धन्य है ये डागी ! ( हो..हो..हो ) कमाल है भाई ! बिलकुल अपनी मालकिन पर गया है । मैंने परिचय शुरू भी नहीं किया । और ये मुझे ( हो..हो..हो करके ) डराने भी लगा ।
खैर..धन्य है ये डागी ! जिसने सदियों से खङी शिखा जी को बैठा दिया । अब जब शिखा जी बैठ ही गयी ।
तो प्लीज सिट डाउन एवरीबडी । एन्ड लिसन । बाबाजी प्रवचन ।
कल ब्लाग जगत में घूमते घामते मेरी निगाह " मेरी कहानियाँ " नामक ब्लाग पर गयी ।
वह किन्ही शिखा कौशिक जी का ब्लाग था । मैंने ये नाम ( शिखा कौशिक ) पहली बार सुना ( पढा ) । मैंने सोचा । उसमें शिखा जी ने अपनी कहानियाँ लिखी होंगी । पर उन्होंने तो अपनी छोङकर । न जाने किस किसकी लिख रखी थीं । ठीक उसी तरह - यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ । मत पूछो कहाँ कहाँ ? है संतोषी माँ ।
मुझे तो ( एक भी ) कहानी अच्छी ( नहीं ) लगी । आप भी टाइम खोटी ( मत ) करना । ( लेकिन नहीं मानते । ) तो फ़िर ब्लाग पर जाने के लिये यहाँ क्लिक कीजिये ।
और ये है । शिखा ( जी ) कौशिक का परिचय -
मैं एक शोध छात्रा हूँ ।
- और मेरे शोध का मनपसन्द विषय है - लङाई । इसलिये मैं लङाई और लङने में बेहद दिलचस्पी रखती हूँ । फ़िर वह मुहल्ले वालों से लङाई हो । सास बहू की लङाई । ननद भावज की लङाई etc कुछ भी हो । बस लङाई होना चाहिये । लङाई इज अ मोस्ट इम्पोर्टेंट थिंग आफ़ ह्यूमन लाइफ़ ।
लङाई बेस पर ही तो रामायण गीता महाभारत आदि महाकाव्यों का सृजन हुआ । जिनसे आज इंसान शांति को प्राप्त होकर भक्ति कर रहा है । than i love लङाई । तो इसमें क्या गलत है ?
मेरे शोध का विषय '' हिंदी की महिला उपन्यासकारों के उपन्यासों में स्त्री विमर्श '' रहा है ।
- क्योंकि उनमें लङने के नये नये आयडियाज और पुरुषों की खटिया खङी बिस्तर गोल करने का बेहतरीन मसाला मिलता है ।
समस्त मानव जाति मेरा परिवार है ।
- यधपि आप मेरे आसपास के ( मुझसे ) परिचितों से पूछोगे । तो वे ( झूठे ) यही कहेंगे । नम्बर 1 लङाकू है जी । पर आप उनकी बातों में मत आना । ( मेरे मुहल्ले में ) रात को जब बच्चा रोता है । तो माँ कहती है । ( कहती क्या है । धमकी देती है ) सोता है चुपचाप । या फ़िर बुलाऊँ शिखा को ?
और बच्चा सो जाता है । अब ये सबूत क्या काफ़ी नहीं है । बच्चे भी मुझसे इतना प्रेम करते हैं कि - मेरा नाम लेते ही सो जाते हैं ।
और मैं अपने आसपास विचरण करने वाले जीवों को भी उतना ही स्नेह करती हूँ ।
- वैसे आप एक अजनबी के तौर पर मेरी कालोनी में आयेंगे । और मेरा पता भी किसी से पूछेंगे । तो वह बहुत सहानुभूति से यही कहेगा - थके हारे आये हो भाई ! चाय पानी यहीं पी लो । शिखा चाय पानी तो दूर । सिट डाउन होने को भी नहीं कहेंगी । ( क्योंकि वह खुद ही सिट डाउन नहीं होतीं )
जितना अपने परिवार से ।
- हालांकि मेरी बहन शालिनी ( जी ) कौशिक ने अपने ब्लाग प्रोफ़ायल में लिख रखा है - कि शिखा मुझसे भी बहुत लङती है । पर आप लोग शालिनी जी की भी बातों में न आना । बिकाज..आपको क्या मालूम नहीं । वकील लोग कितना झूठ बोलते हैं ?
