मंगलवार, 5 जुलाई 2011

आपका अकाउंट हो जाएगा बिल्कुल बुलेट प्रूफ़

शालिनी जी का ईमेल अकाउंट किसी ने हैक कर लिया और उसने उनके मित्रों को सन्देश भेजकर कहा किमैं यूक्रेन में हूँ और कुछ गुंडों ने मेरे रूपये और मेरा मोबाइल लूट लिया है. मुझे तुरंत Dollars भेज दीजिये. यह पत्र हमें अक्सर मिलते रहते हैं . हम समझ गए कि उनका अकाउंट किसी मुजरिम ने हैक कर लिया है. 
'हिंदी ब्लॉगर्स फोरम इंटरनेश्नल' पर आज एक ऐसा लेख पेश किया गया है जिसके नियमों को अपनाकर ब्लॉगर्स ऐसी घटना का शिकार होने से बच सकते हैं .
डा. अयाज़ अहमद साहब एक समाज सेवी के रूप में जाने जाते हैं। रोज़ाना 100 से भी अधिक पेशेंट देखना उनका रोज़ का काम है। इसी व्यस्तता के चलते वे ब्लॉगिंग में पहले जितने सक्रिय आजकल नहीं हैं लेकिन हमारी दरख्वास्त पर उन्होंने ‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘ के लिए एक लेख लिखा है और बताया है कि अपने ईमेल अकाउंट को बुरी नज़र से बचाने के लिए क्या क्या उपाय करने चाहिएं ? 
पेश है एक ऐसा लेख जिसके उसूलों को अपना कर आपका अकाउंट हो जाएगा बिल्कुल बुलेट प्रूफ़ !
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भाई एजाज़ उल हक़ द्वारा भेजा  गया नया टाइटिल 
 जीमेल पर या किसी भी साइट पर अपना अकाउंट इस्तेमाल करने के लिए एक पासवर्ड अनिवार्य होता है। पासवर्ड निश्चित करने में आम तौर पर लोग अपने नाम का कोई हिस्सा या जन्मदिन की डेट या अपना मोबाइल नंबर या अपने स्कूल आदि का नाम इस्तेमाल करते हैं। इंटरनेट हैकर यह बात जानते हैं और इसी तरह के अनुमान से वे लोगों का अकाउंट हैक करके लोगों को तरह तरह के नुक्सान पहुंचा देते हैं। कई बार तो ये हैकर अफ़वाह फैलाकर देश की सुरक्षा तक को ख़तरे में डाल देते हैं।
अधिक पढने के लिए








सोमवार, 4 जुलाई 2011

मैं लङाई और लङने में बेहद दिलचस्पी रखती हूँ - शिखा कौशिक

धन्य है ये डागी ! ( हो..हो..हो ) कमाल है भाई ! बिलकुल अपनी मालकिन पर गया है । मैंने परिचय शुरू भी नहीं किया । और ये मुझे ( हो..हो..हो करके )  डराने भी लगा ।
खैर..धन्य है ये डागी ! जिसने सदियों से खङी शिखा जी को बैठा दिया । अब जब शिखा जी बैठ ही गयी ।
  तो प्लीज सिट डाउन एवरीबडी । एन्ड लिसन । बाबाजी प्रवचन ।
कल ब्लाग जगत में घूमते घामते मेरी निगाह " मेरी कहानियाँ " नामक ब्लाग पर गयी । 
वह किन्ही शिखा कौशिक जी का ब्लाग था । मैंने ये नाम ( शिखा कौशिक ) पहली बार सुना ( पढा ) । मैंने सोचा । उसमें शिखा जी ने अपनी कहानियाँ लिखी होंगी । पर उन्होंने तो अपनी छोङकर । न जाने किस किसकी लिख रखी थीं । ठीक उसी तरह - यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ । मत पूछो कहाँ कहाँ ? है संतोषी माँ ।


