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मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

काव्यान्जलि ...A NEW BLOG


आज मैं प्रस्तुत कर रही एक नए ब्लॉग का परिचय .आप भी इस ब्लॉग पर चक्कर लगा आये .ये  हैं  धीरेन्द्र जी .इनके ब्लॉग का नाम है  -काव्यान्जलि ...

मेरा फोटो


इनका परिचय  इस  प्रकार  है  - 



लिंगपुरुष
व्यवसायकृषि
स्थानवेंकटनगर. अनुपपुर,, मध्यप्रदेश, पिन-484113, भारत
परिचयबर्तमान में (म.प्र.) के जिला-अनुपपुर में किसान कांग्रेस
 कमेटी का जिलाअध्यक्ष, हूँ शेष कुछ खास नहीं... मोबाइल-9752685538
रुचिराजनीतक गतिवधियों में भाग लेना, कविताये लिखना



शुभकामनाओं के साथ 
शिखा कौशिक 

                          












सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

NEW BLOG-अपना पंचू

  मेरा फोटो


Blog's name-  अपना पंचू


BLOG'S OWNER -lokendra singh rajput


LATEST POST-

बौखलाहट या दंभ?


                                        PLEASE VISIT AND READ HIS VIEWS ON VARIOUS RELEVANT ISSUES .
                                                                  WITH BEST WISHES 
                                                               SHIKHA KAUSHIK 

रविवार, 26 फ़रवरी 2012

DHEERAJ4GHAZAL-चौगान-NEW BLOG

HIS NAME-DHEERAJ4GHAZAL



HIS BLOG'S NAME -चौगान

मेरा फोटो

HE SAID-
"IF SOMEONE DIES YOUNG PEPOLE SAY THAT GOD LOVES HIM. BT U R STILL ON THE EARTH IT MEANS SOMEONE IS ON THE EARTH WHO LOVES U MORE THAN GOD." "CHAIN SE SO RAHA THA ODHE KAFAN MAZAR ME, YAHAN BHI SATANE AA GAYE PATA KISNE BATA DIYA------------- Love is possible after friendship but friendship is not possible after love because medicines work before death later nothing can be cured….!!!

HIS LATEST POST-

The Unsaid Word

Far away in the valley,
You keep beckoning me;
Asking to come,
Whenever we talked.

PLEASE READ HIS POST AND VISIT HIS BLOG .
SHIKHA KAUSHIK

सोमवार, 5 सितंबर 2011

मेरे अनुभव -पल्लवी जी का ब्लॉग

ब्लॉग का नाम-मेरे अनुभव 
ब्लॉग स्वामिनी का नाम व् परिचय -My Photo

Pallavi

मेरे बारे में

मैं भोपाल की रहने वाली हूँ और मैंने अपनी सम्पूर्ण शिक्षा भोपाल में ही प्राप्त की है। मैंने भोपाल के नूतन कालेज से बी.ए एवं अँग्रेज़ी साहित्य में एम.ए किया है। मैं एक साधारण सी ग्रहणी हूँ और पिछले 5 वर्षों से यहाँ लंदन में रह रही हूँ। मेरा ब्लॉग देख कर शायद आप को अजीब लगे कि मैं अँग्रेज़ी साहित्य में एम.ए होने के बावजूद भी हिन्दी में ब्लॉग क्यूँ लिखती हूँ । तो मैं यहाँ आप को बताना चाहती हूँ कि मैं हिन्दी के बहुत बड़े लेखक श्री मुंशी प्रेमचंद जी को बहुत पसंद करती हूँ और उन के लेखन की सरल भाषा को ध्यान में रखते हुए उनसे प्रेरित होकर मैंने अपने ब्लॉग की भाषा को भी सरल बना कर लिखने का प्रयास किया है। ताकि मेरे ब्लॉग को हर आयु, हर वर्ग, का व्यक्ति आसानी से समझ सके। पिछले एक वर्ष से ही मैंने ब्लॉग लिखना आरंभ किया है और मेरा विषय है (मेरे अनुभव)। यह विषय मैंने इसलिए चुना क्योंकि मुझे ऐसा लगता है, कि यही एकमात्र ऐसा विषय है जिस पर मैं खुल कर अपने विचार लिख सकती हूँ । क्योंकि मेरा ऐसा मानना है, कि विषय तो और अन्य भी है किन्तु उस में किसी की भावनाओं को जाने अनजाने में ठेस पहुँच सकती है। किन्तु मेरा विषय ऐसा है ,जिसमें इस बात की कोई गुंजाइश नहीं है। क्योंकि मैं जो कुछ भी लिखूँगी वो मेरे अपने विचार और अनुभव है। 

