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शनिवार, 9 जुलाई 2011

हाय कटोरी देवी..आयी फ़िर से मुझे तेरी याद..अर नजर ना लग जाय..हर र र र

कई बार मेरे बहुत से इंटरनेटी मित्रों का आग्रह रहा कि मैं अपने प्रेम सम्बन्धों ( लव स्टोरी ) के बारे में भी कुछ बताऊँ ।
 हर इंसान जिन्दगी में ( कम से कम  ) एक बार प्रेम और एक बार शादी और अनेक बार बच्चे अवश्य करता है ।
हाँ मैंने भी प्यार किया..( था ) कटोरी देवी से । वैसे साधु लोग प्रभु के अलावा और किसी से प्रेम ( करना तो बहुत चाहते हैं । पर आर्डर आफ़ ला.. नही ना है ) नहीं करते । पर कहते हैं ना कि - हरेक के ही अन्दर परमात्मा है । कानून की इसी धारा का फ़ायदा उठाकर " मैंने प्यार किया " भाग्य श्री से नहीं । अपनी लवली लवली कटोरी देवी से ।
प्यारी प्यारी कटोरी जी का ये प्यारा प्यारा नाम उनकी माँ बटोली देवी ने उनके बचपन से ही कटोरी शेप में एक्सट्रा फ़ूल्ले फ़ूल्ले गालों को देखकर रखा था
तबसे दुनियाँ बहुत बदल गयी । यहाँ तक 2012 में प्रलय भी होने वाली है । मगर मजाल कटोरी जी के सुन्दर गालों में कोई चैंज ( बदलाव ) आया हो ।
हाय कटोरी री ( बांके बिहारी ) तेरे मोटे मोटे नैन ..अर नजर ना लग जाय..हर र र र ।
कटोरी जी ने हमसे बे पनाह ( मतलब इतनी कि हम पनाह ही माँग गये ) मोहब्बत की । और शादी श्री डोंगा


बाबू चौरसिया से की । बिकाज ..इन माय थाट ऐग्री विद कटोरी । वे इंसान बाउल ( owl ) ही होते हैं । जो जिससे प्यार करते है । मैड उसी से शादी भी कर लेते हैं ।
इससे जीवन में " मुहब्बत " की कशिश नहीं रहती ना
खैर..कटोरी देवी इस मामले में हमेशा चैम्पियन रही कि उन्होंने जो भी किया । भरपूर फ़ुल्ली फ़ुल्ली किया । लिहाजा  फ़ुलस्वरूप ( फ़लस्वरूप ) आज वे 21 तन्दुरुस्त गोल मटोल बच्चों की माँ हैं । हाय..नजर ना लग जाय..हर र र र । और 22 वें का शुभ आगमन " जल्द आ रहा है " स्टायल में होने जा रहा है ।
मैंने कटोरी जी से इस बारे में ( बच्चों की उपज ) जब


उनका जीवन दर्शन पूछा ।
 तो वे खनकते बर्तनों की तरह मधुर स्वर में बोली - राजीव जी ! 24 बच्चे हर घर में होने ही चाहिये । इससे दोनों टीमें ( क्रिकेट की ) घर की ही हो जाती हैं । कोई हारे या कोई जीते । ( वर्ल्ड ) कप घर में ही आयेगा ना । इस तरह घर के बर्तन खरीदने नहीं होंगे ना । है ना ।
देखी आपने मेरी च्वाइस ! मैं हमेशा बेस्ट सिलेक्शन ही करता हूँ । थोङा चूजी ( मूजी ) हूँ ना ।
खैर..ये प्यार मुहब्बत ऐसा ( s ) pot है । कितना ही बताओ । कम है । दिल ( पेट ) ही नहीं भरता ना ।
- आज अचानक मुझे ये सब बातें अपनी ब्लागर मित्र - सुश्री रजनी मल्होत्रा नैय्यर ..के बारे में आपको बताते हुये याद आ गयीं रजनी जी ऐसे ऐसे मुहब्बत में डूबे भाव भरे गीत लिखती हैं कि - सब सबको ही अपने अपने लोटा । गिलास । थाली । पतीली । मटका । मटकी etc


से पुरानी मुहब्बत याद आ जाती है । जैसे मुझे कटोरी जी की हो आयी ।
अभी मैं " रजनी जी " के ( दर्द भरे गीतों के ) बारे में ज्यादा वर्णन नहीं कर सकता । इससे मेरे आँसू ( कटोरी जी की याद में ) आयेंगे ना । और एक और मटका भर जायेगा ना । ठीक न होगा ना ।
अपने जीवन के जिन मधुर मोटे मोटे पलों को मैंने बमुश्किल भुलाया था । वो रजनी जी के मुहब्बती गीतों से फ़िर जीवन्त हो उठे -
हाय कटोरी देवी..आयी फ़िर से मुझे तेरी याद..अर नजर ना लग जाय..हर र र र ।
इसके बाद मैंने इनकी सभी रचनाओं को देखा । जो किसी प्रेमिका की अपने प्रेमी के लिये लिखी डायरी या प्रेम पत्रों की दिली अनुभूति कराते थे । और किसी को भी अपनी मुहब्बत के दिन याद दिलाने के लिये विवश कर देते थे
..इस तरह इस ब्लाग जगत में मेरा " सर्वप्रथम परिचय " जिन .. कवियत्री । शायरा । लेखिका । से  एक कवियत्री और एक पाठक के तौर पर हुआ । वे सुश्री रजनी नय्यर मल्होत्रा ही थीं ।
रजनी जी अपने बारे में कहती हैं -
हजार रश्मियों से अकेली लड़ रही..मैं रजनी हूँ । पर मन का अँधेरा हर रही मैं ।..मैं रजनी मल्होत्रा विवाह के बाद


नैय्यर झारखण्ड के बोकारो थर्मल से । मेरी शिक्षा झारखण्ड एवं UP में पूरी हुई । इतिहास ( प्रतिष्ठा ) से B.A संगणक विज्ञान में BCA एवं हिंदी से B Ed इलाहाबाद से..।
मैं संगणक विज्ञान की शिक्षिका हूँ..। एक कवियत्री । शायरा । लेखिका मेरा लालन पालन झारखण्ड के रांची में । विवाह के बाद बोकारो थर्मल में हूँ । अभी रांची के इग्नू से हिंदी से M.A कर रही । मैं फेसबुक तथा ऑरकुट पर भी हूँ । रजनी मल्होत्रा नैय्यर । Location । बोकारो थर्मल । रांची झारखण्ड ।
रजनी जी के ब्लाग - रजनी नैय्यर मल्होत्रा मेरे मन की उलझन  शायरी मेरी कलम से । नारी बेबसी मेरे मन की उलझन ।