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गुरुवार, 15 मार्च 2012

Buniyad : अरब और हिंदुस्तान का ताल्लुक़

डा. अनवर जमाल ख़ान  
अरब और हिंदुस्तान का ताल्लुक़ आज से नहीं है बल्कि पहले दिन से है, इस बात को वही लोग जानते हैं जो कि तत्व को जानते हैं।
इस बात को यह ब्लॉग बताता है . डा. अनवर जमाल ख़ान  का अर्थात हमारा कहना है कि हम सब एक हैं और यह कि हम सबको प्यार मुहब्बत के साथ रहना चाहिए क्योंकि हम सब एक परिवार हैं और हमारा तीर्थ भी एक ही है और हमारा मालिक भी सिर्फ और सिर्फ एक है.
हमने काबा के इमाम डा. शैख़ अबू इब्राहीम अलसऊद का भाषण सुना जो कि अरबी में था और फिर उर्दू में भी उसका अनुवाद करके बताया कि उन्होंने यह कहा कि मुसलमान दीन की दावत का काम करें और लोगों के साथ नरमी का बर्ताव करें चाहे उनका अक़ीदा कुछ भी हो।
इस मौक़े पर इमामे हरम ने पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद साहब स. की ज़िंदगी का एक वाक़या बताया कि मदीने की उनकी मस्जिद में एक आदमी आया और उसने वहां  पेशाब करना शुरू कर दिया। पैग़ंबर साहब के साथियों ने उसे रोकना चाहा तो आपने उन्हें रोक दिया और जब वह पेशाब कर चुका तो उस जगह को पानी मंगा कर धो दिया।
उनके इस बर्ताव से वह आदमी बहुत प्रभावित हुआ और उसकी ज़िंदगी उस दिन के बाद से पूरी तरह बदल गई।
 
काबा वह पहला घर है जो मालिक की इबादत के लिए बनाया गया है। इसे हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने सबसे पहले बनाया था। आदम अलैहिस्सलाम को स्वयंभू मनु कहा जाता है। जब उनके बाद जल प्रलय आई तो उसका असर इस घर पर भी पड़ा था। इसके बाद हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने आज से लगभग 4 हज़ार वर्ष पहले काबा की जगह पर कुछ दीवारें ऊंची की थीं। छत वह डाल नहीं पाए क्योंकि तब यह इलाक़ा बिल्कुल निर्जन था। उन्होंने वहां अपने बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम को उनकी मां के साथ आबाद किया। उस समय उस घर में कोई मूर्ति वग़ैरह न थी। बस उस पैदा करने वाले मालिक को ही पूजा जाता था। तब हिंदुस्तान से भी लोग वहां जाते थे। मक्का को भारतीय लोग मख के नाम से जानते हैं। यज्ञ के पर्यायवाची के तौर पर ‘मख‘ शब्द भी बोला जाता है जैसा कि तुलसीदास ने विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा हेतु श्री रामचंद्र जी के जाने का वर्णन करते हुए कहा है कि
*प्रात कहा मुनि सन रघुराई। निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई॥
होम करन लागे मुनि झारी। आपु रहे मख कीं रखवारी॥1॥
भावार्थ:-सबेरे श्री रघुनाथजी ने मुनि से कहा- आप जाकर निडर होकर यज्ञ कीजिए। यह सुनकर सब मुनि हवन करने लगे। आप (श्री रामजी) यज्ञ की रखवाली पर रहे॥1॥

