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शनिवार, 30 अप्रैल 2011

शाश्वत शिल्प देखेंगे

आज साथियों हम लेकर आये हैं एक ऐसा ब्लॉग जो पूर्ण रूप से आप सभी से जुड़ा है और आप भी जानकार हैं इस ब्लॉग की शानदार प्रस्तुति के क्या आप शीर्षक से ही लगा चुके हैं अनुमान या आपको चाहिए कुछ और जानकारी तो देखिये और जुड़िये श्री महेंद्र वर्मा जी से जो आपके बीच के एक ऐसे ही प्रतिभाशाली ब्लोगर हैं और कभी प्राचीन हस्तियों से तो कभी अपनी कविताओं से सजाते हैं अपने ब्लॉग को.

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

क्योंकि यह ब्लॉग बना रहा है दुनिया की पहली '‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘' आपके सहयोग से


दो चार और लेखकों को जिन्हें आप पहचानते हों, उनसे भी लिखने के लिए कहिये . तब हम तैयार करेंगे दुनिया की पहली ‘हिंदी ब्लॉगिंग गाइड‘। जो लोग इसे पढ़ें वे भी आमंत्रित हैं। इसे हम छापेंगे बिना किसी से कोई आर्थिक सहयोग लिए। इसमें योगदान करने वाले ब्लॉगर्स का नाम और उनका परिचय प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे ... Read more

बरगद और मैं


http://atulshrivastavaa.blogspot.com

सेकंड,
मिनट,
घंटा,
दिन,
महीना,
और साल.....।
न जाने
कितने कैलेंडर
बदल गए
पर मेरे आंगन का
बरगद का पेड
वैसा ही खडा है
अपनी शाखाओं
और टहनियों के साथ
इस बीच
वक्‍त बदला
इंसान बदले
इंसानों की फितरत बदली
लेकिन
नहीं बदला  तो
वह बरगद का पेड....।
आज भी
लोगों को 
दे रहा है
ठंडी छांव
सुकून भरी हवाएं.....
कभी कभी
मैं सोचता हूं
काश इंसान भी न बदलते
लेकिन
फिर अचानक
हवा का एक  झोंका आता है
कल्‍पना से परे
हकीकत से सामना होता है
और आईने में
खुद के अक्‍श को देखकर
मैं शर्मिंदा हो जाता हूं

बुधवार, 27 अप्रैल 2011

बहुत प्रिय है यह ब्लॉग

बहुत   प्रिय   है   यह   ब्लॉग  -''http://rathorepriya.blogspot.कॉम ''.ब्लॉग का नाम है -''विचार प्रवाह ''.ब्लॉग स्वामिनी प्रियंका  जी  कहती  हैं  -
 
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शब्द भावनाओं की अभिव्यक्ति है...जिनसे उलझना मेरे जीवन का हिस्सा है...कुछ साहित्य से जुडाव लिखने को प्रेरित करता है , कुछ भागती हुई जिन्दगी.....इसी अहसास के साथ अपनी जीवन यात्रा के विचार प्रवाह को आप सब के सामने रख रही हूँ.....अतः किसी साहित्यिक गलती के लिए माफी की हकदार भी हूँ ......
हक़दार हैं वे हम सभी की शुभकामनाओं की और उत्साहवर्धन की .तो देर किस बात की चलिए चलते हैं इनके ब्लॉग पर .
                                                                                             शिखा कौशिक 

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एक नया ब्लॉग जहाँ आप दे सकते हैँ अपने ब्लॉग का विज्ञापन बिल्कुल मुफ्त।देखेँ ''http://advertise-mee.blogspot.com''

रविवार, 24 अप्रैल 2011

" मुखरित तस्वीरें ''


आज मैं आपको एक नए ब्लॉग के बारे में बताने जा रही हूँ , जहाँ तस्वीरें बोलती है|



जी हाँ इस ब्लॉग का नाम है " मुखरित तस्वीरें "
पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए ..... 
हरदीप सन्धु 

शनिवार, 23 अप्रैल 2011

ये है नौन स्टॉप ''मुशायरा

अनवर जी द्वारा शुरू किये गए गए इस सामूहिक ब्लॉग पर आप पाएंगे एक से बढकर एक शाएरी .ब्लॉग का URL है -''http://mushayera.blogspot.com  ''.आज अनवर जी का जन्मदिवस भी है .हमारी और से उन्हें हार्दिक शुभकामनायें -