ब्लॉग का URL -http://mhare-anubhav.blogspot.कॉम
मेरी राय-लेखन का अलग अंदाज़ .विषय-चयन में माहिर हैं पल्लवी जी .मेरी ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनायें 
               आप भी होकर  आयें इनके ब्लॉग पर और बताएं अपने अनुभव .
                                        शिखा कौशिक 

रविवार, 4 सितंबर 2011

A NEW BLOG-PUNEET KUMAR GARG

ब्लॉग-स्वामी का परिचय-मेरा फोटो

PuNeeT KuMaR GarG

मेरे बारे में

एहसास के दमन में आंसू गिरा कर देखो, दोस्ती कितनी सची है अजमा कर देखो, दोस्तों को भूल कर क्या होगी दिल की हालत, किसी आईने को ज़मी पे गिरा के देखो
* मेरी राय -सुन्दर भावाभिव्यक्ति -सार्थक विषय चयन
आप भी इस ब्लॉग का भ्रमण कर नए ब्लोगर का उत्साहवर्धन करें .आपका दिन शुभ व् मंगलमय हो
शिखा कौशिक

शनिवार, 3 सितंबर 2011

A NEW BLOG -MY MUSINGS

A NEW BLOG -MY MUSINGS
 BLOG-OWNER -AARKAY
BLOG'S URL -http://aarkay-musings.blogspot.com
RESENT POST-Ganesh Chaturthi or Pathar Chauth
MY VIEW-UNIQUE PRESENTATION & STRONG EXPRESSION .
                              DO NOT THINK SO MUCH .YOU MUST VISIT THIS BLOG .THIS IS REALLY READABLE .
                                      HAVE A NICE DAY .
                                                                      
                                       SHIKHA KAUSHIK 

सोमवार, 29 अगस्त 2011

सुधा जी का ब्लॉग

सुधा   जी  का  ब्लॉग  


ब्लॉग का नाम - तूलिकासदन 


ब्लॉग स्वामिनी  का नाम  व्  परिचय  -सुश्री  सुधा भार्गव  जी 

सुधाकल्प

मेरे बारे में

कविता .कहानी संस्मरण मुक्तक ,आलेख आदि विधाओं पर मेरी लेखनी गतिशील है !पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं !विभिन्न संस्थाओं से जुडाव है !प्रकाशित काव्य -संग्रह 'रोशनी की तलाश में '!इसे डा .कमला रत्नम पुरस्कार मिल चुका है !प्रकाशित बाल पुस्तकें --१ अंगूठा चूस , २ अहंकारी राजा ३ ,जितनी चादर उतने पैर पसार !तीसरी कृति 'राष्ट्रीय शिखर साहित्य सम्मान 'से अलंकृत हो चुकी है !प. बंगाल -की ओर से मुझे 'राष्ट्र निर्माता पुरस्कार 'मिला !


ब्लॉग का URL-http://sudhashilp.blogspot.com

मेरी   राय  - ये  ब्लॉग रचनात्मकता  की  दृष्टि  से  बहुत  सराहनीय  है  .


                   अब  आप  भी  दे  अपनी  राय 
                     पर  पहले  इस  ब्लॉग पर हो  आयें  .
                          
                                                       शिखा  कौशिक  

सोमवार, 22 अगस्त 2011

मेरे सपने मेरे गीत -A NEW BLOG

ब्लॉग का नाम-मेरे सपने मेरे गीत 


ब्लॉग -स्वामिनी -डॉक्टर सुशीला गुप्ता 


ब्लॉग-स्वामिनी का parichay-I am Dr.Sushila Gupta M.A.,Aacharya, Ph-d and Writer..Poem, Gazal,Stories,Articles(Struggle for lecturership) ) i think that honesty is the best policy I believe only गोद
                                    मेरा फोटो
ताजा-प्रस्तुति -
                 


बुधवार, १ जून २०११

प्यारी भाभी

 भाभी! तुम पे बहुत
 प्यार आता है |
तुम्हारे  सिवा अब
न कोई भाता है ||

दिया प्यार तुमने
इतना मुझे |
जैसे हमारा,
वर्षों का नाता है || 

नहीं कोई शिकवा,
शिकायत मुझे |
हूँ आज खुश जो,
इनायत तेरी ||

श्रद्धा करूँ,तेरी भक्ति करूँ,
तेरे लिए, निशि-दिन मरुँ ||
तुझमे समाहित है मन मेरा,
है आज गद-गद ये दिल मेरा ||

