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मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

अंदाज ए मेरा: घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो, यूँ कर लें......

अंदाज ए मेरा: घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो, यूँ कर लें......: दस  साल का अनिकत पुलिस की वरदी में आज बरबस ही निदा फाजली साहब के गजल की चंद पंक्तियां जेहन में आ गईं। पंक्तियां थीं,  ‘’घर से मस्जिद है...

1 टिप्पणी:

S.N SHUKLA ने कहा…

सार्थक सृजन, आभार.


कृपया मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" की नयी पोस्ट पर भी पधारें