आमंत्रण पुष्प

नमस्कार बन्धुओँ,
इस पोस्ट के जरिये मैँ आप सबोँ को एक ऐसे ब्लॉग पर आमंत्रित कर रहा हुँ जो खास आप लोगोँ के लिए निर्मित की गई है।मैँ चाहता हुँ कि आप आएँ और अपने जीवन की खुशियोँ एवं गमोँ को हमारे बीच बाँटे और मिलकर खुशियोँ का आनन्द लेँ एवं समस्याओँ को सुलझाएँ।धन्यवाद।
ब्लॉग पता है: http://bloggers-adda.blogspot.com

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

क्या वास्तव में हममे देश प्रेम समाप्त हो गया है?यदि नहीं तो चलिए इस ब्लॉग पर

अभी मैंने  एक ब्लॉग देखा और ज्यादा हल्ला  गुल्ला करना मेरी आदत नहीं है किन्तु क्या करूं बिना शोर मचाये आज के समय में किसी के कान भी तो नहीं खुलते हैं.शायद यही कहना चाह रहे हैं रजनीश जी  
शहीदों को तो हम क्या देंगे किन्तु उनके प्रति अपने मन में सम्मान की भावना भी हम खो देंगे तो इससे शहीदों की आत्मा को कितना दुःख होगा किन्तु ये हम नहीं सोचते हैं और यही अहसान फरामोशी  कुछ देशभक्तों को अन्दर तक दुःख पहुंचाती है.अपने ब्लॉग के माध्यम से रजनीश जी हमारी आत्मा को अन्दर तक झकझोरने की कोशिश में हैं देखते हैं की आखिर वे अपनी पोस्ट से इस दिशा में कहाँ तक सफलता अर्जित करते हैं.आप यदि अपने देश से प्यार करते हैं और अपने देश पर मर मिटने  वाले देशभक्तों के प्रति सम्मान रखते है तो नीचे दिए गए url पर जाकर रजनीश जी का हौसला अवश्य बढ़ाएं.
                  प्रस्तुति-शालिनी कौशिक 

गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

प्रेम पत्र

ये ब्लॉग सिर्फ प्यार के किस्सोँ एवं कविताओँ के लिए निर्मित है
http://premkibhasha.blogspot.com

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

ये ब्लॉग है ''बैसवारी '

ये  ब्लॉग  है  ''बैसवारी  '' और इसका  URL है -''www.santoshtrivedi.com  ''.ब्लॉग स्वामी संतोष जी अपने परिचय में लिखते हैं कि -
रायबरेली,नई दिल्ली, India
जन्मस्थली भियामऊ, (डुबकी,फ़तेहपुर,ननिहाल)तथा पैतृक स्थान दूलापुर,रायबरेली.शुरूआती पढ़ाई-लिखाई पूरेपान्डेय,रायबरेली में करने के बाद फ़तेहपुर से आई टी आई की ट्रेनिंग तथा बी.एड.(छिवलहा से)किया । कुछ दिन दल्ली-राजहरा(छत्तीसगढ़) में भी रहा.चम्पतपुर(मनाखेड़ा),रायबरेली में अध्यापन कार्य करने के बाद सन् 1994से दिल्ली में हूँ । 'जनसत्ता' का तभी से नियमित पाठक हूँ और काफ़ी दिनों तक 'चौपाल' भी जमाई । हर संवेदनशील मुद्दे पर भड़ास निकालने की आदत है .
संतोष जी ने अपने ब्लॉग पर तीन लघु कवितायेँ प्रस्तुत की हैं .आप भी इनका आनंद उठाएं और संतोष जी का उत्साहवर्धन करें .
                                                                                     
                                                                              शिखा कौशिक 

मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

खतरे मेँ ब्लॉगर

ब्लॉगर डॉट कॉम खतरे मेँ चल रहा है।जल्द से जल्द इस खतरे को टालना जरुरी है।
ब्लॉगर को क्या खतरा है? जानने के लिए देखेँ http://shabdshringaar.blogspot.com
जल्दी देखेँ और वहाँ अपनी टिप्पणी देँ।

रविवार, 17 अप्रैल 2011

मेरी दुनिया मेरे सपने -

यह ब्लॉग है -जाकिर अली रजनीश जी का .इसका URL है -''http://za.samwaad.com/ ''.जाकिर  जी   ने  बहुत  ही  सामयिक  प्रश्न  उठाया  है कि ''क्या सचिन रमेश तेंदुलकर को ''भारत रत्न '' मिलना चाहिए ? आप भी अपनी राय दे इस पर . ऐसे प्रश्नों पर अपना मत प्रकट करना हम सभी के लिए अति आवश्यक है .