‘मख‘ शब्द वेदों में भी आया है और मक्का के अर्थों में ही आया है। यज्ञ को यज भी कहा जाता है। दरअस्ल यज और हज एक ही बात है, बस भाषा का अंतर है। पहले यज नमस्कार योग के रूप में किया जाता था और पशु की बलि दी जाती थी। काबा की परिक्रमा भी की जाती थी। बाद में यज का स्वरूप बदलता चला गया। हज में आज भी परिक्रमा, नमाज़ और पशुबलि यही सब किया जाता है और दो बिना सिले वस्त्र पहने जाते हैं जो कि आज भी हिंदुओं के धार्मिक गुरू पहनते हैं।
क़ुरआन ने यह भी बताया है कि मक्का का पुराना नाम बक्का है , 
मक्का का ज़िक्र बाइबिल में इसी नाम से आया है। देखिए किताब ज़बूर 84, 4 व 6
बाइबिल में यहां मक्का का नाम ‘बक्का‘ बताया गया है। 
‘बक्का‘ का अर्थ है रूलाने वाला। जो यहां आता है, वह यहां से वापस नहीं जाना चाहता और जब उसे लौटना पड़ता है तो वह रोता है। ‘बुक्का‘ शब्द उर्दू हिंदी में रोने के अर्थों में आज भी प्रचलित है।
संस्कृत में रूलाने वाले को रूद्र कहा जाता है। वेदों में कई रूद्रों का ज़िक्र आया है उनमें से एक मक्का है।
ऋग्वेद 5,56,1 में मरूतगण को रूद्र के पुत्र कहा गया है।
मरूतगण का अर्थ मरूस्थलवासी है।
इन मरूतगणों की वेदों में बहुत प्रशंसा आई है और इन्हें इंद्र से भी ज़्यादा महान कहा है।
यह सब बातें हमें याद हो आईं जैसे ही हमें पता चला कि देवबंद में काबा के इमाम डा. शैख़ अबू इब्राहीम अलसऊद तशरीफ़ ला रहे हैं। 
See  :

अरब और हिंदुस्तान का ताल्लुक़- 1

 Picture _
This was historic day in Deoband. The Imam of Ka'ba, Shaikh Abu Ibrahim Sa'ud ibn Ibrahim ibn Muhammad ash-Shuraim visited Darul Uloom Deoband today on 4 March 2012 Sunday.
He arrived in Darul Uloom Deoband via helicopter and landed here around 1 O'clock. Mufti Abul Qasim Nomani presented him Words of Thanks in the grand Jama Rashid and welcomed him in Deoband.

 

 
 

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

Wishing you a very...very...very prosperous new year 2012

आप सभी को नए साल २०१२ की मुबारकबाद .
मालिक हम सबको हर मुसीबत से बचाए और हरेक नेकी का रास्ता दिखाए ताकि हमारा अंजाम अच्छा हो.
आमीन .

अब कुछ अच्छे संदेसे

Something in your smile which speaks to me,
Something in your voice which sings to me,
Something in your eyes which says to me,
That you are the dearest to me.
“Happy New Year”


Another day, another month, another year.
Another smile, another tear, another winter.
A summer too, But there will never be another you!
Wishing a very HAPPY N BLESSED New Year to You!!


We will open the new book.
Its pages are blank.
We are going to put words on them ourselves.
The book is called Opportunity
and
its first chapter is New Year's Day.


When the mid-nite bell rings tonight..
Let it signify new and better things for you,
Let it signify a realisation of all things you wish for,
Wishing you a very...very...very prosperous new year.


Like birds, let us, leave behind what we don’t need to carry…
GRUDGES, SADNESS, PAIN, FEAR and REGRETS.
Life is beautiful.. Enjoy it.
HAPPY NEW YEAR


Beauty..
Freshness..
Dreams..
Truth..
Imagination..
Feeling..
Faith..
Trust..
This is begining of a new year!

बुधवार, 7 सितंबर 2011

A new blog (Reader Blogs - Navbharat Times - India Times)

बड़ा ब्लॉगर वह है जो कमाता है

और डेल कारनेगी ने कहा है कि ‘आदमी को सबसे प्यारी आवाज़ उसके नाम की आवाज़ लगती है‘
ठग इस बात को जानते हैं और वे लोगों की इसी कमज़ोरी का फ़ायदा उठाकर अपनी रददी को किताब के भाव बेच भागते हैं।

देखिये कमाने के कुछ जायज़ तरीके (वीडियो)

रविवार, 4 सितंबर 2011

Nice Information ब्लॉगर्स मीट वीकली (7) Earn Money online


हाजी अब्दुल रहीम अंसारी साहब
कागज़ी समाजसेवी सबक़ लें ... 