खुशियाँ हो दामन में,तेरे सदा,
आंसूं न देना,ऐ मेरे खुदा ||
व्याकुल है दिल,होके तुमसे जुदा,
सबसे निराली है,मेरी भाभी की अदा ||

मेरी  राय -सुशीला जी  की भावाभिव्यक्ति बहुत सशक्त है व हर पोस्ट हेतु विशेष  विषय -चयन उनके ह्रदय की भावुकता को प्रकट  करता  है.उनकी सफलता हेतु हार्दिक शुभकामनायें .
                             ब्लॉग पर जाकर आप भी उनकी भावाभिव्यक्ति का आनंद लें .
                                                     शिखा कौशिक 

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

जनता की आवाज़ बनाये आज अपनी आवाज़

कल की ही बात है भड़ास ब्लॉग पर जाना हुआ वहां एक नए ब्लोगर की टिपण्णी देखी टिपण्णी के माध्यम से उनके प्रोफाईल पर जाना हुआ तब ज्ञात हुआ कि ये महोदय तो   से हैं  पहले आप इनके ब्लॉग का  url  नोट कीजिये-
ये  ब्लॉग है सैय्यद  फैज़ हसनैन का 
और नाम ही नहीं वे लिखते भी अपनी कलम  से जनता की आवाज़ ही हैं विश्वास न हो तो आप  उनके ब्लॉग की एक एक  पोस्ट का अवलोकन कर मेरी बातों की सत्यता को  परख सकते हैं तो   क्लिक  कीजिये लिंक   को और देखिये मीडिया से जुड़े एक और ब्लौगर   के    उत्कृष्ट  विचार..
                  शालिनी   कौशिक



Wednesday, April 27, 2011


"२६ जून की दुविधा "

बताइए न सर मै क्या करू किस की परीक्षा दू ...मै तो परेशां हो गया हो । सरकार कहती है की हर छात्र सभी प्रतियोगी परीक्षा को दे सकता है अगर वो उसके नियमो का पालन करता है तो पर ये कैसी परीक्षा प्रणाली है की एक ही दिन में ४-४ प्रतियोगी परीक्षा हो रही है । ........

ये उस छात्र की दुविधा है जिसने इस वर्ष UGC NET , SSC , CBSE TET और UPPCS की प्रतियोगी परीक्षा का आवेदन किया है अब वह क्या करे इनमे से कौन सी परीक्षा दे या छोड़े । सब एक ही दिन यानि २६ जून २०११ दिन रविवार को हो रही है । ....

भारत सरकार क्या कर रही है , क्या वो इस तरह छात्रो के भविष्य से खिलवाड़ तो नहीं कर रही । आखिर क्यों ऐसा हुआ क्या इन प्रतियोगी परीक्षाओ की समितियों मे कोई भ्रष्ट समझौता हुआ है क्या ? आखिर इस तरह छात्रो के भविष्य से क्यों खिलवाड़ हो रहा है .........

मुझे जवाब चाहिए


सोमवार, 15 अगस्त 2011

आइये स्वतंत्रता दिवस मनाएं ''''अपनी आवाज़'' '' में

आइये स्वतंत्रता दिवस मनाएं ''आवाज़  अपनी '' में क्यों कुछ विचित्र लगा .आज जब कोई भारत में अपनी आवाज़ की बात करता है तो ऐसा विचित्र ही अनुभव होता है.ज़रा तब सोचिये क्या लगा होगा जब लाहौर   षड्यंत्र  कार्यवाही  में विशेष ट्रिब्यूनल  के समक्ष ५ मई १९३० को शहीदे आज़म भगत सिंह ने अपनी आवाज़ में कुछ यूँ कहा होगा-
''वतन की आबरू को पास देखे कौन करता है,
सुना है आज मकतब में हमारा इम्तहाँ होगा .
इलाही वह भी दिन होगा जब अपना आसमां देखेंगे,
जब अपनी ही ज़मीं होगी और अपना आसमां होगा.''
              और आज ऐसी ही कुछ आवाज़ नजर आ रही है श्री तरुण भारतीय जी के ब्लॉग ''अपनी आवाज़'' श्री तरुण भारतीय जी अपने बारे में लिखते हैं-

About Me

My Photo

मै भारत का रहने वाला ,भारत माँ का बेटा हूँ, माँ भारती कि सेवा के लिय हर समय तत्पर हूँ ,बस यही मेरा परिचय है | संपर्क सूत्र - 09829900396
आज स्वतंत्रता दिवस की ६४ वीं वर्षगांठ पर उनके उद्गार कुछ यूँ प्रगट हुए हैं और इनमे पूरी सच्चाई है मैंने तो यही महसूस किया है शायद आपको भी यही अनुभव हो देखिये उनका आलेख आप के लिए मैं यहीं ले आई हूँ-