ब्लॉग जगत में आप सभी के स्नेह की अपर आकांक्षा है ।
- क्योंकि भले ही मेरा स्वभाव लङाकू सही । पर आपका तो नहीं हैं ना ।
और ये हैं शिखा जी के ब्लाग - विचारों का चबूतरा । मेरा आपका प्यारा ब्लॉग । नेता जी क्या कहते हैं । विख्यात । मेरी कहानियाँ । earthly heaven
खैर..धन्य है ये डागी ! जिसने सदियों से खङी शिखा जी को बैठा दिया । अब जब शिखा जी बैठ ही गयी ।
तो प्लीज सिट डाउन एवरीबडी । एन्ड लिसन । बाबाजी प्रवचन ।
कल ब्लाग जगत में घूमते घामते मेरी निगाह " मेरी कहानियाँ " नामक ब्लाग पर गयी ।
वह किन्ही शिखा कौशिक जी का ब्लाग था । मैंने ये नाम ( शिखा कौशिक ) पहली बार सुना ( पढा ) । मैंने सोचा । उसमें शिखा जी ने अपनी कहानियाँ लिखी होंगी । पर उन्होंने तो अपनी छोङकर । न जाने किस किसकी लिख रखी थीं । ठीक उसी तरह - यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ । मत पूछो कहाँ कहाँ ? है संतोषी माँ ।
मुझे तो ( एक भी ) कहानी अच्छी ( नहीं ) लगी । आप भी टाइम खोटी ( मत ) करना । ( लेकिन नहीं मानते । ) तो फ़िर ब्लाग पर जाने के लिये यहाँ क्लिक कीजिये ।
और ये है । शिखा ( जी ) कौशिक का परिचय -
मैं एक शोध छात्रा हूँ ।
- और मेरे शोध का मनपसन्द विषय है - लङाई । इसलिये मैं लङाई और लङने में बेहद दिलचस्पी रखती हूँ । फ़िर वह मुहल्ले वालों से लङाई हो । सास बहू की लङाई । ननद भावज की लङाई etc कुछ भी हो । बस लङाई होना चाहिये । लङाई इज अ मोस्ट इम्पोर्टेंट थिंग आफ़ ह्यूमन लाइफ़ ।
लङाई बेस पर ही तो रामायण गीता महाभारत आदि महाकाव्यों का सृजन हुआ । जिनसे आज इंसान शांति को प्राप्त होकर भक्ति कर रहा है । than i love लङाई । तो इसमें क्या गलत है ?
मेरे शोध का विषय '' हिंदी की महिला उपन्यासकारों के उपन्यासों में स्त्री विमर्श '' रहा है ।
- क्योंकि उनमें लङने के नये नये आयडियाज और पुरुषों की खटिया खङी बिस्तर गोल करने का बेहतरीन मसाला मिलता है ।
समस्त मानव जाति मेरा परिवार है ।
- यधपि आप मेरे आसपास के ( मुझसे ) परिचितों से पूछोगे । तो वे ( झूठे ) यही कहेंगे । नम्बर 1 लङाकू है जी । पर आप उनकी बातों में मत आना । ( मेरे मुहल्ले में ) रात को जब बच्चा रोता है । तो माँ कहती है । ( कहती क्या है । धमकी देती है ) सोता है चुपचाप । या फ़िर बुलाऊँ शिखा को ?
और बच्चा सो जाता है । अब ये सबूत क्या काफ़ी नहीं है । बच्चे भी मुझसे इतना प्रेम करते हैं कि - मेरा नाम लेते ही सो जाते हैं ।
और मैं अपने आसपास विचरण करने वाले जीवों को भी उतना ही स्नेह करती हूँ ।
- वैसे आप एक अजनबी के तौर पर मेरी कालोनी में आयेंगे । और मेरा पता भी किसी से पूछेंगे । तो वह बहुत सहानुभूति से यही कहेगा - थके हारे आये हो भाई ! चाय पानी यहीं पी लो । शिखा चाय पानी तो दूर । सिट डाउन होने को भी नहीं कहेंगी । ( क्योंकि वह खुद ही सिट डाउन नहीं होतीं )
जितना अपने परिवार से ।
- हालांकि मेरी बहन शालिनी ( जी ) कौशिक ने अपने ब्लाग प्रोफ़ायल में लिख रखा है - कि शिखा मुझसे भी बहुत लङती है । पर आप लोग शालिनी जी की भी बातों में न आना । बिकाज..आपको क्या मालूम नहीं । वकील लोग कितना झूठ बोलते हैं ?
ब्लॉग जगत में आप सभी के स्नेह की अपर आकांक्षा है ।
- क्योंकि भले ही मेरा स्वभाव लङाकू सही । पर आपका तो नहीं हैं ना ।
और ये हैं शिखा जी के ब्लाग - विचारों का चबूतरा । मेरा आपका प्यारा ब्लॉग । नेता जी क्या कहते हैं । विख्यात । मेरी कहानियाँ । earthly heaven