 समाचार पत्रों में आप अक्सर समाजसेवियों के बारे में पढ़ते रहते है. किन्तु जो समाजसेवी समाचार पत्रों की सुर्खियाँ बनते है उसके पीछे कितनी सतनी सच्चाई होती है. शायद हर पत्रकार जानता है. ऐसे समाजसेवियों को आईना दिखने के लिए हैं.  हाजी अब्दुल रहीम अंसारी, एक ऐसा नाम जो उन लोंगो के लिए के लिए प्रेरणा श्रोत है जो खुद को समाजसेवी कहलाने के लिए परेशान रहते है किन्तु समाजसेवा का कोई कार्य नहीं करते. 

मूलतः संत रविदासनगर भदोही जनपद के काजीपुर मुहल्ले के रहने वाले अब्दुल रहीम अंसारी नगर के अयोध्यापुरी प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कई वर्षो तक  कार्यरत रहे. २००७ में वे इसी विद्यालय से अवकाश प्राप्त किये, दो दिन घर पर रहने के बाद उन्हें एहसास हुआ की वे घर पर खाली नहीं रह सकते. लिहाजा फिर पहुँच गए उसी स्कूल जहाँ बच्चो को पढ़ाते थे, उन्हें देखते ही बच्चे चहक उठे. उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य से पढ़ाने की इच्छा जाहिर की और नियमित रूप से विद्यालय आकर पढ़ाने लगे. यही नहीं विद्यालय का लेखा जोखा पहले उन्ही के पास रहता था, दुबारा यह जिम्मेदारी उन्हें फिर सौंप दी गयी.  २००९ में उन्होंने हज भी किया. पांच वक़्त के नमाज़ी अब्दुल रहीम अभी तक नियमित रूप से विद्यालय  आकर बच्चो को शिक्षा देते रहते है. उन्हीं के दिशा निर्देश पर पूरा विद्यालय परिवार चलता है. एक बार विद्यालय के प्रधानाद्यापक और सहायक अध्यापक राजीव श्रीवास्तव ने उन्हें अपने वेतन से कुछ पारिश्रमिक देने की बात कही तो वे  भड़क उठे.  कहा आज भी सरकार उन्हें आधी तनख्वाह देती है. हराम का लेना उन्हें पसंद नहीं जब तक शरीर साथ देगा वे बच्चों को नियमित शिक्षा देंगे. यही नहीं वे होमियोपैथिक के अच्छे जानकर भी है. विद्यालय के बच्चे जब बीमार होते हैं तो वही दवा देते हैं.. यही नहीं जो भी उनके पास इलाज के लिए पहुँचता है. उसे भी दवा देते है. और इस दवा का वे कभी एक पैसा तक नहीं लेते. आज वे अपने मुहल्ले में वे सम्मान की दृष्टि से देखे जाते है.  आज जहा लोग पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते है. ऐसे में वे सम्मान जनक पात्र ही नहीं वरन पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत  है.
सच इंसानियत, समाजसेवा का जज्बा हर इन्सान में होना चाहिए चाहे वह किसी भी धर्म का हो. ऐसे महान व्यक्तित्व को मैं सलाम करता हूँ. यदि ऐसे लोंगो का अनुसरण लोग करें तो जरा सोचिये समाज का क्या स्वरूप होगा. 

हाजी अब्दुल रहीम साहब के बारे में हमें यह सारी जानकारी हमारे मित्र हरीश सिंह जी ने दी है जो कि ख़ुद भदोही में ही रहते हैं। यह जानकर अच्छा लगता है कि हमारे बीच  अभी ऐसे  लोग मौजूद हैं जो कि अपने फ़र्ज़ पहचानते हैं और उसे अदा करते हैं और यह तो सोने पर सुहागे जैसा सुखद है कि यह सब करने वाला एक मुसलमान है।
हमारी दुआ है कि मुसलमानों को विशेष रूप से हाजी जी के अमल से प्रेरणा मिले और यूं तो वह हरेक के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं ही।
ब्लॉगर्स मीट वीकली में आज सबसे पहले हाजी अब्दुल रहीम साहब का ही ज़िक्र किया गया है। जिसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं- 

