Google+ Followers

गुरुवार, 31 मार्च 2011

भारत तो जीते पर....


http://www.atulshrivastavaa.blogspot.com/

फाईल फोटो साभार samaylive.com

सबसे पहले मैं माफी चाहता हूं, इस तस्‍वीर को अपने ब्‍लाग में लगाने के लिए, लेकिन क्‍या करूं लगाना पडा। फिल्‍मों में हिरोईन कम कपडों में दिखाई देती हैं और अंतरंग दृश्‍य देती हैं, बाद में यह कहकर अपना पल्‍ला झाड लेती हैं कि कहानी की यह मांग थी। मैं भी शायद इसी सोच के साथ इस तस्‍वीर का प्रयोग कर रहा हूं। अब वे हिरोईनें कितना सच बोल रही होती हैं, यह तो मैं नहीं जानता पर मैं यहां सोलह आने सच बोल रहा हूं यह मैं आपको यकीन दिलाता हूं। (इसीलिए मैंने इस तस्‍वीर को निंगेटिव शेड दे दिया है।)  
अब आता हूं मुददे  की बात पर। भारत विश्‍व कप के फायनल में पहुंच गया है। दो अप्रैल को उसका श्रीलंका से मुकाबला है। क्रिकेट पर सटटा लग रहा है, क्रिकेट को लेकर जुनून चरम पर है। कोई व्रत रख रहा है  तो कोई हवन कर रहा है, इस उम्‍मीद में कि भारत विश्‍वकप जीत जाए। 1983 का इतिहास दोहरा दिया जाए। कुल मिलाकर जुनून पूरे चरम पर है। विश्‍वकप में भारत जीते यह हर भारतीय की इच्‍छा है और हर भारतीय विश्‍व कप को इस बार अपने देश में ही रखने की तमन्‍ना रखता है लेकिन इसी बीच एक माडल ने जो बात कही है वह अपने आप में न सिर्फ आपत्तिजनक है बल्कि भारतीय परंपरा के बिल्‍कुल विपरीत भी है।
अब फिर से इस तस्‍वीर पर आता हूं। यह तस्‍वीर है, एक उभरती हुई माडल पूनम पांडे की। किंगफिशर जैसी कंपनियों के लिए विज्ञापन करने वाली पूनम का कहना है कि भारत के विश्‍वकप जीतने पर वह न्‍यूड  होकर अपनी खुशी का इजहार करेगी। वह कहती है कि वह ऐसा टीम इंडिया के हौसले को बढाने के लिए करना चाहती है। अब यह तो पूनम पांडे ही जाने कि यदि टीम विश्‍वकप जीत जाती है तो उसकी इस ‘हरकत’ से टीम का हौसला किस तरह बढ जाएगा। खैर अपनी धुन में मगन पूनम यह भी कहती है कि वह ड्रेसिंग रूप में खिलाडियों के सामने न्‍यूड होगी और यदि सरकार और बीसीसीआई उसे इजाजत दे तो वह स्‍टडियम में भी ऐसा कर सकती है।
विदेशों में इस तरह की घटनाएं आम हैं लेकिन भारत में इस तरह की घोषणा अपने आप में नई बात है और आश्‍चर्यजनक भी। पूनम की इस घोषणा ने यह तो दर्शाया  है कि भारत में क्रिकेट को लेकर दीवानगी किस हद तक है लेकिन क्‍या पूनम की इस तरह की घोषणा भारतीय संस्‍कृति के अनुकूल है। क्‍या किसी को अपनी दीवानगी दिखाने का यही एक तरीका सूझ सकता है।
इस खबर को जब मैंने पढा तो ऐसा लगा कि यह महज क्रिकेट के प्रति दीवानगी की बात  नहीं, कहीं न कहीं प्रचार पाने का तरीका है और मानसिक दीवालिएपन का भी परिचायक है। आप इस बारे में क्‍या सोचते हैं। हर भारतीय चाहता है कि भारत विश्‍वकप जीते लेकिन क्‍या एक भी भारतवासी ऐसा होगा जो यह सोचता होगा कि इसके बाद पूनम की इच्‍छा पूरी हो। ईश्‍वर से यही कामना कि भारत को विश्‍व विजेता बनाए और पूनम को सदबुध्दि दे।

