बुधवार, 18 अप्रैल 2012

''मधुमोती ''-A NEW BLOG

''मधुमोती '' -यह ब्लॉग है संजय जी का .बहुत अच्छी व् सामयिक रचनाएँ प्रस्तुत  करते हैं संजय जी .आप भी इनके  ब्लॉग पर जाये और इनकी रचनाओं का आनंद  लें  .

मेरा फोटो




Madhumoti is a platform where I wish to share my writtings in Hindi,English and Urdu with everybody who is a follower of the path of Thruth,Philosophy and Literature.I would not only like to convey my messages of real enjoyment of life to the world,I would like to interact with the persons like me through this blog as well.Madhumoti is an epic written by me in simple Hindi language focusing on the great philosophy of glorious birth,charming life,splendid death and mysterious rebirth.

                                                                आपका दिवस  शुभ व् मंगलमय हो !
                                               शिखा कौशिक 

गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

अंदाज ए मेरा: ये हैं 'राष्‍ट्रपिता' .........

अंदाज ए मेरा: ये हैं 'राष्‍ट्रपिता' .........: उत्‍तर प्रदेश की दस साल की ऐश्‍वर्या पराशर ने भारत सरकार के लिए मुश्किल खडा कर दिया है। ऐश्‍वर्या ने पिछले 13 फरवरी को प्रधानमंत्री कार्य...

हॉकी -हमारा राष्ट्रीय खेल -आप भी जुड़े



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मिशन लन्दन ओलंपिक हॉकी गोल्ड

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                                                                            SHIKHA KAUSHIK 

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

अंदाज ए मेरा: घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो, यूँ कर लें......

अंदाज ए मेरा: घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो, यूँ कर लें......: दस  साल का अनिकत पुलिस की वरदी में आज बरबस ही निदा फाजली साहब के गजल की चंद पंक्तियां जेहन में आ गईं। पंक्तियां थीं,  ‘’घर से मस्जिद है...

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

ज़रूरत- a new blog

ये  हैं      जी    -My Photo
इनके   ब्लॉग  का  नाम  है  -

ज़रूरत

ब्लॉग पर  प्रस्तुत ताजा पोस्ट है -

किनारा


सूर्य की प्रचण्डता से
समुद्र का जल होता है वाष्पित 
बनते हैं मेघ
जो आते हैं अक्सर समय पर
और कभी-कभी आगंतुकों से
बनाते हैं सेतु जल कणों के लिए
वहीं आने के लिए 
जहां से वे उठे थे


मेरी राय में -  सभी पोस्ट उत्तम   यहाँ    
                     आप   देखकर   आयें   
                  कैसा   रहा   अनुभव  वहां   
                     हमको   भी    बतलाएं   !


                                        शिखा कौशिक 

गुरुवार, 29 मार्च 2012

BRIJENDRA SINGH'S BLOGS

  BLOG'S NAME -मृगतृष्णा



BLOG'S OWNER NAME- Brijendra Singh... (बिरजू, برجو)


मेरा फोटो
                         
लिंगपुरुष
स्थानAgra / Mumbai., UP / Maharashtra., भारत
रुचिMusic, Theater, writing, cricket....etc
पसंदीदा मूवी्सInvictus, Remember the Titans, All Movies of Hrishikesh Mukharjii, Catch me if u can,Cast Away, Into the Wild, Forest Gump, Oldboy, Andaz Apna Apna..and many more.
पसंदीदा संगीतIndian folk
पसंदीदा पुस्तकेंIt changes rapidly. Till now.. "TRAIN TO PAKISTAN" by Khushwant Singh.

                         RECENT POST -  मृगतृष्णा

रूहें कुछ सपनों की

खुरच के देखो
गुज़रे वक़्त को,
कुछ लाशें मिलेंगी सपनों की,
रूहें इनकी-
कुछ सवाल करती हैं,
जिनका कोई जवाब नहीं
बस
एक मायूस दिल है..
ये रूहें मरे सपनों की
सताती रहेंगी,
जब तलक
मेरी रूह भी
इनमें मिल नहीं जाती..


RECENT POST- A Poet's Fantasy-


Again, it is the day, 
the time
it is the moment,
Again, feeling your fragrance
and your influence,
in the room..
like always
have saved some tears
from all the sorrows 
and all the happiness of the year..
have to clean the dust
on the portrait of your memories,
in this moment,
again...



MY VIEW- EVERY POST ON HIS BLOG TOO GOOD .YOU SHOULD VISIT HIS BLOGS .
                                                         HAVE A NICE DAY
                                                              SHIKHA KAUSHIK







        

मंगलवार, 27 मार्च 2012

मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!



      मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!

      कहते हैं एक राजा हुआ,और एक बार उसके दरबार में तीन ऐसे चोर एक साथ लाये गए,जिन्होंने एक ही तरह की चोरी की थी,मगर राजा ने तीनो को ऊपर से नीचे देखते हुए तीन प्रकार के दंड दिए तब उसके एक मंत्री ने इसका कारण पूछा तो राजा के कहे-अनुसार उन तीनों सजा पाए हुए चोरों का पीछा किया गया और तब यह पाया गया कि जिसे सबसे कम सजा मिली थी उसने रात ही आत्महत्या कर ली,दूसरा,जिसे थोड़ी ज्यादा सजा मिली,उसने खुद को एकांत में कैद कर लिया था मगर सबसे ज्यादा सजा जिसे मिली थी वह अब भी लोगों के बीच बोल-हंस-बतिया रहा था !!इस प्रकरण से लोगों को अपने प्रश्नों का उत्तर और राजा के न्याय की तर्कसंगतता का प्रमाण भी मिल गया !!
       मगर उपरोक्त उदाहरण के परिप्रेक्ष्य में आज के दौर को परखें तो हम पाते हैं कि हर कोई वह तीसरा चोर बनने को ही आतुर-आकुल-व्याकुल है और उसे इस बात की तनिक भी परवाह नहीं कि समाज तो समाज,कोई भी बन्दा उसके बारे में क्या सोचता-समझता और कहता है !!अपनी अंतहीन वासना में रत हर कोई गोया एक-दुसरे पर चिल्ला रहा है मगर उसे अपना गिरेबान नज़र नहीं आ रहा है ,इधर सारे पत्र-पत्रिकाएं अपने सम्पादकीय और अन्य स्तंभ काले-पर-काले किये जा रहे हैं,बरसों-बरस से तरह-तरह के हज़ारों-हज़ार घोटालों-गबन और तमाम तरह की मक्कारियों-बेईमानियों पर चौक-चौराहों-गली-नुक्कड़-कैंटीन-दफ्तर-घर-बाहर-फुटपाथ-सेमीनार-गोष्ठियों से लेकर संसद-विधानसभा तक में चर्चा पर चर्चा और निंदा पर निंदा हुई जा रही है मगर परिणाम...??टायं-टायं-फीस !!
        ये तीसरी तरह का चोर आज हर कहीं काबिज है और कोई कितना भी हल्ला करे या शोर मचाये या अनशन करे या आंदोलन मगर कहीं कुछ होने की संभावना ही नहीं...क्यूंकि चोर ही जब शोर मचाने लगते हैं तब सच-और झूठ फ्रेम से गायब हो जाते हैं और सब एक-दुसरे को पकड़ने-कूतने-धकियाने-लतियाने की कवायद और नौटंकी करने लगते हैं और इस नौटंकी का कभी कोई परिणाम नहीं निकलने को जब जब लीडर का चरित्र राष्ट्रीय तो क्या बचा...निजी चरित्र भी खत्म हो चुका है !!