14 August 2011

64 सालों कि गुलामी

 चारों तरफ स्वतंत्रता दिवस मनाने कि तैयारियां चल रही हैं,बहुत लंबे और लुभावने वादे देश के नेता कर रहे हैं |व बहुत जगह पैसे को पानी कि तरह इस दिवस के नाम पर बहाय जा रहा है | इससे पहले कि आप भी इस जश्न को मनाने के लिय व्यस्त हो जाए | जरा सोचे कि स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं या परतंत्रता दिवस | क्या आपने कभी ये सोचा कि क्या देश स्वतंत्र है ? स्वंतंत्रता का सीधा सा अर्थ होता है, स्व यानि खुद का और तंत्र यानि शासन | हमारे भारत देश में शासन तो है लेकिन जरा इस बात पर गहनता से विचार करना कि ये शासन हमारा है या पराया | अब बात साफ़ है कि आज इस देश में जो शासन प्रणाली चल रही है वो हमारी नहीं है , देश उसी सिद्धांत पर चल रहा है जैसे अंग्रेज चलाया करते थे बस परिवर्तन इतना ही हुआ कि पहले अंग्रेज शासन करते थे और अब उसी सिद्धांत पर इस देश के वो लोग राज करते हैं जो शरीर से भारतीय हैं लेकिन मानसिकता से अंग्रेजियत भरी पड़ी है | विषय बहुत लंबा है परन्तु मुख्य रूप से बहुत से ऐसे उदाहरण हमारे सामने है जिनको जानकार व समझकर पूरी प्रमाणिकता से कहा जा सकता है कि भारत में आजादी आई नहीं है |हाँ सही मायेने में हम आजाद हुए ही नहीं हैं |
पूरी दुनिया के आजादी के इतिहास कि मैं बात करूँ तो ये इतिहास रहा है कि दुनिया में जो भी देश गुलाम रहकर , आजाद हुआ है उसने आजाद होने के बाद सबसे पहले जो काम किया वो है उस देश ने अपनी शिक्षा व मातृभाषा को अपनाया है | क्योंकि शिक्षा व्यवस्था व भाषा किसी भी देश के विकास में रीढ़ कि हड्डी का कम करती हैं |सोचने समझने कि जो क्षमता मातृभाषा में विकसित होती है वो विदेशी या अन्य भाषा में उतनी नहीं हो पाती है | हमारे सामने अमरीका का उदाहरण सामने है, कि अमरीका ने जो ऊँचाई पाई है | उसके इतिहास का हम जब अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि २०० साल पहले तक उसका इतना ज्यादा कोई अस्तित्व नहीं था |परन्तु 1776  के बाद अमरीका ने जो ऊंचाई पाई है उसका प्रमुख कारण यही रहा है कि उसने आजाद होते ही अपने देश कि भाषा व शिक्षा व्यवस्था को अपनाया | इसी तरह चीन का उदाहरण हमारे सामने है |1949 में चीन में जो सांस्कृतिक क्रांति हुई जिसका नेता माओ था माओ ने जब चीन को बदला तो सबसे पहले उसने देश कि भाषा व शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया | इसी तरह जापान, क्यूबा ,स्पेन ,डेनमार्क व कई अन्य देशो का उदाहरण हमारे सामने हैं |
भारत के संदर्भ में देखे तो यहाँ बिलकुल उल्टा चित्र नजर आता है | 1840 में अंग्रेज अफसर मैकाले ने जो शिक्षा व्यवस्था इस देश में भारतीय संस्कृति व सभ्यता को नष्ट करने के लिय व हम सब को मानसिक गुलाम बनाने के लिय बनाई थी वो आज भी इस देश में चलती है | उच्च शिक्षा का जो पाठ्यक्रम अंग्रेजो ने इस में लागू किया था वो लगभग 140 वर्षों से चल रहा है |
और अफ़सोस और दुःख कि बात तो यह है कि मैकाले ने हमारे इतिहास में जो विकृतियाँ डाली थी वो आज भी इस देश कि भावी पीढ़ी को पढाया जाता है |और इससे भी दुःख कि बात यह कि अंग्रेजो इस देश में जो परीक्षा प्रणाली इस देश में लागू करके गए थे वो उनके देश में नहीं चलती है | इसका मतलब सीधा सा यही है कि अगर वो अच्छी ही होती तो वो खुद भी अपनाते |