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

नई जानकारी देता है यह ब्लॉग

क्या हैं रूटीन करप्‍शन और प्‍लैन्‍ड करप्‍शन

जयती गोयल 
(http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/jayablogs/entry/%E0%A4%95-%E0%A4%AF-%E0%A4%B9-%E0%A4%B0-%E0%A4%9F-%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%AA-%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA-%E0%A4%B2-%E0%A4%A8-%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%AA-%E0%A4%B6%E0%A4%A8)

देश में दो तरह का भ्रष्‍टाचार है।  एक तो आम जनता से जुड़ा जिससे जनता रोज मर्रा की जिंदगी में जूझती है यानी  'रूटीन करप्‍शन' । दूसरा, सत्‍ता सुख भोगने वाले नेताओं की सोची-समझी योजना के तहत किया जाने वाला भ्रष्‍टाचार यानी  'प्‍लैन्‍ड करप्‍शन' .
 
रूटीन करप्‍शन के तहत---- राशन कार्ड बनाने, जाति प्रमाण पत्र जारी करने, बिजली कनेक्‍शन जारी करने, स्‍कूल-कॉलेज में दाखिला आदि आते हैं / इसमें सरकारी नौकरशाहों का फायदा ज्यादा होता है अनुमान के तौर पर करीब ६०-७०% की रकम इनलोगों की जेब में जाती है इस भरष्टाचार से /

प्‍लैन्‍ड करप्‍शन  के तहत ---- 2जी घोटाला, सीडब्‍ल्‍यूजी घोटाला, खाद्यान्‍न घोटाला, नोएडा जमीन घोटाला आदि आते  हैं। 

 दोनों ही तरह के करप्‍शन में बढ़ोतरी हो रही है। रूटीन करप्‍शन में रिश्‍वत की रकम बढ़ रही है, तो प्‍लैन्‍ड करप्‍शन में घोटालों के नए-नए तरीके ईजाद हो रहे हैं।


 

मंगलवार, 30 अगस्त 2011

यह साइट आपको कैसी लगी ?

कविता और कहानियों से भरपूर एक साइट
कविता और कहानियों के लिए यह साइट हमें तो अच्छी लगी .
आपको कैसी लगी ?

http://www.lekhni.net/613228.html

युवक कवि नारी-सौंदर्य पर भी मुग्ध हुआ , कवि अपनी कल्पना की सुन्दरी बाला से स्पष्ट कहता है कि प्रकृति की अनंत सुषमा को छोड़कर मैं तेरे मांसल सौंदर्य की सीमा में अपने को कैसे बांध सकता हूँ?

छोड़ द्रुमों की मृदुल छाया, तोड़ प्रकृति से भी माया

बाले! तेरे बाल-जाल में, कैसे उलझा दूं लोचन।

तज कर तरल तरंगों को, इन्द्रझनुष के रंगों को;

तेरे भ्रू भंगों में कैसे, बिंधवा दूं निज मृग सा मन।।

रविवार, 21 अगस्त 2011

हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल के बारे में (Shikha Kaushik's Opinion)

Saleem Khan & Anwer Jamal Khan
प्रेरणा अर्गल जी और डॉ.अनवर जमाल जी की ये संयुक्त प्रस्तुति बहुत ही सार्थक पहल है और जिस शालीन ढंग से यहाँ ब्लोग्स की पोस्ट की चर्चा की जाती है वह सारे ब्लॉग जगत में सराहनीय है.सही कहा कि जब त्यौहार साथ साथ हो सकते हैं तो हम उन्हें साथ साथ मनाने से गुरेज़ क्यों करें.हम तो अपने बचपन से ही सारे त्यौहार साथ साथ मनाते रहे हैं और यदि ईश्वर की और इस धरती पर बसे सत्पुरुषों की कृपा दृष्टि यूँ ही बनी रही तो सारी जिंदगी हम मिल जुल कर ही अपने जीवन को हंसी ख़ुशी बिताना चाहेंगे.

