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मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

काव्यान्जलि ...A NEW BLOG


आज मैं प्रस्तुत कर रही एक नए ब्लॉग का परिचय .आप भी इस ब्लॉग पर चक्कर लगा आये .ये  हैं  धीरेन्द्र जी .इनके ब्लॉग का नाम है  -काव्यान्जलि ...

मेरा फोटो


इनका परिचय  इस  प्रकार  है  - 



लिंगपुरुष
व्यवसायकृषि
स्थानवेंकटनगर. अनुपपुर,, मध्यप्रदेश, पिन-484113, भारत
परिचयबर्तमान में (म.प्र.) के जिला-अनुपपुर में किसान कांग्रेस
 कमेटी का जिलाअध्यक्ष, हूँ शेष कुछ खास नहीं... मोबाइल-9752685538
रुचिराजनीतक गतिवधियों में भाग लेना, कविताये लिखना



शुभकामनाओं के साथ 
शिखा कौशिक 

                          












सोमवार, 27 फ़रवरी 2012


मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!

आज विज्ञान दिवस है और इस देश में आज विज्ञान की हालत बदतर से बदतरीन की हालत में जा चुकी है,इसका कारण महज इतना है कि विज्ञान नाम की चीज़ को यहाँ की भाषाओं में पेश ही नहीं किया गया कभी,एक अर्धसाक्षर देश के कम-पढ़े-लिखे लोगों को उचित प्रकार से शिक्षा से ही नहीं जोड़ा जा सका आज तक,तब वैज्ञानिक सोच की बात करना तो और भी दूर की कौड़ी है !
          पराई भाषा से भारत का वंचित तबका ना तो अब तक जुड़ पाया है और ना ही कभी जुड़ भी पायेगा क्योंकि जिस भाषा में उसका ह्रदय धडकता है वह भाषा महज उसके आपस की दैनिक बातचीत को आदान-प्रदान करने का माध्यम भर है मगर दुर्भाग्य यह है कि उस भाषा में उसकी शिक्षा का अवसर नहीं,तो क्या आश्चर्य कि भारत,जो कभी विश्व को नौ प्रतिशत वैज्ञानिक योगदान दिया करता था,आज महज ढाई प्रतिशत के आंकड़े पर जा गिरा है और यहाँ तक कि वैज्ञानिकता के नाम पर भारत के वैज्ञानिक महज कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों की चाकरी कर संतुष्ट है,इस सन्दर्भ में कटु सत्य तो यह है कि भारत के पास अपने होनहार वैज्ञानिकों के लिए काम ही नहीं है !
           अंग्रेजी के शिक्षा-जगत में पूर्ण वर्चस्व के कारण भारत का बहुसंख्य तबका शिक्षा की अच्छाईयों से पूर्ण-रूपेन कट गया यहाँ तक कि इस बहुसंख्या को शिक्षा तक पराई प्रतीत होती है,ऐसे विज्ञान को कौन पूछे जब शिक्षा ही पराई हो,वैज्ञानिकता का भाव तो शिक्षा के बाद ही पैदा होता है !
           मगर उसके बाद भी कुछ ऐसे अवसर थे जहां भारत के लोग अगुआ बन सकते थे,वो क्षेत्र थे देशी तकनीक और वैज्ञानिकता के क्षेत्र,मगर अपने देशी ज्ञान को दीन-हीन मानकर हमने उसका भी सत्यानाश कर डाला और आज हालत यह है कि हम ना यहाँ के हैं और ना वहाँ के,देशी ज्ञान को भी हम खो चुके हैं और विदेशी ज्ञान जो एक कठिन और पराई भाषा में है,उसका लाभ यहाँ के लोग ले नहीं पा रहे क्योंकि वो उसे समझते ही नहीं !
             मगर हद तो इस बात है कि हम जो हिंदी-हिंदी-हिंदी कहते-करते नहीं अघाते,उस हिंदी को हमने महज भावुकता की-कविता की-साहित्य की भाषा भर बना डाला और तरह-तरह के पखवाड़े आयोजित कर उसका सम्मान करते रह गए तथा भांति-भांति की गोष्ठियां कर आपस में ही तालियाँ पिटवाते रह गए...हिंदी को हमने साहित्य के अलावा ज्ञान-विज्ञान के लिए निकृष्ट भाषा बना डाला और अब जब हम विश्व में अनेकानेक क्षेत्रों में विश्व के छोटे-छोटे देशों से पिछड़ चुके हैं तब भी हमें होश आ गया हो,यह संभावना मुझे अब भी दिखाई नहीं देती और तब ऐसे में विज्ञान तो विज्ञान,देश के करोड़ों होनहारों को वास्तविक शिक्षा दे पाने की सोच पाना भी एक सपना ही है....!!(राजीव थेपड़ा)