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

पर्यावरण के सम्बन्ध में जानकारी हासिल करें


आज की यदि हम गौर करें तो सबसे महत्वपूर्ण समस्या है पर्यावरण प्रदूषण की.और यही वह वजह है जो आज के युवाओं और बच्चों को निगल रही है.आपने भी देखा होगा की आज २० २२ वर्ष के युवा भी हृदय घात के शिकार हो रहे hain .क्या कभी  सोचा  है की हमारा इस पर्यावरण के प्रति क्या उत्तरदायित्व है नहीं न मैं तो अपने क्षेत्र   को जानती हूँ जिसमे मुझे एक दो लोगो को छोड़ कर कोई इस दिशा में जागरूक नहीं दिखा .यहाँ लोग इसी ताक में रहते है की कोई दूसरा ही इस काम को कर दे तो अच्छा नहीं तो जो चल रहा है चलने दो.यहाँ की नगर पालिका इस विषय में कहने के बावजूद भी अक्षमता ही दिखाती है और एस.डी.एम्.का आदेश भी तब तक चलता है जब तक वह यहाँ रहता है जैसे ही उसका तबादला हुआ सफाई व्यवस्था पुराने ढर्रे पर वापस लौट आती है.इस सम्बन्ध में ''हमारा पर्यावरण''ब्लॉग एक उल्लेखनीय कार्य कर रहा है और आप सभी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का शुभ आयोजन कर रहा है.पिछले दिनों इस ब्लॉग ने पर्यावरण पर एक आलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया किन्तु यह बेहद दुखद रहा की उसे इस सम्बन्ध में ब्लोग्गर्स से अंतिम  तारीख बढ़ाने के बावजूद बहुत कम आलेख मिल पाए जिस कारण उसका इन्हें पुस्तक रूप में प्रकाशित करने का सपना चूर चूर हो गया. आजकल वह भेजे गए आलेखों को क्रमवार प्रकाशित कर रहा है मैं चाहती   हूँ की आप सभी इस ब्लॉग पर जाएँ और पर्यावरण के सम्बन्ध में जानकारी हासिल करें आज इस ब्लॉग पर शिखा कौशिक जी का आलेख प्रकाशित हुआ है उसे पढ़ें और पर्यावरण के संवर्धन व् सुधार के लिए कम से कम एक तुलसी का पौधा अवश्य लगायें.
                  शालिनी कौशिक  

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

यह ब्लॉग '' वर्चस्व '' है

यह ब्लॉग '' वर्चस्व ''  है .इस पर अंकित माथुर जी का आलेख ''आइये जाने लोकपाल के बारे में '' बहुत सामयिक व् ज्ञानवर्धक आलेख है .ब्लॉग दुनिया में ऐसे आलेख इसकी सार्थकता को साबित करते है .तो देर मत करिए और इस URL  पर जाकर अपना ज्ञान बढाइये -http://varchassv.blogspot.com/

मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

हो जाये कुछ खट्टा मीठा तीखा

बहुत दिनों से विभिन्न ब्लोग्स पर मैं एक नाम देख रही थी सच कह रही हूँ ध्यान तो मेरा ''कौशिक '' संबोधन के कारण ही गया  किन्तु मैं उनके ब्लॉग को खोल कर नहीं देख पाई किन्तु आज जब मैंने उनकी टिप्पणी अपने ब्लॉग पर देखी तो मैं उनका ब्लॉग देखने से खुद को रोक नहीं पाई और जैसा की ''जहाँ चाह वहां राह'' पहुँच गयी उनके प्रोफाइल पर और देखा की ब्लोग्स की भरमार है उनमे से एक ब्लॉग मन को सहज ही अपनी और खींच ले गया और खोल लिया उसे और वास्तव में मिला कुछ ''खट्टा-मीठा -तीखा सा ''योगेन्द्र जी ने आलेख कुछ समय पूर्व लिखा है किन्तु विडंबना ये है की ये विषय आज भी सामायिक है और शायद हमेशा रहेगा आप भी इस ब्लॉग को देखेंगे तो मुझसे सहमत हुए बगैर नहीं रहेंगे.ब्लॉग का url  है-

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

सारा सच ब्लॉग मुझे पसंद है I Like It.