मुझे तो ( एक भी ) कहानी अच्छी ( नहीं ) लगी । आप भी टाइम खोटी ( मत ) करना । ( लेकिन नहीं मानते । ) तो फ़िर ब्लाग पर जाने के लिये यहाँ क्लिक कीजिये ।
और ये है । शिखा ( जी ) कौशिक का परिचय -
मैं एक शोध छात्रा हूँ ।
- और मेरे शोध का मनपसन्द विषय है - लङाई । इसलिये मैं लङाई और लङने में बेहद दिलचस्पी रखती हूँ । फ़िर वह मुहल्ले वालों से लङाई हो । सास बहू की लङाई । ननद भावज की लङाई etc कुछ भी हो । बस लङाई होना चाहिये । लङाई इज अ मोस्ट इम्पोर्टेंट थिंग आफ़ ह्यूमन लाइफ़ ।
लङाई बेस पर ही तो रामायण गीता महाभारत आदि महाकाव्यों का सृजन हुआ । जिनसे आज इंसान शांति को प्राप्त होकर भक्ति कर रहा है । than i love लङाई । तो इसमें क्या गलत है ?
मेरे शोध का विषय '' हिंदी की महिला उपन्यासकारों के उपन्यासों में स्त्री विमर्श '' रहा है ।
- क्योंकि उनमें लङने के नये नये आयडियाज और पुरुषों की खटिया खङी बिस्तर गोल करने का बेहतरीन मसाला मिलता है ।
समस्त मानव जाति मेरा परिवार है ।
- यधपि आप मेरे आसपास के ( मुझसे ) परिचितों से पूछोगे । तो वे ( झूठे ) यही कहेंगे । नम्बर 1 लङाकू है जी । पर आप उनकी बातों में मत आना । ( मेरे मुहल्ले में ) रात को जब बच्चा रोता है । तो माँ कहती है । ( कहती क्या है । धमकी देती है ) सोता है चुपचाप । या फ़िर बुलाऊँ शिखा को ?


और बच्चा सो जाता है । अब ये सबूत क्या काफ़ी नहीं है । बच्चे भी मुझसे इतना प्रेम करते हैं कि - मेरा नाम लेते ही सो जाते हैं ।
और मैं अपने आसपास विचरण करने वाले जीवों को भी उतना ही स्नेह करती हूँ ।
- वैसे आप एक अजनबी के तौर पर मेरी कालोनी में आयेंगे । और मेरा पता भी किसी से पूछेंगे । तो वह बहुत सहानुभूति से यही कहेगा - थके हारे आये हो भाई ! चाय पानी यहीं पी लो । शिखा चाय पानी तो दूर । सिट डाउन होने को भी नहीं कहेंगी । ( क्योंकि वह खुद ही सिट डाउन नहीं होतीं )
जितना अपने परिवार से ।
- हालांकि मेरी बहन शालिनी ( जी ) कौशिक ने अपने ब्लाग प्रोफ़ायल में लिख रखा है - कि शिखा मुझसे भी बहुत लङती है । पर आप लोग शालिनी जी की भी बातों में न आना । बिकाज..आपको क्या मालूम नहीं । वकील लोग कितना झूठ बोलते हैं ?
ब्लॉग जगत में आप सभी के स्नेह की अपर आकांक्षा है ।
- क्योंकि भले ही मेरा स्वभाव लङाकू सही । पर आपका तो नहीं हैं ना ।
और ये हैं शिखा जी के ब्लाग - विचारों का चबूतरा मेरा आपका प्यारा ब्लॉग । नेता जी क्या कहते हैं विख्यात मेरी कहानियाँ earthly heaven

साला सब फ़िल्मी है ..

साला सब फ़िल्मी है -ये नाम है  अंकुर जी  के ब्लॉग का .आज मुझे केवल उनके ब्लॉग का  URL यहाँ देना है क्योंकि और सब तो उन्होंने अपने परिचय में इतने विस्तार से लिखा है कि कोई और क्या लिख सकेगा ? तो URL मैं लिख देती हूँ -''http://filmihai.blogspot.कॉम''. अंकुर जी अपने विषय में क्या खूब लिखते हैं -
'' 