NEW BLOG-अपना पंचू

  मेरा फोटो


Blog's name-  अपना पंचू


BLOG'S OWNER -lokendra singh rajput


LATEST POST-

बौखलाहट या दंभ?


                                        PLEASE VISIT AND READ HIS VIEWS ON VARIOUS RELEVANT ISSUES .
                                                                  WITH BEST WISHES 
                                                               SHIKHA KAUSHIK 

कई अच्छे ब्लोग्स के लिंक्स




आज मैं लायी हूँ कई अच्छे  ब्लोग्स के लिंक्स  .आप  स्वयं परखे व्  इन ब्लोग्स का चक्कर लगा आयें -


*  सेहत संसार- HEALTH WORLD      


*    कलम घिस्सी    






roseepiphyllum


                                
                                   shikha  kaushik  




  

        


रविवार, 26 फ़रवरी 2012

DHEERAJ4GHAZAL-चौगान-NEW BLOG

HIS NAME-DHEERAJ4GHAZAL



HIS BLOG'S NAME -चौगान

मेरा फोटो

HE SAID-
"IF SOMEONE DIES YOUNG PEPOLE SAY THAT GOD LOVES HIM. BT U R STILL ON THE EARTH IT MEANS SOMEONE IS ON THE EARTH WHO LOVES U MORE THAN GOD." "CHAIN SE SO RAHA THA ODHE KAFAN MAZAR ME, YAHAN BHI SATANE AA GAYE PATA KISNE BATA DIYA------------- Love is possible after friendship but friendship is not possible after love because medicines work before death later nothing can be cured….!!!

HIS LATEST POST-

The Unsaid Word

Far away in the valley,
You keep beckoning me;
Asking to come,
Whenever we talked.

PLEASE READ HIS POST AND VISIT HIS BLOG .
SHIKHA KAUSHIK

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें !


महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें 




Shiva Wallpaper

मेरे मन बनकर तू डमरू 
करता जा डम-डम-डम 
तेरी डम -डम में गूंजेंगी 
मेरे भोले की बम-बम 
मेरे मन बनकर तू ......


मेरा भोला सब भक्तों  के 
है सारे  कष्ट  मिटाता  
वो भक्तों की रक्षा  हित  
है कालकूट  पी  जाता 
मेरी  जिह्वा  करती चल  तू 
शिव महिमा   का ही वर्णन  
मेरे मन ..........................


मेरा भोला कितना  भोला 
नागों  का हार  पहनता   
वो  जटाजूट  में अपने 
गंगा  को  धारण  करता
मैं कण -कण  में करती हूँ 
शिव-शंकर का ही दर्शन .
मेरे बन ................


सावन में कांवड़ लेकर  जो    
गंगाजल लेने जाते 
लाकर शिवलिंग  पर उसको      
श्रृद्धा  सहित चढाते 
हर इच्छा पूरी होती 
पावन हो जाता जीवन .
मेरे मन बनकर.....