सारा सच ब्लॉग मुझे पसंद है केवल इसलिए कि यह जनहित में काम करता है और भ्रष्टाचार के खिलाफ है . ब्लौग जगत में इसके पदार्पण करते ही बड़े बड़ों के छक्के वास्तव में छूट गए हैं  . इसकी ताज़ा पोस्ट देखिये और सोचिये कि कैसे इस अभियान को मज़बूत बनायें ?

पर्ची पर बिना डॉक्टर के सिग्नेचर बाहर से कोई भी सामान न लाए ...ऐसा क्यों ..हर जगह भ्रष्टाचार है फैला ..??

जयादातर सभी सरकारी अस्पताल मे ओ टी मे आए मरीजो के लिए बाहर से सामान मंगवाने पर वहा पर लगे बोर्ड पर यही लिखा होता है, क्योकि ओ टी मे मरीजो के बहाने अस्पताल में काम करने वाले कुछ लोग अपने फायेदे के लिए बाहर से सामान मंग्वालेते है जिसकी ज्यादा जरूरत भी नहीं होती,वह लोग ऊपर की कमाई के लिए सामान मंगवाकर बाद मे उसे वापस कर देते है या बेच देते है,...ऐसा क्यों ..हर जगह भ्रष्टाचार है फैला ..?? ..

बुधवार, 6 अप्रैल 2011

अशोक जी का ब्लॉग


ब्लॉग का नाम है ''मेरा मन कहीं '' और URL  है ''http://slydoe163.blogspot.कॉम''हम भारतीय कितने धर्मनिरपेक्षता के पक्षधर हैं इसको लक्ष्य करते हुए बहुत सुन्दर पोस्ट प्रस्तुत की है अशोक जी ने .शीर्षक है -''सनातन धर्म का एक पड़ाव व् मुसलमान ''.जिसमे वे लिखते हैं -धर्म व अध्यात्म प्राणियों के बीच द्वेष व मतभेद नहीं रखता.हम हिन्दू हो या मुसलमान या अन्य,सेवा व दया भाव का जिक्र सभी जगह पर मिलता है.मन्दिर, मस्जिद, आदि धर्मस्थल व सम्प्रदाय ,आदि तो सनातन यात्रा के विभिन्न स्तरोँ ,चक्र,लतीफ,system,आदि के आधार पर पड़ाव है,हमारे अन्तस्थ धर्म के.''इस ब्लॉग पर जाकर अशोक जी का उत्साहवर्धन करेंगे आपसे मेरी यही प्रार्थना  है .आप का दिन शुभ व् मंगलमय  हो ऐसी शुभकामनाओं के साथ -शिखा कौशिक  

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

जीवन साथी का सम्मान अनूठा ब्लॉग.

आज मैं फिर उसी ब्लॉग पर गयी जिस पर जाकर हर बार खाली लौट आती हूँ कारण प्रश्न इतना कठिन कि  मेरी बुद्धि में उसका उत्तर नहीं आता बस हर बार देखती इस लालच में हूँ कि शायद मुझे उत्तर पता हो और मैं जीत जाऊं.
   ब्लॉग की सबसे बड़ी विशेषता है की इस ब्लॉग में ब्लोगर  द्वारा अपने जीवन साथी को बहुत बड़ा सम्मान दिया गया है.अधिकांशतया बड़े बच्चों के नाम पर और बच्चे बड़ों के नाम पर अपने महत्व पूर्ण कार्यों स्थानों के नाम रखते हैं और यहाँ अच्छा ये लगा है कि माननीय डॉ.रूपचंद्र शास्त्री जी ने अपनी धर्मपत्नी को वह सम्मान दिया है जिसकी आकांशा शायद भारतीय संस्कृति में एक धर्मपत्नी रखती है.आप भी उनके इस ब्लॉग के अवश्य दर्शन करें और उनकी पहेली में शामिल हों यदि गुप-चुप रूप से बता सकें तो कृपया मुझे भी उत्तर बतादें क्योंकि मैं तो बचपन से पहेली जीतने में काफी उत्साहित रहती हूँ.उनके ब्लॉग का नाम है"अमर भारती" और ब्लॉग url  है-
http://www.amarbharti.in/