ब्लॉगर्स मीट वीकली (5) Happy Janmashtami & Happy Ramazan

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

सच्चाई को निर्भीकता से सामने लाता है 'हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेश्नल'

बरसों पहले जब दुनिया बाबा की दीवानी थी। तब भी हमने लोगों को बताया था कि योग के नाम पर बिज़नैस किया जा रहा है। पश्चिम में योग की मूल आत्मा वैराग्य को ग्रहण नहीं किया जा रहा है बल्कि वहां की औरतें अपने को   आकर्षक बनाने के लिए बाबाओं से योग सीखती हैं और इसी मक़सद से वहां के पुरूष भी योग सीख रहे हैं। तनाव से मुक्ति के लिए भी वे योग को एक एक्सरसाइज़ के तौर पर ही लेते हैं। लेकिन हमारे कहने पर तब उचित ध्यान ही नहीं दिया गया बल्कि हमें कह दिया गया कि आप तो हैं ही देश के ग़द्दार ।
जिन्हें राष्ट्रवादियों का अग्रदूत माना जा रहा था, उनका कच्चा चिठ्ठा आज सबके सामने है तो समझा जा सकता है कि जो लोग इनके साथ थे या इनके पीछे थे, उनके कर्म कैसे होंगे ?
आज बाबा और उनका राज़दार बालकृष्ण दोनों ही चिंतातुर नज़र आते हैं। वे तनाव दूर करने के लिए ख़ुद योग का सहारा क्यों नहीं लेते ?
गद्दी पर क़ब्ज़े के लिए गुरू जी को ऊर्ध्वगमन  करा देने वाले शिष्य कुछ भी कर सकते हैं। अपने ही जैसे राजनीतिज्ञों से अगर वह भी दूसरे बाबाओं की तरह सैटिंग कर लेते तो आज उनके आभामंडल पर यूं आंच न आती। जो अफ़सर कल तक पांव छूते थे वे आज गला पकड़ रहे हैं।
ये बाबा तो लोक व्यवहार की नीति तक से अन्जान निकले।
आदरणीय श्री महेंद्र श्रीवास्तव जी का लेख इन सभी बातों को बेहतरीन अंदाज़ में बयान करता है और यह तारीफ़ दिल से निकल रही है।
इस मंच को एक बेहतरीन लेख देने के लिए आपका शुक्रिया !
उनके लेख का लिंक नीचे दिया जा रहा है

अविनाश वाचस्पति जी का लेख भी इसी विषय पर एक करारा व्यंग्य है। उसका लिंक यह है

इतनी अच्छी पोस्ट्स जिस ब्लॉग पर हों तो क्या वह अच्छा न लगेगा भला ? 
'ब्लॉगर्स मीट वीकली' के ज़रिये ब्लॉग पर मीत आयोजित करने वाला पहला ब्लॉग भी यही  है .

शनिवार, 23 जुलाई 2011

हिंदी ब्लॉग टिप्स एक अच्छा ब्लॉग है Nice Blog

एक अच्छा ब्लॉग है।
इसकी ख़बियां इतनी हैं कि उन्हें बताने के लिए केवल शब्द काफ़ी नहीं हैं बल्कि आपको ख़ुद इस साइट पर जाकर देखना चाहिए।
उनकी एक पुरानी पोस्ट का लिंक हम यहां दे रहे हैं जिसके ज़रिये आप अपने ब्लॉग में हिंदी टाइपिंग टूल चस्पां कर सकते हैं। नई पोस्ट देखना आपकी ज़िम्मेदारी है और लौटकर बताना कि वहां से आपने क्या फ़ायदा उठाया ?