द्वादश ज्योतिर्लिंगों  में शिव
-शक्ति ज्योत समाई ;
इनके दर्शन से भक्तों ने 
भय से मुक्ति पाई ;
गौरी-शंकर के चरणों में 
तन -मन-धन सब अर्पण 
मेरे मन बनकर .....


                                  शिखा कौशिक 
                        [विख्यात ]












गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

अब तो कुछ बोल ओ स्त्री......!!





उसके लिए......
जो बरसों से कुछ बोली नहीं है......
जो बस अपने पति....
अपने बच्चों के लिए जीती है....
जो उससे ज्यादा कभी सोचती भी नहीं....
उसकी चिंता के दायरे में बस उसका परिवार है....
और बाकी सब कुछ बिखरा जा रहा है....
उसकी गैरमौजूदगी में.....
अगर वो बोले....
अगर वो सामने आये....
तो बदल सकता है बहुत कुछ.....
क्यूंकि वो सिर्फ आधी आबादी नहीं है..!!
वो आने वाली नयी आबादी का स्त्रोत है....
वो आदि है.....वो अंत है......
फिर भी उसके भरम का कोई नहीं अंत है.....!!
अगर वो अपने इस भरम से बाहर निकल सके....
अगर वो अपने आँचल को क्षतिज तक फैला दे
तो ढंक जाए आकाश...ढँक जाए अनंत.....
और वो सब घट जाए,जो नहीं घटा है अब तक....
आदमी की फितरत बदल जाए....
धरती की सूरत बदल जाए....!!

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

स्त्रियाँ ही तय करती हैं बहुत कुछ......!!


दरअसल स्त्रियाँ ही तय करती हैं बहुत कुछ,
मगर वो सोचती ही नहीं कि उन्हें तय करना चाहिए कुछ....
अगर स्त्री सचमुच अगर तय कर ले कि ये दुनिया बदलनी है,
तो सचमुच बदला जा सकता है...सबका-सब...सब कुछ
मगर स्त्री बरसों से इस धोखे में है,
कि वो कमजोर है बहुत
और कुछ भी बदल नहीं सकती वो
स्त्री अपनी ताकत का अंदाजा
देवियों के अनेक रूपों को देखकर भी,
जिनकी पूजा किया करती हैं वो रोज ब रोज,
कभी कर नहीं पाती खुद की गरिमा का अहसास...
और रोज-ब-रोज सजती-संवरती है पुरुष के लिए
और इस तरह बजाय अपनी ताकत के
वो देती हैं अपनी मादकता का अहसास...
अगर संसार की सारी स्त्रियाँ या कुछ ही स्त्रियाँ
सिर्फ एक क्षण को भी यह सोच लें
कि वो रसीली-छबीली या सेक्सी ना होकर
एक अहसास भी हैं मानवता के बदलाव का
कोमलता के साथ-साथ संवेदना की गहराई का...
तो दुनिया बदल सकती है एकदम से
पता है कितने समय में...??
बस एक पल में.....!!

शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

अंदाज ए मेरा: शर्मनाक.....शर्मनाक.... शर्मनाक

अंदाज ए मेरा: शर्मनाक.....शर्मनाक.... शर्मनाक: कैप्‍टन बाना सिंह‍ जी गर्व की बात है... हम उस देश में पैदा हुए , जिस देश की मिट्टी को माथे पर लगाया जाता है। गर्व की बात है..... हम उ...

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

इस गुजरते हुए वक्त को देख......!!