मेरे बारे में

नाम तो आप जान ही चुके हैं। अब तक काम कुछ ऐसा नहीं किया जिसे बहुत गर्व से बता सकूँ। एक पारंपरिक धार्मिक परिवार मैं पला-बड़ा, इसलिए वही के संस्कार हैं। जयपुर के टोडरमल स्मारक से दर्शनशास्त्र और अंग्रेजी में स्नातक किया। वहां बिताये लम्हे जीवन के सबसे खुबसूरत और मूल्यवान पल रहे। उसके बाद कुछ अलग करने की चाह थी सो भोपाल का रुख किया जहाँ इलेक्ट्रोनिक मीडिया में मास्टर डिग्री हासिल की। कुछ समय मीडिया की भी खार छानी। पर वहां दिल न लगा सो एकेडमिक में जाने का मन बनाया फ़िलहाल (एम.फिल.)पूरी हो चुकी है...Ph.D. की तैयारी है। जिन्दगी के प्रति गंभीर हूँ पर अपने प्रति नहीं। फ़िल्मे पढने का और किताबें देखने का खासा शगल है...लिखने की कुलबुलाहट भी बनी रहती है इसलिए कविता, लेख, समीक्षाये, निबंध वगेरा लिखता रहता हूँ जो यदा-कदा कुछ छोटी-बड़ी पत्र-पत्रिकाओं में छप जाता है...जिससे अपनी लेखक आत्मा तृप्त हो जाती है...दिल, दुनिया और दस्तूरों से जो सीखता हूँ वही कागजों पे उड़ेलकर कुछ पन्ने ख़राब कर देता हूँ...ब्लॉग के आने से एक फायदा तो हुआ कि कम से कम कागजों पर क़यामत अब कम आती है... अपने में कई व्यक्तित्व समाये हुए है। जितने पारंपरिक है शायद उतने ही आधुनिक भी। area of interest बहुत बड़ा है अपना। खैर और तो जब आप मिलोगे तो निर्णय करना। शायद आप खुद अच्छे से जान पाओगे।''
इनके ब्लॉग पर प्रस्तुत अद्यतन पोस्ट ''प्रतिभा,सफलता और महत्वाकांक्षाओं  का संसार ''पठनीय है .अब  इससे ज्यादा क्या कहूँ ?ब्लॉग भ्रमण के दौरान आप स्वयं इस ब्लॉग को सराहेंगे ऐसा मेरा विश्वास है .
                                                     शिखा कौशिक 

रविवार, 3 जुलाई 2011

आओ हंस लें कुश्वंश जी के साथ

आओ हंस लें कुश्वंश  जी के साथ .आज ही इस ब्लॉग पर गयी .इस ब्लॉग का URL है-''http://hamareaaspaas.blogspot.कॉम''.वैसे इस पर प्रस्तुत पोस्ट -खोलो चोंच ''हमारी व्यवस्था को आईना दिखा रही है .

Friday

खोलो 



खोलो "चोंच"


सूबे में आ गए  चुनाव,
उलटे पुल्टे  होंगे  दाव,
गली, मुडेर घर चौबारे में,
कौवों  की बस  काव-काव,
कोयल छुपी शर्म से, डर में,
नंगे"चोंच".कुश्वंश जी अपने विषय में लिखते हैं -
My Photo
Kanpur, Uttar Pradesh, India
अपना नन्हा सा उपलब्धियो का आकाश और आकाश का आ
आप स्वयं भी इस ब्लॉग पर जाकर हमारी  इस खोज को परख सकते हैं.
                                                                                     शिखा कौशिक 

सामाजिक समस्याओं ने पत्रकारिता की ओर आकर्षित किया

आज ब्लाग वर्ल्ड . काम पर एक निगाह डालते हुये मेरी निगाह मेरी दुनियाँ मेरे सपने वेवसाइट पर गयी । जिस पर प्रकाशित पोस्ट का शीर्षक था - ये ब्लागिंग की ताकत है । ( पढने के लिये यहाँ कीजिये )
मुझे ये पोस्ट और पूरा प्रकरण ही उपयोगी लगा । लिहाजा सूचनार्थ मैंने इसको यहाँ भी पोस्ट किया ।
साथ ही मैंने युवा छात्र श्री गिरजेश जी के दोनों ब्लाग - चलते चलते अल्फ़ाज ए दिल भी देखे । जिसमें एक युवा सोच युवा नजरिया और विचार क्रांति की झलक सी महसूस हुयी ।
अतः मेरी तरह कुछ नयापन आप भी उन ब्लाग्स पर जाकर देख सकते हैं । और ये है । श्री गिरजेश कुमार जी का परिचय -