बुधवार, 20 जुलाई 2011

किशोर पारीख जी का ब्लॉग

आपको ज़रूर पसंद आएगा Maza




मैंने उनके ब्लॉग पर यह पढ़ा
1- बाजार में हमें पीटने को सारे बंदे चिपट गये
पत्नी ने काम वाली बाई को अपनी पुरानी साड़ी दी थी
और हम उसे अपनी पत्नी समझ के पीछे से लिपट गये


2- धरती पे तुम, आसमाँ में तुम, पूरे जहाँ में तुम,
फिज़ाओं में तुम, घटाओं में तुम, हवाओं में तुम,
ठीक ही कहा है किसी ने
बुरी आत्मा का कोई ठिकाना नही होता

 

3- एक लड़की से मैने रोने का कारण पूछा तो वो बोली
मेरे
पिता चाइनीज थे बेचारे भरी ज़वानी मे हम सबको छोड़ कर चले गये
बस
इसी बात का गम है मैने कहा चुप हो जा बच्ची
चाइना
का माल तो चलता ही कम है

आज मूड आफ़ सा था ब्लॉग जगत की घटना के कारण, सोचा कि दिल बहलाया जाए और इस ब्लॉग पर ऐसा ‘सौदा‘ काफ़ी है।
आप भी देखिए
http://udghoshak.blogspot.com/

शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

'ब्लॉग की ख़बरें', हिंदी ब्लॉग जगत का पहला समाचार पत्र

इस बात को दो जगह कहा गया है



दरअस्ल यह पोस्ट हमने लिखी थी साहित्य प्रेमी संघ के लिए। इस संघ की स्थापना इंजीनियर सत्यम शिवम साहब ने की है और यह साहित्य सुमन उगाता है और ख़ुशबू फैलाता है। हमने हमेशा साहित्य की रचना तभी की है जबकि उसका कोई असर व्यक्ति के जीवन और उसके चरित्र पर पड़ता हो। मात्र मनोरंजन के लिए साहित्य लिखना हमारी नज़र में समय को बेकार गंवा देना है।
समाज में चारों ओर समस्याएं हैं, हमें उनके हल के बारे में सोचना चाहिए और ऐसा साहित्य रचना चाहिए जो सबको रास्ता दिखा सके।
एक नज़र आपको ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ पर भी डालनी चाहिए, जो ब्लॉग जगत का सबसे पहला समाचार पत्र है और निष्पक्ष है।
ग़लत बात को ग़लत कहने में और धोखाधड़ी को उजागर करने में यारी और बिरादरी का कोई लिहाज़ नहीं करता। यहां आप अपने ब्लॉग का मुफ़्त प्रचार कर सकते हैं।

मंगलवार, 5 जुलाई 2011

आपका अकाउंट हो जाएगा बिल्कुल बुलेट प्रूफ़

शालिनी जी का ईमेल अकाउंट किसी ने हैक कर लिया और उसने उनके मित्रों को सन्देश भेजकर कहा किमैं यूक्रेन में हूँ और कुछ गुंडों ने मेरे रूपये और मेरा मोबाइल लूट लिया है. मुझे तुरंत Dollars भेज दीजिये. यह पत्र हमें अक्सर मिलते रहते हैं . हम समझ गए कि उनका अकाउंट किसी मुजरिम ने हैक कर लिया है. 
'हिंदी ब्लॉगर्स फोरम इंटरनेश्नल' पर आज एक ऐसा लेख पेश किया गया है जिसके नियमों को अपनाकर ब्लॉगर्स ऐसी घटना का शिकार होने से बच सकते हैं .
डा. अयाज़ अहमद साहब एक समाज सेवी के रूप में जाने जाते हैं। रोज़ाना 100 से भी अधिक पेशेंट देखना उनका रोज़ का काम है। इसी व्यस्तता के चलते वे ब्लॉगिंग में पहले जितने सक्रिय आजकल नहीं हैं लेकिन हमारी दरख्वास्त पर उन्होंने ‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘ के लिए एक लेख लिखा है और बताया है कि अपने ईमेल अकाउंट को बुरी नज़र से बचाने के लिए क्या क्या उपाय करने चाहिएं ? 
पेश है एक ऐसा लेख जिसके उसूलों को अपना कर आपका अकाउंट हो जाएगा बिल्कुल बुलेट प्रूफ़ !
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भाई एजाज़ उल हक़ द्वारा भेजा  गया नया टाइटिल 
 जीमेल पर या किसी भी साइट पर अपना अकाउंट इस्तेमाल करने के लिए एक पासवर्ड अनिवार्य होता है। पासवर्ड निश्चित करने में आम तौर पर लोग अपने नाम का कोई हिस्सा या जन्मदिन की डेट या अपना मोबाइल नंबर या अपने स्कूल आदि का नाम इस्तेमाल करते हैं। इंटरनेट हैकर यह बात जानते हैं और इसी तरह के अनुमान से वे लोगों का अकाउंट हैक करके लोगों को तरह तरह के नुक्सान पहुंचा देते हैं। कई बार तो ये हैकर अफ़वाह फैलाकर देश की सुरक्षा तक को ख़तरे में डाल देते हैं।
अधिक पढने के लिए