इस गुजरते हुए वक्त को देख 
और अपने कीमती जीवन को जाया होते हुए देख !
कोई निम्नतम-सी कसौटी को ही तू चुन,
और इस कसौटी पर खुद को ईमानदारी से परख !
जिस तरह यह वक्त गुजर जाएगा 
उसी तरह पागल तू भी वापस नहीं आएगा....!!
पगले,अपनी असीम ताकत को पहचान 
इस तरह बेचारगी को अपने भीतर मत पैदा कर 
हालात किसी भी काल बहुत अनुकूल नहीं हुए कभी 
कभी किसी के लिए भी नहीं..
सभी अपनी-अपनी लड़ाईयां इसी तरह लड़ा करते रहे हैं ओ पगले
फर्क बस इतना कि कोई अपने लिए,कोई सबके लिए !
तूने अपने जीवन को यह कैसा बना रखा है ओ मूर्ख...?
जीता तो है तू खुद के लिए,और बातें करता है बड़ी-बड़ी !
इस तरह की निंदा-आलोचना से क्या होगा....
सबसे पहले तुझे खुद को ही बदलना होगा
सबको उपदेश देने से पहले तू खुद के बारे में सोच...
सड़क पार आकर आम जनता के लिए जी....
तब यह धरती तेरी यह आकाश तेरा ही होगा...
अगर इस राह में मर भी गया तू
तो बच्चे-बच्चे की जुबान पर नाम तेरा ही होगा...!
मादरे-वतन की मिटटी से कभी गद्दारी मत कर-मत कर-मत कर
ज़िंदा अगर है तो आदमियत की मुखालिफत मत कर
सिर्फ कमा-खाकर अपने और अपने बच्चों के लिए जीना है फिर
अपनी खोल-भर में सिमटा रह ना,बड़ी-बड़ी बातें मत कर
तेरे वतन को तुझसे कभी कोई उम्मीद रत्ती भर भी नहीं रे मूर्ख !
तू अभी की अभी मर जा,नमक-हलाली की बातें मत कर...!!
(कोई इन शब्दों को खुद पर ना ले,इन शब्दों में जो गुजारिश है,वो सिर्फ खुद के लिए है,इतना पढ़-भर लेने के लिए धन्यवाद !!)

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

राजघाट तो चले जाना,बिड़ला हाऊस मत जाना मेरे बेटे....!!