एक दो और उदाहरणों से बात स्पष्ट होती है कि भारत देश को लूटने और नागरिको पर अत्याचार कने के उदेश्य से अंग्रेज जो कानून बनाकर इस देश में गए थे वही कानून इस देश में चलते है और उनका दुरूपयोग होता | जिसका परिणाम यह कि हमारे देश कि न्यायपालिका सही न्याय नहीं कर पाती है |मात्र फैसला देने में ही वर्षों लग जाते हैं |1857 कि क्रांति होने के बाद जब अंग्रेजो को दर सताने लगा था कि भारतीय नागरिको को यदि काबू में नहीं किया गया तो वे हमारे शासन को जड़े जल्द ही उखाड़ फैकेंगे | भारतीयों कि आवाज को दबाने के लिय अंग्रेजो ने पुलिस बनाकर एक कानून बनया था जिसका नाम था इंडियन पुलिस एक्ट | इस कानून में साफ़ साफ़ लिखा था कि कोई भी अंग्रेज अधिकारी भारतीय नागरिको पर लाठी चार्ज कर सकता है और भारतीयों को यह अधिकार नहीं होगा कि वो इस इस एक्शन ले सकें | और आज 1947 में अंगेजो के जाने के बाद भी भारत देश में यह कानून चलता है और हालात यह हैं कि जब भी किसान , मजदुर , कारीगर या अन्य भारतीय सरकार से शांति पूर्वक अपने हक कि बात को कहने के लिय कोई आंदोलन या जुलुस करते हैं तो आज भी सरकारें इस कानून कि मदद से हमारे देश में हमारे ही नागरिको पर लाठियां बरसवाती  हैं | क्या हक माँगना गुनाह है ? आब आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि असली में आजादी आई है या आज भी भारत परतंत्र है अंग्रेजियत शासन व्यवस्था का |
अंग्रेजो ने भारतियों को लूटने के मकसद से जो टैक्स प्रणाली भारत में चलाई थी वाही आज इस देश में चलती है |इनकम टैक्स , सेल टैक्स , टोलटैक्स, रोड टैक्स इस तरह से लगभग २३ प्रकार के टैक्स इस देश में लगाये थे उनके हालत यह हैं कि आज भारत में 64 प्रकार के टैक्स लगते है और दुःख कि बात यह कि देश के 84 करोड लोग मात्र २० रूपये पर अपनी जिंदगी गुजारते हैं और उनमे से लगभग ८० लाख लोग दो वक्त के खाने को मोहताज हैं|अब आप खुद फैसला किजीय कि भारत में आजादी आई है या 64 सालो कि गुलामी को झेला है |
इस तरह से बहुत से कानून जैसे इंडियन फोरेस्ट एक्ट , इंडियन एक्युजिशन एक्ट(भूमि अधिग्रहण कानून ) व अन्य हैं जो उसी तर्ज पर चलते हैं जैसे अंग्रेज बनाकर गए थे  अब कुछ बात अर्थ व्यवस्था कि करें तो हालत यह हैं कि अंग्रेजो कि लगभग 200 से ज्यादा सालो कि गुलामी सहन करने के बाद भी 1947-48 में जब अंग्रेज इस देश से चले गए थे तब भारत पर १ पैसे का भी कर्ज नहीं था परन्तु आज हालत यह हैं कि भारत का प्रत्येक नागरिक लगभग 18 हजार से भी ज्यादा रूपये का कर्ज दार हो गया है जो कि सरकारे हमसे टैक्स के माध्यम से हर साल वसूलती हैं |
भारत जब 1947 में आजाद हुआ था तब आयत निर्यात का घाटा २ करोड का था आज वही घाटा 17 हजार करोड से भी ज्यादा का हो गया है तो हम कैसे कह दें कि भारत आजाद है |
जो गेहूं देश के नागरिकों को 5 से 6 रूपये किलो मिल जाया करता था वही अनाज आज 18 से २० रूपये किलो मिलता है और देश के किसानो पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है तो ये विकास है या विनाश ये फैसला आप खुद कर सकते हैं |