रविवार, 3 अप्रैल 2011

मां की महिमा


http://www.atulshrivastavaa.blogspot.com/
डोंगरगढ  की मां  बम्‍लेश्‍वरी देवी  
(मेरी यह पोस्‍ट पिछले साल अक्‍टूबर महीने में प्रकाशित हो चुकी है। इसे आज से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्रि के मौके पर फिर से प्रकाशित कर रहा हूं। मां बम्‍लेश्‍वरी मंदिर के इतिहास, पौराणिक महत्‍व और मां की महिमा का बखान करती यह पोस्‍ट आपके समक्ष फिर से प्रस्‍तुत है।)
जय माता दी। राजनांदगांव जिले के डोगरगढ़ में स्थित है मां बम्लेश्वरी देवी का मंदिर। हर साल नवरात्रि के मौके पर मां के दरबार में बड़ा मेला लगता है। दूर दूर से लोग मां के दर्शन को आते हैं। मां से मनोकामना मांगते हैं। और मां सबकी मनोकामना पूरी भी करती  है। छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे ऊंची चोटी पर विराजित डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी का इतिहास काफी पुराना है। वैसे तो साल भर मां के दरबार में भक्तों का रेला लगा रहता है लेकिन लगभग दो हजार साल पहले माधवानल और कामकंदला की प्रेम कहानी से महकने वाली कामावती नगरी में नवरात्रि के दौरान अलग ही दृश्य होता है। छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन कस सबसे बड़ा केन्द्र पुरातन कामाख्या नगरी है जो पहाड़ों से घिरे होने के कारण पहले डोंगरी और अब डोंगरगढ़ के नाम से जाना जाता है। यहां ऊंची चोटी पर विराजित बगलामुखी मां बम्लेश्वरी देवी का मंदिर छत्तीसगढ़ ही नहीं देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केन्द्र बना हुआ है। हजार से ज्यादा सीढिय़ां चढ़कर हर दिन मां के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु आते हैं और जो ऊपर नहीं चढ़ पाते उनके लिए मां का एक मंदिर पहाड़ी के नीचे भी है जिसे छोटी बम्लेश्वरी मां के रूप में पूजा जाता है। अब मां के मंदिर में जाने के लिए रोप वे भी लग गया है। 
वैसे तो मां बम्लेश्वरी के मंदिर की स्थापना को लेकर कोई स्पष्ट  प्रमाण नहीं है पर जो तथ्य सामने आए हैं उसके मुताबिक  उज्जैन के राजा विक्रमादित्‍य को मां बगलामुखी ने सपना दिया था और उसके बाद डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर कामाख्या नगरी के राजा कामसेन ने मां के मंदिर की स्थापना की थी। एक कहानी यह भी है कि राजा कामसेन और विक्रमादित्य के बीच युद्ध में राजा विक्रमादित्य के  आव्हान पर उनके कुल देव उज्जैन के महाकाल कामसेन की सेना का विनाश करने लगे और जब कामसेन ने अपनी कुल देवी मां बम्लेश्वरी का आव्हान किया तो वे युद्ध के मैदान में पहुंची, उन्हें देखकर महाकाल ने अपने वाहन नंदी से उतर कर मां की शक्ति को प्रमाण किया और फिर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। इसके बाद भगवान शिव और मां बम्लेश्वरी अपने अपने लोक को विदा हुए। इसके बाद ही मां बम्लेश्वरी के पहाड़ी पर विराजित होने की भी कहानी है। यह भी कहा जाता है कि कामाख्या नगरी जब प्रकृति के तहत नहस में नष्ट हो गई थी तब डोंगरी में मां की प्रतिमा स्व विराजित प्रकट हो गई थी। सिद्ध महापुरूषों और संतों ने अपने आत्म बल और तत्व ज्ञान से यह जान लिया कि पहाड़ी में मां की प्रतिमा प्रकट हो गई है और इसके बाद मां के मंदिर की स्थापना की गई।
      