दिल्ली आये हो मेरे बेटे ?
तो मेरी समाधि तो देखने का मन तो होगा ही !
रिंग रोड पर एक शांत और सुरम्य जगह बनायी गयी है मेरी समाधि के लिए 
बहुत विशाल और बहुत हरितिमा वाली जगह है वो मेरे बेटे !
और हजारों लोग आया करते हैं वहाँ मेरी समाधि पर मत्था टेकने 
उस जगह का उससे पहले का कोई इतिहास नहीं है मेरे बेटे 
सिवाय इसके कि वो यमुना के किनारे फैली एक खाली भूमि थी
मैंने सोचा भी ना कभी कि इस जगह पर कभी मैं लिटाया जाउंगा..!
और अब जब रोज आते हुए हजारों लोगों को यहाँ देखता हूँ तो पाता हूँ कि
कोई सवाल ही नहीं उठता किसी के मन में कि मैं क्यूँ मारा गया
मुहसे जुडी किसी जगह पर मुझे लिटाया जाता तो शायद यह सवाल उठता भी !
मगर राजघाट ने मेरी ह्त्या को गौण कर मुझे शहीद मात्र बना दिया है !
और मेरे मरने के कारणों पर गोबर लेप दिया है मेरे बेटे !
जो,अगर तुम बिड़ला हाऊस गए,तो वो प्रश्न उठ सकते हैं तुम्हारे मन में !
मैं क्यूँ मारा गया,किस तरह मारा गया ??
समय के साथ ये सवाल अँधेरे में गुम हो गए हैं कहीं
उत्तर की अभिलाषा तो व्यर्थ ही है !
मगर मेरे बेटे बिड़ला हाऊस में मेरे निशाँ देखकर
तुम खुद को रोक नहीं पाओगे,और
हर किसी को निरुत्तर पाकर खुद भी व्यथित हो जाओगे !!
मगर अब यह जो वक्त चल रहा है मेरे बेटे,यह उतना ही फिजूल है,
जितनी फिजूल हो बन गयी है मेरी मौत मेरे वतन की आजादी के बाद !
अब यहाँ ,मेरा हत्यारा बताता है कि उसने मुझे क्यूँ मारा
और उसके तो प्रशंसा के कसीदे भी पढ़े जाने लगे हैं अब !
हर कोई उसके तर्कों से अभिभूत होने लगा है अब
कि मैंने अपने जीवन के अंत में कुछ खास लोगों के सोचे गए
विचारों के अनुसार ना चल कर बड़ी भयंकर गलती की !!
तीस सालों तक छोटे-छोटे पग चल कर जिस देश की आत्मा को मैंने जगाया
अपने नाजुक हथियारों के बल पर लोगों अपने बल पर खड़ा होना सिखाया !
अगर उस देश के कल के पैदा होने वाले ये कम-अक्ल बच्चे
मुझसे मेरे कामों का हिसाब मांगे कि मैंने ऐसा क्यूँ किया-वैसा क्यूँ किया !
तो मैं किस-किसको क्या जवाब दूं मेरे बच्चे
हर आदमी अपना इतिहास खुद लिखा करता है मेरे बच्चे
और हर आदमी से गलतियां भी बेशक हुआ ही करती हैं
मुझसे सदा यह गलतियां होती रहीं शायद कि
कि मैं सदा वतन को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश करता रहा !
जो एक-दुसरे के खून के प्यासी दो कौमों को कभी पसंद नहीं थी
मैं सदा अपने प्यारे वतन के हित के बारे में सोचता रहा
और सदा अपनी-अपनी कौम के हित के बारे में सोचते रहे और तो और
उनके नुमाइंदे अपनी-अपनी गद्दी के हित की बाबत सोचते रहे
अगर मेरा सोचना इतना गलत भी था गलती से भी अगर
तो बातचीत करते ना मुझसे....
अगर इतना ही हुनर था मेरे हत्यारे में तो वो खुद ही देश आजाद करा लेता...!!
मगर मेरी ह्त्या का का अर्थ तो यही हुआ ना
कि मुझसे बातचीत के उनके सारे तर्क भोथरे ही हुए होंगे !
मुझे मारा गया किसी और ही कारणवश मेरे बच्चे
और बिड़ला हाऊस में यही सवाल फिर से उठा सकती है
मुझपर चली हुई उस हत्यारे की आखिरी गोली
इसलिए मेरी तुमसे विनम्र राय है मेरे बेटे
कि राजघाट तो चले जाना मगर बिड़ला हाऊस मत जाना मेरे बेटे....!!

आ...अब हम सब मिलकर अपने वतन की किस्मत को बदल दें...!!