भागलपुर बिहार के रहने वाले और फ़िलहाल पटना में पत्रकारिता की पढाई कर रहे श्री गिरजेश कुमार जी एक सच्चे देशवासी की तरह समाज और सामाजिक समस्याओं के प्रति न सिर्फ़ पूरी तरह जागरूक हैं । बल्कि कलम और चलन दोनों के द्वारा ही उसको व्यवहार में भी लाते हैं । ये एक सच्चे और युवा पत्रकार की बेहतरीन शुरूआत कही जा सकती हैं । मेरा निजी दृष्टिकोण भी यही है कि हम कुछ और होने से पहले एक सच्चा इंसान होना अधिक जरूरी है । श्री गिरजेश अपने बारे में कहते हैं - मैं गिरिजेश कुमार । दुनिया में सिल्क सिटी के नाम से मशहूर 'भागलपुर' ( बिहार ) से सम्बन्ध रखता हूँ । समाज और सामाजिक समस्याओं के प्रति दिलचस्पी ने पत्रकारिता जगत की ओर आकर्षित किया । अभी मैं एडवांटेज मीडिया एकेडेमी, पटना से पत्रकारिता की पढाई कर रहा हूँ । मुझे लगता है सामाजिक कुरीतियाँ जब समाज को पीछे धकेलने की कोशिश करती है । तो इसके लिए आवाज़ उठाना ज़रुरी हो जाता है । इसी उद्देश्य से मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया है । आशा है । पाठकों का सहयोग मिलेगा । शुभकामनाओं सहित । इनके ब्लाग - चलते चलते अल्फ़ाज ए दिल

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

he is real veeru -ram ram bhai

He is real veeru -his blog's name is unique -''ram-ram bhai ''.it's URL is-''http://veerubhai1947.blogspot.com''he posted very precious post everytime .
he says-
My Photo

Born in Buladshehar, Western UP. Education upto Intermediate Science level at bulandshehar. Higher Education- Sagar University. served Haryana Education Services for 38 years. loves to sing and write and share everything at my end with everybody else''
so please visit his blog and enhance your knowledge .have a nice day .
                                              shikha kaushik  [please visit this new blog  http://hindifacebook.blogspot.com]

वो रहस्यमय औरत आखिर कौन हैं ?

यूँ तो जिन्दगी में मैंने गीत गजल कविता सीखने की बहुत कोशिश की । बट ..जैसे कहते हैं ना कि - हर कामयाब मर्द के पीछे एक औरत का हाथ होता है । इसलिये..मैं आज दिन तक उसी " एक औरत " को खोज रहा हूँ । जो मर्द को कामयाब बना देती है । पर अफ़सोस ! मेरे हाथ में ( ऐसी ) एक भी औरत नहीं आयी । मेरे हाथ में ..? इसलिये कहा । क्योंकि जैसे तैसे करके 1855 में ( जब मेरी नयी नयी शादी हुयी थी ) एक मिली भी थी । हफ़्ता भर बाद ही छोङकर भाग गयी । तबसे आज तक ( मजबूरी में ) साधु बाबा ही हूँ ।
खैर..इसके बाद बङे बच्चन ( अमिताभ ) जी की " शराबी " देखी । जिसमें बच्चन जी के शेर में वजन नहीं पैदा होता था । तब वे एक गाना के बदले ही नौ लखा ( मुझे नौ लखा मँगा दे रे । ओ सैंया दीवाने ) माँगने वाली जयाप्रदा का डांस प्लस सोंग देखने जाते हैं । और उनकी बात में वजन पैदा हो जाता है ।
और इसके साथ ही ये रहस्य भी खत्म हो गया कि - बात में वजन पैदा करने वाली वो लेडी स्पेशल कौन है ?
बस मैंने तुरन्त ही " दस लखा " लिया । और फ़र्स्ट फ़्लायट से मुम्बई.. जयाप्रदा जी के बंगले में ।
तब जयाप्रदा जी बोली - अफ़सोस राजीव जी ! आपने " दस लखा " लाने में बहुत देर कर दी । अब श्रीकांत नाहटा मुझे छोङने वाले नहीं हैं ।
और उस दिन के बाद आज ये " गाफ़िल " साहब मिले । जिनकी बात में कुछ वजन लगा । कुछ क्या बहुत कुछ 


