक टिप्पणी आयी
Pappu Parihar said...
किधर से शुरू करून, किधर से ख़तम करून |
जिन्दगी का फ़साना, कैसे तेरी नज़र करून |
है ख्याल जिन्दगी का, कैसे मुनव्वर करून |
मगरिब के जानिब खड़ा, कैसे तसव्वुर करून |
जिन्दगी का फ़साना, कैसे तेरी नज़र करून |
है ख्याल जिन्दगी का, कैसे मुनव्वर करून |
मगरिब के जानिब खड़ा, कैसे तसव्वुर करून |
टिप्पणी इतनी खास थी कि मन किया की इसे करने वाले शायर के ब्लॉग पर स्वयं जाकर देखा जाये क्या हर बार ''राजीव कुलश्रेष्ठ ''जी की सलाह पर ध्यान लगा कर बैठ गए और नया ब्लॉग ढूंढ लिया.अब जब हम वहां पहुंचे तो हमने देखा कि सुन्दर अशआर से भरा यह ब्लॉग वास्तव में सभी के सहयोग का अधिकारी है.इनके ब्लॉग का लिंक है-
परिचय केवल इतना सा ही दिया है पप्पू जी ने-
View my complete प्रोफाइलऔर उनकी आज की प्रस्तुति देखिये कितनी शानदार है-
नसीब से देखा
दर्द को पी गया |
जिन्दगी को जी गया |
मौत को करीब से देखा |
तुझे को नसीब से देखा |
जिन्दगी को जी गया |
मौत को करीब से देखा |
तुझे को नसीब से देखा |
अब यदि देखना चाहे हमारी इस नयी खोज को तो लिंक पर मोंउस को क्लिक करें और पहुँच जाएँ वहां पर जहाँ एक से एक अशआर आपका इंतजार कर रहे हैं.
शालिनी कौशिक
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