शुक्रवार, 17 जून 2011

चर्चामंच की स्थापना आदरणीय रूपचंद शास्त्री मयंक जी ने की - Dr. Anwer Jamal


आज आपको जानकारी देते हैं चर्चामंच की । ‘धार्मिकता की सच्ची कसौटी‘ शीर्षक से मेरा लेख आज की चर्चा में भी शामिल है।
यह मंच नियमित रूप से इतने अच्छे लिंक देता है कि पढ़कर वाक़ई मज़ा आ जाता है।
इस मंच की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भेदभाव नहीं किया जाता किसी से भी । यही इसे लोकप्रिय बनाता है। मैं इसे शुरू से ही ब्लॉग जगत में भेदभाव झेलता आ रहा हूं और इसे मिटाने के लिए लड़ता भी आ रहा हूं। जब लड़ता हूं तो लोग कहते हैं कि यह विवाद पैदा करता है। जुल्म के खि़लाफ़ आवाज़ उठाने वाले पर ही बदनामी का ठप्पा लगा देते हैं नालायक़ लोग !
ख़ैर, आदरणीय रूपचंद शास्त्री मयंक जी ने चर्चामंच की स्थापना की है। आज तो कई लोग इस मंच पर अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं लेकिन एक समय था कि 3 माह तक उन्होंने अकेले ही इस मंच को संभाला। यह वाक़ई अद्भुत है, ख़ासकर वृद्धावस्था में। बुढ़ापे में भी मुझे उनमें बुढ़ापे का कोई लक्षण बहुत दिनों से नहीं मिला। शायरी वह ऐसी करते हैं कि आदमी को ‘सिद्ध मकरध्वज रस‘ खाने की नौबत ही न आए। यह आयुर्वेद की एक महौषधि है। डाक्टर साहब एक आयुर्वेदिक चिकित्सक भी हैं। इसलिए इस दवा का ज़िक्र कर दिया।
जनाब बच्चों के लिए भी गीत लिखते हैं। मुझे जनाब से मिलकर इतना मज़ा आया जितना कि आजकल आम चूस कर आता है।
उनकी बाल कविताएं पढ़कर मेरे अंदर का बचपन मेरे मन की सतह पर उभर आता है।
चर्चामंच का लिंक यह रहा :

"खूब लड़ी मर्दानी वह तो..." (चर्चा मंच-549)