लगा । जाहिर है । इन्हें उस औरत के बारे में पता ही होगा । इसलिये अब इनसे ही पूछने जा रहा हूँ कि - वो रहस्यमय औरत आखिर कौन हैं ?


सबूत के लिये देखिये । इनकी एक वजनदार गजल । और अधिक देखनी हैं । तो इनके ब्लाग -  ग़ाफ़िल की अमानत..पर जाने के लिये यहाँ क्लिक कीजिये ।


फ़ज़ाएं मस्त मदमाती । अदाएं शोख दीवानी ।
ये हूरों की सी महफ़िल है । नज़ारा है परिस्तानी ।
घनी काली घटाओं में । खिला ज्यूँ फूल बिजली का ।
घनेरे स्याह बालों में । चमकते रुख हैं नूरानी ।
कशिश कैसी के बेख़ुद सा । चला जाए वहीं पर दिल ।
जहाँ ललकारती सागर की । हर इक मौज़ तूफ़ानी ।
भला ये ज्वार कैसा है । नशा ए प्यार कैसा है ।
हुआ जो ज़ुल्फ़ ज़िन्दाँ में । क़तीले चश्म जिन्दानी ।
ऐ ग़ाफ़िल ख़ुद के जन्नत से । जहाँ को ख़ुद किया दोज़ख ।
हुआ तू जिसका दीवाना । वो तेरी कब थी दीवानी ।


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तब तक जो दो लाइनें मैंने लिखी हैं । उन्हें भी पढिये -
जिस पथ पे चला । उस पथ पे मुझे । तू साथ तो आने दे ।
साथी ना समझ । कोई बात नहीं । मुझे साथ निभाने तो दे ।
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और ये है - श्री चन्द्रभूषण मिश्रा " गाफ़िल " जी का परिचय -




मेरी पैदाइश बस्ती ज़िले के एक मध्यवर्गीय जमींदार परिवार में हुई । लेकिन मेरे पैदा होने तक जमींदारी 


मटियामेट हो चुकी थी । बस ऐंठन बाकी थी । मेरे वालिद ने उच्च शिक्षा हेतु मेरा दाख़िला इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कराया । पर पढ़ाई के दौरान ही उनका इंतकाल हो गया । जैसे तैसे शिक्षा पूरी की । इकलौती औलाद होने के नाते मुझे घर को संभालने  वापस आना पड़ा । 
पढ़ाई लिखाई का शौक़ था । और गाँवं के ही क़रीब ही महाविद्यालय के पुस्तकालय में नौकरी मिल गयी । तो यह शौक़ भी पूरा हुआ । मीर तथा ग़ालिब की ग़ज़लें पढ़ पढ़कर हुई तुकबन्दी की शुरुआत ने ग़ाफ़िल बना दिया । अब बतौर ग़ाफ़िल आपके सामने हूँ । 
आपसे मेरी यही इल्तिजा है कि - या पे तो बिन बुलाए चले आईए ज़नाब । ख़ुश होईए भी और ख़ुशी लुटाईए ज़नाब । अब आ ही गये मेरे अंजुमन में तो रुकिए । जाना है तो चुपके से चले जाईए ज़नाब । बन तो गया हूँ बुत मैं, भले संगेमरमरी । अब छोड़िए भी और ना बनाईए ज़नाब । 'ग़ाफ़िल' हूँ मेरी बात हँसी में उड़ाईए । ख़ुद पे यक़ीन हो तो मुस्कुराईए ज़नाब । इनका ब्लाग - ग़ाफ़िल की अमानत