हालाँकि विषय बहुत लंबा है बहुत सी ऐसी और बाते हैं जो ये साबित करती हैं कि भारत के नागरिको पर वही शासन व्यवस्था चलती है जो अंग्रेजो ने बनाई थी बस फर्क इतना से सा है कि पहले गोरे अंग्रेज शासन करते थे और आज काले अंग्रेज करते हैं | देशवासियों अगर आप सच में इस देश को व अपने आप को आजाद करना चाहते हो तो आओ सब मिलकर व्यवस्था परिवर्तन में सहयोग दो और बदल दो इन गुलामी कि मानसिकता व शासन प्रणाली को |एक बात  हमेशा यही याद रखना परिवर्तन करने के लिय समय कि नहीं संकल्प कि आवश्यकता होती है |
 
एक अज्ञात शायर का ये शेर मुझे उनके इस आलेख को बल देता महसूस हुआ है -
''खूने मासूम बहाने वालों,
       ऐशो आराम की हद लहद  होती है.
अपना भी कौल है काले-मुज़फ्फर सुन लो,
      ज़ुल्म सहने से भी कातिल की मदद होती है.''
माँ भारती के ये बेटे आज जो  अपनी आवाज़ के माध्यम से सोये हुए भारतीयों को जगाने का प्रयत्न कर रहे हैं यह हम सभी की सराहना के हकदार हैं और आप एक बार उनके ब्लॉग पर जाकर मेरे शब्दों की सच्चाई परख सकते हैं .उनकी भावनाओं की क़द्र करते हुए मैं अंत में एक और अज्ञात शायर के शब्दों में बस यही कहूँगी-
''अब कलम तलवार होनी चाहिए,
    शब्द की सरकार होनी चाहिए.''
                शालिनी कौशिक

रविवार, 7 अगस्त 2011

राजीव उर्फ़ भूतनाथ-ब्लॉग की है अनोखी बात

ब्लॉग का नाम - ''बात  पुरानी  है !! ''

ब्लॉग स्वामी का नाम - श्री राजीव थेपडा 

ब्लॉग  स्वामी  का परिचय -

राजीव थेपड़ा

मेरे बारे में

.........आदमी होने का कोई फायदा ना था.....चुपचाप मर गया....भूत बन गया.........मगर यहाँ भी पाया कि जितना निकृष्ट मैं आदमी था....उतना ही निकृष्ट भूत भी.....!!........अब सोच रहा हूँ कि अब क्या करूँ....दुबारा कैसे मरुँ........??

ब्लॉग का url -http://baatpuraanihai.blogspot.कॉम/

ब्लॉग पर प्रस्तुत  अद्यतन रचना-

''सबसे बड़ा डंडा खुद का चरित्र है.....क़ानून नहीं ......!!

मेरी राय-राजीव जी एक उत्कृष्ट रचनाकार  है व् इन्सान भी .

         खुद   भी परख  कर देख लें  .

                                shikha kaushik

http://bhartiynari.blogspot.com/

गुरुवार, 4 अगस्त 2011

भावनाएं -a new blog

ब्लॉग  का  नाम -भावनाएं

ब्लॉग स्वामिनी -ज्योति डंग

ब्लॉग स्वामिनी का परिचय -

भावनाएं-My Photo

मेरे बारे में

About ज्योति ..... मैं एक गृहणी हूँ. जिन्दगी में सदैव खुश रहती हूँ .अपने बच्चों को अपनी जिन्दगी मानती हूँ .परमात्मा मेरा सब से अच्छा दोस्त है.माँ का रिश्ता सबसे अनमोल और पवित्र है . मेरी माँ मेरे लिए खुदा से बडके है. उन जैसी माँ दुनिया में बहुत कम होंगी .वो एक देवी हैं . अगले जन्म वही मेरी माँ बने ,यही इच्छा ,परमात्मा से मांगती हूँ .पति पत्नी एक दुसरे के पूरक होते हैं .मेरे पति देव मेरे दोस्त हैं मैं जिन्दगी के हर रिश्ते को दोस्ती के धागे में पिरोके रखती हूँ.दुनिया में सब से पहले परमात्मा है जिसने मुझे इंसान के रूप में आने का अवसर दिया फिर मेरी माँ , जिन्होंने मुझे जन्म देके इस दुनिया को देखने का अवसरदिया , उसके पश्चात् मेरे बच्चे हैं , जिनको जन्म देके मैं माँ जैसे खूबसूरत रिश्ते से जुडी माँ और बच्चे का दुनिया का सबसे खुबसूरत रिश्ता होता है . मैं रानी झांसी के असूलों को मानती हूँ . भगत सिंह , सुभाष चन्द्र बोसे जैसे लोग मेरे आदर्श हैं दोस्ती का रिश्ता अनमोल होता है अच्छे दोस्त बहुत मुश्किल से और किस्मत वालों को मिलते हैं .सच्चा और अच्छा दोस्त वही जो मुसीबत में काम आये. यह दुनिया स्वर्ग बने , यही दुआ है उस खुदा से .