प्राकृतिक रूप से चारों ओर से पहाड़ों में घिरे डोंगरगढ़ की सबसे ऊंची पहाड़ी पर मां का मंदिर स्थापित है। पहले मां के दर्शन के लिए पहाड़ों से ही होकर जाया जाता था लेकिन कालांतर में यहां सीढिय़ां बनाई गईं और मां के मंदिर को भव्य स्वरूप देने का काम लगातार जारी है। पूर्व में खैरागढ़ रियासत के राजाओं द्वारा मंदिर की देखरेख की जाती थी बाद में राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह ने ट्रस्ट का गठन कर मंदिर के संचालन का काम जनता  को सौंप दिया। अब मंदिर में जाने के लिए रोप वे की भी व्यवस्था हो गई है और मंदिर ट्रस्ट अस्पताल धर्मशाला जैसे कई सुविधाओं की दिशा में काम कर रहा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु मां के दिव्य स्वरूप को देखकर यहीं रूक जाने को लालायित रहते हैं। मां के मंदिर में आस्था के साथ हर रोज हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के कई हिस्सों से मंदिर में लोग आते हैं और मां से आशीर्वाद मांगते हैं। आम दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या तो फिर भी कम होती है लेकिन नवरात्रि के मौके पर मां के मंदिर में हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मां के दरबार में आने वाला हर श्रद्धालु खुद को भाग्यशाली समझता है और मां के दर्शन कर लौटते वक्त उसके जेहन में अगली बार फिर आने की लालसा जग जाती है।

डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी  के दो मंदिर हैं। एक मंदिर पहाडी के नीचे है और दूसरा पहाड़ी के ऊपर। पहाडी के नीचे के मंदिर को बड़ी बमलई का मंदिर और पहाड़ी के नीचे के मंदिर को छोटी बमलई का मंदिर कहा जाता है।

मां बम्लेश्वरी  मंदिर को  लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

00   एतिहासिक और धार्मिक  नगरी डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी के दो मंदिर विश्व प्रसिद्ध हैं। एक मंदिर 16 सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है जो बड़ी बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है। समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से विख्यात है।

00   ऊपर विराजित मां और नीचे विराजित मां को एक दूसरे की बहन कहा जाता है। ऊपर वाली मां बड़ी और नीचे वाली छोटी बहन मानी गई है।

00   सन 1964 में खैरागढ़ रियासत के भूतपूर्व नरेश श्री राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह ने एक ट्रस्ट की स्थापना कर मंदिर का संचालन ट्रस्ट को सौंप दिया था।

00   मां बम्लेश्वरी देवी शक्तिपीठ का इतिहास लगभग 2200 वर्ष पुराना है। डोंगरगढ़ से प्राप्त भग्रावेशों से प्राचीन कामावती नगरी होने के प्रमाण मिले हैं। पूर्व में डोंगरगढ़ ही वैभवशाली कामाख्या नगरी कहलाती थी।

00   मंदिर के पुराने पुजारी और जानकार बताते हैं कि राजा विक्रमादित्य को माता ने स्वप्‍न  दिया था कि उन्हें यहां की पहाड़ी पर स्थापित किया जाए और उसके बाद उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया। ऐसा भी कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य के स्वप्‍न के बाद मंदिर का निर्माण राजा कामसेन ने कराया था।

00   मां बम्लेश्वरी मंदिर के इतिहास को लेकर कोई स्पष्ट  तथ्य तो मौजूद नहीं है, लेकिन मंदिर के इतिहास को लेकर जो पुस्तकें और दस्तावेज सामने आए हैं, उसके मुताबिक डोंगरगढ़ का इतिहास मध्यप्रदेश के उज्जैन से जुड़ा हुआ है।

00   मां बम्लेश्वरी को मध्यप्रदेश के उज्जैयनी के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुल देवी भी कहा जाता है।

00   ऐसी किवदंती है कि राजा वीरसेन की कोई संतान नहीं थी। वे इस बात से दुखी रहते थे। कुछ पंडितों की सलाह पर राजा वीरसेन और रानी महिषमतिपुरी मंडला गए। वहां पर उन्होंने भगवान शिव और देवी भगवती की आराधना की। उन्होंने वहां एक शिवालय का निर्माण भी कराया। इसके एक साल के भीतर रानी गर्भवती हुई और उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। पुत्र का नाम मदनसेन रखा गया।  इसके बाद राजा वीरसेन ने पुत्र रत्न प्राप्त होने को शिव और भगवती की कृपा मानकर मां बम्लेश्वरी के नाम से डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी का मंदिर बनवाया।

00  इतिहासकारों और विद्वानों ने इस क्षेत्र को कल्चूरी काल का पाया है लेकिन अन्य उपलब्ध सामग्री जैसे जैन मूर्तियां यहां दो बार मिल चुकी हैं, तथा उससे हटकर कुछ मूर्तियों के गहने, उनके वस्त्र, आभूषण, मोटे होठों तथा मस्तक के लम्बे बालों की सूक्ष्म मीमांसा करने पर इस क्षेत्र की मूर्ति कला पर गोंड कला का प्रमाण परिलक्षित हुआ है।