और मेरी पोस्ट जो चर्चामंच पर है उसका लिंक यह है

धार्मिकता की सच्ची कसौटी - Dr. Anwer Jamal

कभी इस देश का हाल यह था कि रानी लक्ष्मीबाई ने ज़नाना लिबास उतार कर मर्दाना लिबास पहन लिया और घोड़े पर बैठकर दुश्मन की तरफ़ हमला करने भागीं और आज यह आलम है कि जो लड़ने निकला था भ्रष्टाचारियों से वह मर्दाना लिबास उतार ज़नाना लिबास में लड़ाई के मैदान से ही भाग निकला और फिर औरतों की ही तरह वह रोया भी।आज जिसके पास चार पैसे या चार आदमियों का जुगाड़ हो गया। वह एमपी और पीएम बनने के सपने देख रहा है। पहले तो केवल भ्रष्टाचारी और ग़ुंडे-बदमाश ही नेतागिरी कर रहे थे और फिर हिजड़े और तवायफ़ें भी नेता बन गए। उसके बाद अब समलैंगिक भी नेता बनकर खड़े हो रहे हैं कि देश को रास्ता हम दिखाएंगे।आप एक बार देश के सभी नेताओं पर नज़र डाल लीजिए। उनमें सही लोगों के साथ-साथ ये सभी तत्व आपको नज़र आ जाएंगे।जनता इन सबसे आजिज़ आ चुकी है। जिस पर भी वह विश्वास करती है, वही निकम्मा निकल जाता है। लोगों में निराशा घर कर रही है। जिसकी वजह से जगह-जगह आक्रोश में आकर लोग हत्या-आत्महत्या कर रहे हैं। हम सब एक भयानक भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में सांप्रदायिक राष्ट्रवाद कोढ़ में खाज की तरह समस्या को और ज़्यादा बढ़ा रहा है।ये हालात हैं जिन्हें हम एक दम तो नहीं बदल सकते लेकिन फिर भी लोगों के दिलों में आशा का दीपक ज़रूर जला सकते हैं। आप कुछ करें या न करें लेकिन लोगों की आशा और उनके सपनों को हरगिज़ मरने न दें। आदमी रोटी-पानी और हवा से नहीं जीता बल्कि वह एक आशा के सहारे जीता है। उसे यह आशा बनी रहती है कि एक समय आएगा, जब सब ठीक हो जाएगा।वह समय कब आएगा ?.....
यह देश धर्म-अध्यात्म प्रधान देश है तो यहां सबसे बढ़कर शांति होनी चाहिए।
अगर हम विभिन्न मत और संप्रदायों में भी बंट गए हैं और अपने अपने मत और संप्रदाय को सत्य और श्रेष्ठ मानते हैं तो हमें एक ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित रहते हुए शांति और परोपकार के प्रयासों में एक दूसरे से बढ़ निकलने के लिए भरपूर कम्प्टीशन करना चाहिए।

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

क्योंकि यह ब्लॉग बना रहा है दुनिया की पहली '‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘' आपके सहयोग से


दो चार और लेखकों को जिन्हें आप पहचानते हों, उनसे भी लिखने के लिए कहिये . तब हम तैयार करेंगे दुनिया की पहली ‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘। जो लोग इसे पढ़ें वे भी आमंत्रित हैं। इसे हम छापेंगे बिना किसी से कोई आर्थिक सहयोग लिए। इसमें योगदान करने वाले ब्लॉगर्स का नाम और उनका परिचय प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे ... Read more

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

सारा सच ब्लॉग मुझे पसंद है I Like It.

सारा सच ब्लॉग मुझे पसंद है केवल इसलिए कि यह जनहित में काम करता है और भ्रष्टाचार के खिलाफ है . ब्लौग जगत में इसके पदार्पण करते ही बड़े बड़ों के छक्के वास्तव में छूट गए हैं  . इसकी ताज़ा पोस्ट देखिये और सोचिये कि कैसे इस अभियान को मज़बूत बनायें ?

पर्ची पर बिना डॉक्टर के सिग्नेचर बाहर से कोई भी सामान न लाए ...ऐसा क्यों ..हर जगह भ्रष्टाचार है फैला ..??

जयादातर सभी सरकारी अस्पताल मे ओ टी मे आए मरीजो के लिए बाहर से सामान मंगवाने पर वहा पर लगे बोर्ड पर यही लिखा होता है, क्योकि ओ टी मे मरीजो के बहाने अस्पताल में काम करने वाले कुछ लोग अपने फायेदे के लिए बाहर से सामान मंग्वालेते है जिसकी ज्यादा जरूरत भी नहीं होती,वह लोग ऊपर की कमाई के लिए सामान मंगवाकर बाद मे उसे वापस कर देते है या बेच देते है,...ऐसा क्यों ..हर जगह भ्रष्टाचार है फैला ..?? ..