वैसे आम तौर पर मैं हँसी मजाक के बिना पोस्ट नहीं लिखता । पर कुछ ऐसे इंसान मिल जाते हैं । जिनकी भावनात्मक बातें और दिल से निकली सच्चाई अन्दर तक प्रभावित करती है । तब हँसी मजाक चाहकर भी नहीं हो पाता । आज अचानक ऐसे ही एक इंसान दीपक जी और उनके ब्लाग से परिचय हुआ ।
दीपक जी के प्रोफ़ायल में मुझे एक अलग ही वेदना और टीस महसूस हुयी ।
इसलिये मैं चाहता हूँ कि पहले आप उनके आत्मकथ्य को ही पढें -
मैं एक छोटे से गाँव में रहता हूँ । 2011 में मैंने 12 वीं क्लास पास किया है । मेरा काम हमेशा यही रहता है कि मैं बिना किसी के मदद के ज्यादा से ज्यादा काम को अंजाम दूँ । मेरी हमेशा यही इच्छा रही है कि मैं कुछ अलग करूँ । मैं अपने बारे में यही कहूँगा कि मैंने अपनी लाइफ में हर किस्म के लोगो की संगत की है । और हकीकत तो यह है कि कोई मुझे पसंद नहीं करता । इसका कारण यह है कि मैं जो करना या कहना होता है । वो मैं चोरी छुपे नहीं करता । यही बात पसंद नहीं है । लोगों को मैं जैसा हूँ । वैसा ही मैंने अपना विवरण यहाँ दिया है । लेकिन एक दिन ऐसा जरुर आएगा कि जो लोग मुछसे नफरत करते हैं । वही प्यार करेंगे । मेरे परिवार में 4 लोग हैं । मैं । भाई । डैड और दादी । मेरी माँ बचपन में ही चल बसी थी ।
- इनकी एक ही लाइन - मेरी माँ बचपन में ही चल बसी थी..किसी भी समझदार इंसान को दृवित कर सकती हैं । माँ के प्यार के बिना बच्चे का बचपन और आगे की जिन्दगी कितनी सूनी सूनी रहती है । इसे कोई भी संवेदनशील इंसान समझ सकता है ।
मुझे ऐसा लगता है कि दीपक जी को आपके प्यार और स्नेहिल भावनाओं की जरूरत है । बाकी समझदार को इशारा काफ़ी होता है । क्योंकि इनका प्रोफ़ायल थोङे शब्दों में ही बहुत कुछ कह रहा है ।
*** दीपक जी ! ने अपनी फ़ोटो नहीं लगायी । इसलिये परिचय बिना फ़ोटो के प्रकाशित है ।
साथ ही मेरा शिखा जी और शालिनी जी से निवेदन है कि मैं बहुत शर्मीला स्वभाव का हूँ । अतः यहाँ लगायी परिचय पोस्ट की सूचना संबन्धित व्यक्ति को नहीं करता । अतः आप लोग मेरा इतना तो काम कर ही दिया करें । धन्यवाद ! आप सभी का आभार ।
इनके ब्लाग - दिल की जुवान । ब्लाग जमावङा । हिन्दी ब्लाग की नयी पुरानी खबरें
दीपक जी के प्रोफ़ायल में मुझे एक अलग ही वेदना और टीस महसूस हुयी ।
इसलिये मैं चाहता हूँ कि पहले आप उनके आत्मकथ्य को ही पढें -
मैं एक छोटे से गाँव में रहता हूँ । 2011 में मैंने 12 वीं क्लास पास किया है । मेरा काम हमेशा यही रहता है कि मैं बिना किसी के मदद के ज्यादा से ज्यादा काम को अंजाम दूँ । मेरी हमेशा यही इच्छा रही है कि मैं कुछ अलग करूँ । मैं अपने बारे में यही कहूँगा कि मैंने अपनी लाइफ में हर किस्म के लोगो की संगत की है । और हकीकत तो यह है कि कोई मुझे पसंद नहीं करता । इसका कारण यह है कि मैं जो करना या कहना होता है । वो मैं चोरी छुपे नहीं करता । यही बात पसंद नहीं है । लोगों को मैं जैसा हूँ । वैसा ही मैंने अपना विवरण यहाँ दिया है । लेकिन एक दिन ऐसा जरुर आएगा कि जो लोग मुछसे नफरत करते हैं । वही प्यार करेंगे । मेरे परिवार में 4 लोग हैं । मैं । भाई । डैड और दादी । मेरी माँ बचपन में ही चल बसी थी ।
- इनकी एक ही लाइन - मेरी माँ बचपन में ही चल बसी थी..किसी भी समझदार इंसान को दृवित कर सकती हैं । माँ के प्यार के बिना बच्चे का बचपन और आगे की जिन्दगी कितनी सूनी सूनी रहती है । इसे कोई भी संवेदनशील इंसान समझ सकता है ।
मुझे ऐसा लगता है कि दीपक जी को आपके प्यार और स्नेहिल भावनाओं की जरूरत है । बाकी समझदार को इशारा काफ़ी होता है । क्योंकि इनका प्रोफ़ायल थोङे शब्दों में ही बहुत कुछ कह रहा है ।
*** दीपक जी ! ने अपनी फ़ोटो नहीं लगायी । इसलिये परिचय बिना फ़ोटो के प्रकाशित है ।
साथ ही मेरा शिखा जी और शालिनी जी से निवेदन है कि मैं बहुत शर्मीला स्वभाव का हूँ । अतः यहाँ लगायी परिचय पोस्ट की सूचना संबन्धित व्यक्ति को नहीं करता । अतः आप लोग मेरा इतना तो काम कर ही दिया करें । धन्यवाद ! आप सभी का आभार ।
इनके ब्लाग - दिल की जुवान । ब्लाग जमावङा । हिन्दी ब्लाग की नयी पुरानी खबरें