00  यह अनुमान लगाया जाता है कि 16 वीं शताब्दी तक  डूंगराख्या नगर गोंड राजाओं के अधिपत्‍य में रहा। यह अनुमान भी अप्रासंगिक  नहीं है कि गोंड राजा पर्याप्त समर्थवान थे, जिससे राज्य में शांति व्यवस्था स्थापित थी। आज भी पहाड़ी में किले के बने हुए अवशेष बाकी हैं। इसी वजह से इस स्थान का नाम डोंगरगढ़ (गोंगर, पहाड़, गढ़, किला) रखा गया और मां बम्लेश्वरी का मंदिर चोटी पर स्थापित किया गया।

अन्य जानकारियां

00   एतिहासिक और धार्मिक स्थली डोंगरगढ़ में कुल 11 सौ सीढिय़ां चढऩे के बाद मां के दर्शन होते हैं।

00   यात्रियों की सुविधा के लिए रोपवे का निर्माण किया गया है। रोपवे सोमवार से शनिवार तक सुबह आठ से दोपहर दो और फिर अपरान्ह तीन से शाम पौने सात तक चालू रहता है। रविवार को सुबह सात बजे से रात सात बजे तक चालू रहता है। नवरात्रि के मौके पर चौबीसों घंटे रोपवे की सुविधा रहती है।

00   बुजुर्ग यात्रियों के लिए कहारों की भी व्यवस्था पहले थी पर रोपवे हो जाने के बाद कहार कम ही हैं।
00   मंदिर के नीचे छीरपानी जलाशय है जहां यात्रियों के लिए बोटिंग की व्यवस्था भी है।

00   डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी के दो मंदिरों के अलावा बजरंगबली मंदिर, नाग वासुकी मंदिर, शीतला मंदिर,  दादी मां मंदिर भी हैं।

00  मुंबई हावड़ा मार्ग पर राजनांदगांव से डोंगरगढ़ जाते समय राजनांदगांव में मां पाताल भैरवी दस महाविद्या पीठ मंदिर है, जो अपनी भव्यता के चलते दर्शनीय है। जानकार बताते हैं कि विश्‍व के सबसे बडे शिवलिंग के आकार के मंदिर में मां पातालभैरवी विराजित हैं। तीन मंजिला इस मंदिर में पाताल में मां पाताल भैरवी, प्रथम तल में दस महाविद़़यापीठ और ऊपरी तल पर भगवान शंकर का मंदिर है।
00  मां बम्लेश्वरी मंदिर में ज्योत जलाने हर वर्ष देश और विदेशों से हजारों श्रद्धालु आते हैं। हालत यह है कि मंदिर में वर्तमान में ज्योत के लिए जो बुकिंग कराई जा रही है है, वह वर्ष 2015 के क्वांर नवरात्रि के लिए है।

00   ट्रस्ट समिति अस्पताल संचालित करती है। अब मेडिकल कालेज खोले जाने की भी योजना है।

00   मंदिर का पट सुबह चार बजे से दोपहर एक बजे तक और फिर दोपहर दो बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। रविवार को सुबह चार बजे से रात दस बजे तक मंदिर लगातार खुला रहता है।
00   नवरात्रि के मौके पर मंदिर का पट चौबीसों घंटे खुला रहता है।

डोंगरगढ़ कैसे पहुंचे

00   डोंगरगढ़ के लिए ट्रेन और सड़क मार्ग दोनों ओर से रास्ता है।

00   मुबई हावड़ा रेल मार्ग पर हावड़ा की ओर से राजधानी रायपुर के बाद डोंगरगढ़ तीसरा बड़ा स्टेशन है। बीच में दुर्ग और राजनांदगांव रेलवे स्टेशन पड़ता है।

00   रायपुर से डोंगरगढ़ की रेल मार्ग से दूरी लगभग 100 किलोमीटर है।

00   राजनांदगांव जिला मुख्यालय से डोंगरगढ़ की रेल मार्ग से दूरी 35 किलोमीटर है।
00   सड़क  मार्ग से डोंगरगढ़ के लिए राजनांदगांव जिला मुख्यालय से दूरी 40 किलोमीटर है और नेशनल हाईवे में राजनांदगांव से नागपुर की दिशा में जाने के बाद 15 किलोमीटर की दूरी पर तुमड़ीबोड गांव से डोंगरगढ़ के लिए पक्की सड़क मुड़ती है जो सीधे डोंगरगढ़ जाती है।