ब्लॉग पर प्रस्तुत ताजा पोस्ट -बाल-विवाह या  बचपन से खिलवाड़ 
  मेरी राय -
ज्योति जी की  कलम में दम है . 

             आप भी इस  लिंक पर जाकर ब्लॉग का भ्रमण कर आयें .

                                    शिखा कौशिक

रविवार, 31 जुलाई 2011

जरा बचके ये ''एम्.सिंह की दुनाली''

इस बार तो आप सभी को बुलेट प्रूफ पहन कर हमारे इस ब्लॉग की प्रस्तुति को देखना होगा कारण वही गोलियां चलने का लगातार खतरा बना  है   और चलिए हम तो बच जायेंगे क्योंकि हम तो उनके पीछे खड़े होकर  आपको ये सब बता रहे हैं किन्तु सामने खड़े होने के कारण आपको ज्यादा ख़तरा है चलिए वैसे लगता है कि इस वक़्त उनकी दुनाली में गोलियां नहीं हैं वे तो कल ही खाली होगई थी इसलिए तो रुके हुए थे हम कि पहले वे गोलियां ख़त्म हो जाएँ तभी हम  उनके बारे में कुछ कहें .अब ये देखिये उनकी दुनाली के सामने हमारे साथ हमारे शिष्य साधू संत स्वभाव के ''राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ जी'' भी साथ में थे किन्तु एम्.सिंह जी को दुनाली में गोली भरते देख ऐसे साफ हो गए कि पिछले दो हफ्ते   से उनका कोई अता पता ही नहीं  अगर आपमें से किसी को वो कहीं मिलें तो कृपया उन्हें यहाँ पहुंचा दें नहीं तो इतने दिन बाद तो पुलिस भी गुमशुदा में रिपोर्ट दर्ज करने में काफी दिक्कत दिखाएगी .
     चलिए अब उनकी चिंता को छोड़कर एम् सिंह जी के ब्लॉग दुनाली पर बेखटके चलते हैं .ब्लॉग url  है-

आज आप उनकी दुनाली कि एक गोली ही देखिये काफी जबरदस्त असर करने वाली है.
इस बार हदों की भी हदें लांघी हैं न्‍यूज़ 24 ने. पता नहीं चैनल कौन चला रहा है और उसका मकसद क्‍या है, पर एक बात तय है कि जो भी इसके मालिक या एडिटर होंगे, उन्‍हें न्‍यूज़ की कोई समझ नहीं होगी.
शनिवार शाम सात बजे के बुलिटेन में धोनी का छुपा हथियार का हैडिंग चल रहा था. समझा शायद कुछ खास दिखा रहे होंगे. काफी देर बकवास करने के बाद युवराज सिंह को छींकते हुआ दिखाया गया.
स्‍क्रीन पर लिखा था- छुपा हथियार बनाएगा धोनी को ट्रेंटब्रिज का सिंघम.
वाइस ओवर था-
युवराज जैसे-जैसे छींके, विकेट गिरते रहे.
अंग्रेजों के विकेट गिराने का कारनामा तेज गेंदबाजों की तिकड़ी ने नहीं किया, यह कारनामा किया युवराज की छींकों ने.
जब भी युवराज छींकते, विकेट गिरता...
तीनों गेंदबाज कुछ नहीं कर पाए, युवराज ने विकेट गिराए.
जी हां, यही था धोनी का छुपा हथियार.
और भी न जाने क्‍या-क्‍या कहा.
.
.
.
हम तो यही चाहेंगे कि युवराज छींकते रहें और इं‍ग्‍लैंड के विकेट गिरते रहें.

आखिर क्‍या साबित करना चाहते हैं ऐसे न्‍यूज़ चैनल्‍सइनका क्‍या स्‍तर है?
और  अब  जानिए  इनके  बारे  में-