ब्लॉग भवन में नन्हा सा कोना ...चैतन्य का

नन्हे से चैतन्य के ब्लॉग पर पहुँचते ही चैतन्य का मासूम मुस्कान से युक्त फोटो देखकर मन खिल उठता है .चैतन्य अपने परिचय में बतातें हैं -''
Jaipur, India, Calgary ,Canada
मैं चैतन्य एक बहुत समझदार बच्चा हूँ | माँ को कभी परेशान नहीं करता | मुझे पोलर बीयर बहुत अच्छे लगते हैं | मुझे डांस करना और माँ को मनाना बेहद पसंद है | स्कूल में भी मुझे सब बहुत पसंद करते हैं | बस! मुझे माँ की एक बात बिल्कुल समझ नहीं आती | मस्ती करो तो परेशान होकर कहती है की चुपचाप बैठो| चुप बैठता हूँ तो परेशान होकर कहती है क्या हुआ ? चुप क्यों बैठे हो ? इस ब्लॉग पर मैं आपसे अपनी सारी बातें शेयर करूंगा| मैं थोड़ा छोटा हूँ इसलिए मेरी माँ इन बातों को आप तक पहुचायेंगी ''.चैतन्य के ब्लॉग पर जाएँ और नन्हे से ब्लोगर की नयी पोस्ट ''चक दिया indiyayayaya ....बधाइयाँ ''का आनंद उठाएं .''चैतन्य का कोना ''नाम के इनके ब्लॉग का URL  है -''http://chaitanyakakona.blogspot.com/

बुधवार, 30 मार्च 2011

केवल टिप्पणी रूपी कुछ प्रेम शब्दों से बुजुर्ग भोला जी के दिल से निकली दुआ ।

मेरी बात - देखिये सन्तों की यह वाणी कितनी सत्य है कि..ऐसी वाणी बोलिये मन का आपा खोय । औरन को शीतल करे मन आपहु शीतल होय ।..
यधपि इस ब्लाग का परिचय शालिनी जी यहाँ करा चुकी हैं । मैंने भी इनका परिचय "
ब्लाग वर्ल्ड काम " और अपने ब्लाग " सत्यकीखोज " पर भी कराया है ।..लेकिन आज भोला जी के दिल से हम लोगों के प्यार मुहब्बत की वजह से जो दुआ निकली । जो भावभीने उदगार निकले । उसे आप लोगों के साथ बाँट रहा हूँ । क्योंकि आप सबने भी मेरा साथ दिया है । अन्त में मैं आप सबसे यही कहना चाहूँगा कि बुजुर्गों का आशीर्वाद भी बेहद अनमोल होता है । अतः कभी भी उनकी उपेक्षा न करें । और यथासंभव उनकी भावनाओं का आदर करें ।


श्री भोला जी का मेल -- प्रियवर ! राम राम । हमने रोज़नामचे के पन्ने पलटकर देखे । देखा कि आप मेरे प्रथम संदेश से ही मुझे प्रोत्साहित कर रहे थे । 
मैने स्वान्तः सुखाय..अपने प्यारे प्रभु की प्रेरणा से जीवन के बचे खुचे दिनों मे व्यस्त रहने के लिये तथा इसी बहाने " हरि सुमिरन " कर लेने की लालच से ..पत्नी कृष्णा जी और सुपुत्री श्रीदेवी के सुझाव और सहयोग से हिन्दी भाषा मे आत्मकथा का यह ब्लोग लिखना शुरु किया । आनन्द भी आने लगा ।


बीच में थोडा हतोत्सहित  हुआ । आपने  प्रोत्साहित किया । पुनः गाडी चल पडी ।  पुनः राम का काम चालू  हो गया । आपका रिणी हो गया । यह जानना चाहता हूँ ।
  कहो उरिन कैसे हो पाऊँ । किस मुद्रा में मोल चुकाऊँ ?
  केवल प्रभु की महिमा गाता । और मुझे कुछ भी ना आता । 
  दुर्बल हूँ काया से इतना । धन दौलत  हूँ  नही  कमाता ।
  केवल प्रभू की महिमा गाता ।
  
आप ही सुझाव दें । आपकी अथवा यदि आपकी कोई संस्था है । उसकी अपनी सीमित योग्यता और सामर्थ्य से क्या सेवा कर सकता हूँ ?  अतिशय आभारी हूँ । भोला । 


VISHWAMBHUR N SHRIVASTAV "Bhola"
Mobile: 1-412-722-9246
Landline: 1-617-739-4849
Email: vns.bhola@ramparivar.com
Skype: Bhola.Krishna
Blog: http://mahavir-binavau-hanumana.blogspot.com
Address: 78 Clinton Road, Brookline, MA 02445, USa

आओ पायें विश्राम यहाँ.