00  डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन जंक्शन की श्रेणी में आता है। यहां सुपर फास्ट ट्रेनों को छोड़कर सारी गाडियां रूकती हैं, लेकिन नवरात्रि में सुपर फास्ट ट्रेनें भी डोंगरगढ़ में रूकती हैं।
00  डोंगरगढ़ जाने वाले यात्रियों के लिए रायपुर से लेकर राजनांदगांव तक यात्री बसों और निजी टैक्सियों की व्यवस्था रहती है।

00  डोंगरगढ़ के लिए निकटस्थ हवाई अड्डा रायपुर के माना में स्थित है।

00   डोंगरगढ़ में यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रस्ट समिति द्वारा मंदिर परिसर में धर्मशाला का निर्माण किया गया है। रियायती दर पर यहां कमरे मिलते हैं। मुफ्त में भी धर्मशाला के हाल में रूकने की व्यवस्था है।

00   यात्रियों के लिए रियायती दर पर भोजन की व्यवस्था भी रहती है। ट्रस्ट द्वारा मंदिर के नीचे और बीच में केंटीन संचालित है।

00   नवरात्रि पर विभिन्न संगठनों द्वारा नि:शुल्‍क भंडारा की व्यवस्था भी की जाती है।

00   डोंगरगढ़ में यात्रियों की सुविधा के लिए होटल और लाज भी उपलब्ध है।

00   डोंगरगढ़ आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए राज्य सरकार के पर्यटन विभाग ने तुमड़ीबोड के पास मोटल बनाया है।

00  डोंगरगढ़ चारों ओर से पहाड़ों से घिरा हुआ है और पहाड़ों पर हरियाली यहां मन मोह लेती है।

00   डोंगरगढ़ में एक पहाड़ी पर बौद्ध धर्म के लोगों का तीर्थ प्रज्ञागिरी स्थापित है। यहां भगवान बुद्ध की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है।

00  डोंगरगढ़ में वर्ष भर छत्तीसगढ़ी देवी भक्ति गीतों की शूटिंग होते रहती है और प्रदेश के अलावा बाहर के कलाकार यहां लगातार आते रहते हैं।http://www.atulshrivastavaa.blogspot.com/

एक ब्लॉग डंके की चोट पर !

इस ब्लॉग का URL  है -''http://blostnews.blogspot.com/'' ये  ब्लॉग है हम  सभी   के परिचित  श्री  हरीश  सिंह  जी  का तो  नाम  भी  दमदार  ही होगा  .ब्लॉग का नाम  है ''डंके  की  चोट  पर  ''.जल्द से जल्द इस ब्लॉग का चक्कर लगा आइये और बता ही आइये -क्या हमें शर्म आएगी..............?.

शनिवार, 2 अप्रैल 2011

एक ब्लॉग ओम जी का

एक ब्लॉग ओम जी का   
                   डॉ . ओम प्रकाश पाण्डेय
ब्लॉग का  नाम है -''मेरी हिंदी कवितायेँ और शायरी  ''.ओम प्रकाश जी अपने परिचय में लिखते ''i love to live and i live to love '' हाल ही में इनके ब्लॉग पर प्रकाशित रचना ''ये जलजला कहाँ से आता है ''में जापान में आये भयंकर भूकंप से उत्पन्न त्रासदी का मार्मिक चित्रण किया गया है .इनके ब्लॉग का  URL  है -''http://sherpatnite.blogspot.com/

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शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

ये ब्लॉग चाहता हैआपका साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ !

ब्लॉग का नाम है ''सारा सच ''.प्रोफाइल  में जाने पर बस इतना परिचय मिलता है -लिंग-पुरुष ,उद्योग-निर्माण ,व्यवसाय -मीडिया ,स्थान -east  delhi :भारत .इनका URL  है   -http://sarasach.blogspot.com/ .ये आह्वान करते है की सच की लड़ाई में इनका साथ दीजिये .
तो चलिए  बढ़ाते है कदम इनके साथ भ्रष्टाचार से समाज-राष्ट्र को मुक्त करने की ओर .