मेरे बारे में


पढ़ाई में जीरो तो नहीं पर जीरो से ज्यादा भी न था. मैथ्स और साइंस तो कभी पल्ले नहीं पड़े. इतिहास में कभी अच्छे नंबर नहीं आए. भूगोल भी समझ के परे था. अंग्रेजी में पास होने लायक नंबर मिल जाते थे, हिन्दी भी ठीक-ठाक थी. गणित के सवालों पर ही मेरा दिमाग सवाल उठाता था. आखिर ये वर्गमूल और स्केयर आदि आम जिंदगी में कहां काम आएंगे? माता-पिता, पड़ोसी या दुकानदार कभी मैथ्स के सूत्रों का इस्तेमाल नहीं करते तो मैं क्यों सीखूं?
क्रिकेट और शतरंज में दिमाग खूब चलता था. कॉलेज में पहुंचा तो अर्थशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान और कम्यूटर में रुचि हुई. कम्यूटर अच्छे से समझ में आता था. बीए के बाद मास कम्यूनिकेशन्स की पढ़ाई की. संचार की ताकत और तरीकों को जाना. इस दौरान जिंदगी के कुछ बहुत खूबसूरत तो कुछ बेहद निराश करने वाले लम्हों को जीया. काफी कुछ सिखाया यूनिवर्सिटी के दो सालों ने. पर उससे कहीं ज्यादा सीखना अभी बाकी है.
पढ़ाई खत्म की तो प्रिंट मीडिया में नौकरी शुरू की. पंजाब केसरी, दैनिक भास्कर और फिर हिन्दुस्तान में काम किया. पत्रकारिता के साथ-साथ राजनीति से भी वास्ता पड़ा. साढ़े 4 साल प्रिंट मीडिया में रहा. अब खुदा को कुछ और ही मंजूर था. हालात ऐसे बने कि हिन्दुस्तान में मेरे ढ़ाई साल के करिअर का अंत हुआ. जीवन में एक बड़ा परिवर्तन आया. एक गांठ बांधी कि जीवन में कभी भी किसी भी हालात में नशा नहीं करना है. नशा तो पहले भी नहीं करता था, लेकिन कभी-कभार महफिल में बैठ जाता था.
शायद भगवान कुछ और समय नौकरी करवाना चाहता था, इसलिए वेब मीडिया में चांस मिल गया. आजकल दिल्ली की भीड़ बढ़ा रहा हूं और मोबाइल वैस व वेब मीडिया में काम कर रहा हूं. अब आगे क्या होगा? राम जाने.
और हां, भला ब्लॉगिंग का जिक्र कैसे भूल सकता हूं. लिखने का चस्का काफी पहले से था. खुद को अकेले पाना और फिर अकेलेपन को दूर करने के लिए लिखना. कुछ कहना चाहें और कह ना पाएं तो उसे लिख देना. किसी को गाली न दे सकना और लिख देना. किसी गलती पर प्रायश्चित करने के लिए कागज पर लिख देना. बस. हमारे आस-पास बहुत-सी चीजें हमें कहने या लिखने को मजबूर करती हैं. कुछ लोग कहना पसंद करते हैं तो कुछ लोग लिखना. और कुछ लोग दोनों ही पसंद करते हैं. मैं लिखने में ज्यादा विश्वास करता हूं. इसलिए ब्लॉग पर हूं.

-मलखान  सिंह
अब देखिये और जानिए इनके बारे में और इनके ब्लॉग दुनाली के बारे में.हम भी बेकार ही डर रहे थे अच्छा हुआ जो ' 'मेरे  बारे में ''पढ़ लिया आप भी अब डरना छोडिये और दुनाली पर बेखटके जाइये.और जरा सहायता कीजिये राजीव जी को ढूँढने में भी वे तो अभी तक दुनाली से डर कहीं छिपे बैठे हैं.
                                         
  शालिनी कौशिक


गुरुवार, 28 जुलाई 2011

आइये कशिश की ओर चलें

इस बार सबसे पहले आप ब्लॉग का url  ही नोट कीजिये :-

अब  कुछ इनके शब्दों में इनके बारे में -

मेरे बारे में[Image1360.jpg]

मैँ नाचीज अपने बारे में क्या कहूँ ? अभी तक खुद से ही अन्जान हूँ,अनछुआ हूँ लेखकों की तरह लिखना मुझे आता नहीं,बस जब भी हृदय के दर्पण में भावनायें झाँकती है तो टूटे फूटे शब्दों को कलम के धागे में पिरोकर उनका श्रृंगार करने की कोशिश करता हूँ। यह ब्लॉग,ब्लॉग नही,मेरी किताब ए जीस्त है,और यहाँ लिखा हर एक शब्द मेरे दिल ए ज़ज्बात से निकली वो खूबसूरत आबाजें हैं जिन्होंने कुछ नायाब लम्हों में जन्म लेकर कई बार अपने वजूद को तलाशने की कोशिश की है.... सफर अभी जारी है और कशिश भी.....
और सिर्फ ये ही नहीं कि कुमार जी के जज्बात केवल उनके प्रोफाइल तक ही सीमित हों उनके जज्बात शब्दों में बहुत खूबसूरती से उतरते हैं और ये आप उनके ब्लॉग कशिश पर जाकर देख सकते हैं .तो देखिये और परखिये हमारी खोज को.कि क्या हम सही हैं ?
                         शालिनी कौशिक