अरे ओ लालची पागल इंसान !
देख उधर उत्तर-पूर्व में तेरा पडोसी हो रहा है महान
जिससे अपनी भूमि वापस लेने की खायी थी कसमें
अब उससे आँख मिलाना भी नहीं है तेरे बस में !
सिर्फ अपना घर और तिजोरी भरने में मशरूफ तू
क्या तुझमें गैरत नाम की कोई चीज़ बची भी है,
कि देश के एक अदने से आम इंसान से तू आँख मिला भी सके ??
अबे कितना खायेगा बे तू कितना खायेगा बे ?
अबे मर जाएगा...अबे मर जाएगा !!
अबे कभी इस तरह तो सोच कर देखा कर कि
जब खुद की निजी ताकत और शानो-शौकत से
मिलती है तुझको इतनी ज्यादा खुशी
तब समूचे देश की तरक्की और महानता से
हरेक देशवासी को मिलेगी कितनी अपार खुशी !!
अगर तू जरा सा भी अपने लालच को विराम दे सके अगर
तेरे वतन को बहुत राहत मिल जायेगी अरे ओ कमीने रहबर !!
इन्हें गाली नहीं,अपने आने वाले कल का आगाज समझ
कि मुझे मार भी देगा तू, तो ये गालियाँ गली-गली उठने वाली हैं
तू ये समझ ले कि अब बस तेरी शामत आने ही वाली है !!
अरे अंधे ,आँख खोल और देख कि
चारों तरफ चीन-चीन-चीन की आवाजें आ रही हैं !
और यहाँ भारत में तेरे कारनामों से
देश की इज्ज़त की अर्थी उठी जा रही है...!!
तुझे देश की अर्थी निकालने के लिए ही पैदा किया था
तेरे माँ-बाप ने...??
भारतमाता की आबरू लूटने के लिए ही आज़ाद करवाया था
इस वतन को तेरे बाप के बाप के बाप ने....??
तेरे बाप के बाप को मरे तो अभी ज्यादा वक्त भी नहीं बीता
अरे मेरे भाई ये तूने क्या कर दित्ता....क्या कर दित्ता....!!??
शाम को जो लौट कर घर वापस आ जाए, उसे भूला नहीं कहते है !
वक्त पर जो संभल जाए ,उसे बड़े माफ कर देते हैं !!
तू सच जान मेरे अनाम-अनजान भाई
तेरी-मेरी भारतमाता का दिल बहुत बड़ा है !
और तेरे सामने भी अभी रास्ता बहुत लंबा पड़ा है !!
अब भी जाग जाए अगर तू अगर ओ भले इंसान
भारत के भाग ही जाग जायेंगे, बन जाएगा फिर ये महान !!
बहुत दिनों तक अपने सपनों को ढो लिया रे ओ पागल
तेरे सामने हो रहा है तेरे ही वतन का मातम
आ...गले मिल...स्वार्थों को एक तरफ रख
आ... हम सब अपने सारे स्वार्थों को अब ताक पर धर दें....
आ...अब हम सब मिलकर अपने वतन की किस्मत को बदल दें...!!

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

तकलीफ में जीना बहुत मुश्किल होता है, होता है ना ?


तकलीफ में जीना बहुत मुश्किल होता है,
होता है ना ?
और जब हम यह जानते हों कि
इस तकलीफ को हम शायद मिटा भी नहीं सकते
तब ??
अपने निजी जीवन की तकलीफों को तो
अक्सर मिटा ही लेते हैं हम
कभी आसानी से तो कभी कठिनाईयों से
मगर अपने आस-पास और दूर की तकलीफों का क्या करें
जिनके बारे में रोज पढते हैं और देखते हैं !
हमारे ही आसपास बहुत सारे लुटेरे रहते हैं
जो तरह-तरह से हमारे वतन को लूटते हैं
और बेरहम हैं वो इतने कि
खुद के पकडे जाने के भय से
किसी की ह्त्या भी कर देते हैं,या करवा देते हैं !!
हमारे आस-पास हमारे राज्य या देश का लूटा जाना
कोई कुछ पैसों-भर का खेल नहीं है दोस्तों
यह खेल है करोडों का,अरबों का,खरबों का
मगर यह खेल कुल इतना भर भी नहीं दोस्तों
यह प्रश्न का वतन की आबरू का
इसके माथे का शर्म से झुक जाने का
और उसके बावजूद भी हमारे सत्तानशीनों की बेहयाई का
और अपनी तमाम करतूतों के बावजूद के जा रही थेथरई का !!
ऐसा क्यूँ है दोस्तों कि हमारे वतन में जो भी,जहां भी
सत्ता में है,मद में चूर है
और मादरे-वतन की इज्ज़त का उसे कुछ होश ही नहीं है !!
ऐसा क्यूँ है दोस्तों कि यहाँ हर ताकतवर
कमजोरों पर जुल्म-ही-जुल्म ढाने को तत्पर है
और किसी भी मानवीयता का उसमें लेश मात्र भी नहीं है.....
इस तकलीफ के साथ जीना मुश्किल ही नहीं,असंभव है दोस्तों
और अपनी या हम सबकी इस तकलीफ का क्या करना है
आईये हम सब मिलकर सोचते हैं
और सोचकर कुछ कर गुजरते हैं क्योंकि
तकलीफ में जीना बहुत मुश्किल होता है,
होता है ना ?