आज जब मैं शिखा जी के ब्लॉग विख्यात पर गयी तो वहां ब्लोगसूची में एक ब्लॉग दिखा शीर्षक अनोखा लगा तो उसका यहाँ उल्लेख करने का मन किया आप भी देखें कि कैसे एक यू.पी.वासी असम से जुड़ जाता है और कैसे वहां बैठ कर भी अपने मन को विश्राम देने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगता है.मिलिए अनीता जी के ब्लॉग "मन पाए विश्राम जहाँ "से नीचे दिए गए लिंक पर-

विवेक का ब्लॉग

http://vivj2000.blogspot.com/ -इस URL  पर जाकर आप मिल सकते हैं ''मेरे सपने ''नाम के ब्लॉग से .विवेक जैन जी द्वारा संचालित इस ब्लॉग पर एक सुन्दर भावाभिव्यक्ति का आनंद लीजिये जिसे विवेक जी ने शीर्षक दिया है -''मिटने का अधिकार ''

सोमवार, 28 मार्च 2011

एक पहेली हैं ये ब्लोगर पर ब्लॉग बड़ा सरल

एक पहेली हैं ये ब्लोगर  पर ब्लॉग बड़ा सरल आप भी सोचेंगे मैं यहाँ   पहेली लेकर क्यों बैठ गयी पर परेशान मत होइए क्योंकि आप सब इन महाशय को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं किन्तु इनके जीवन दर्शन शायद अभी आप सभी की पहुँच से बाहर  हैं.हम सभी सत्य की केवल बाते करते हैं किन्तु सम्पूर्ण सत्य की खोज हमारे बस का काम नहीं किन्तु राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ जी ये कार्य बहुत सादगी से कर रहे हैं और साथ ही ये हमारी तरह अपनी  प्रसिद्धि  के  पीछे  पागल  भी  नहीं  हैं   क्योंकि  ये  जो  कुछ  भी  करते  हैं  अपने गुरु  जी  की  छत्र -छाया  में  करते  हैं  इनका ब्लॉग सत्य की खोज हम सभी के लिए पथ प्रदर्शक के समान है .आप सब भी इसका अवलोकन अवश्य करें इनके ब्लॉग का लिंक है-
"http://searchoftruth-rajeev.blogspot.com/"   और ये पोस्ट राजीव जी से भी एक निवेदन करने के लिए  लिखी जा रही है कि अगर आप ब्लॉग जगत को अपना परिवार समझते है तो खुल कर सामने आयें क्योंकि सच सभी के सामने खुला होना चाहिए और सच को किसी परदे की कभी आवश्यकता नहीं पड़ती है .  

ये ब्लाग मुझे अच्छा नहीं लगता । पहचान कौन ?

1 वन्स अपान ए टाइम..ए स्माल स्वीट बेबी लिव्ड इन लखनाओ..आफ़्टर..? यीयर शी..(.छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा ) । 2 एक बार राधिका ने कहा - (....) यार तुम पका देती हो । ( छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा ) ।
3 एक समय की बात है । स्मायली स्माल बेबी स्वीटी एन्ड नाओ दिस टाइम हार्ड हर्टी..( छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा )
कैसे लिखूँ यार ! कोई साफ़्ट कार्नर ही नहीं मिल रहा । यहाँ तो । उफ़ !
हाँ..मिल गया क्लू..4 इनकी पोस्ट पर लोग कमेंट नहीं करते । बल्कि छोटी मोटी पोस्ट ही लिख देते हैं । ( छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा ) । 5 कभी नबाबी शान बान के लिये प्रसिद्ध शहर लखनऊ से अब थाईलेंड में.. ( छोङो यार ! मजा नहीं आ रहा )
उफ़..! कितने बिगेनिंग प्वाईंट से लिखना शुरू किया । पर ये " आयरन " कोई शेप ही नहीं ले रहा । इसलिये छोङो । इनके ब्लाग के बारे में बताना । आप यहाँ क्लिक करके इनके ब्लाग पर जाकर खुद ही देख लें । ये किसका ब्लाग है ??
( डर के मारे ) डिस्क्लेमर - ऊपर लिखी बातों से " राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ " का कोई लेना देना नहीं हैं । ये बातें " शिखा जी " ने (......जी ?  ) हमारी लङाई करवाने के उद्देश्य से लिखी हैं । जिन ....? के बारे में यह पोस्ट है । वह बहुत भावुक और अच्छे ह्रदय युक्त सुशील संस्कारवान......? हैं । धन्यवाद ।
मैं ( डर के मारे ) जा  रहा हूँ । अगर कोई युद्ध नहीं छिङा । तो जल्दी ही आ जाऊँगा ।

रविवार, 27 मार्च 2011

ये जोत ( ज्योति ) से जोत जलाते चलो । वाली देवी जी कौन हैं ?

एक बार मैं शिखा जी के घर गया । 
तो उन्होंने कहा - आईये..खङे रहिये । 
मैंने कहा - कमाल है मैडम ! सब कहते हैं । बैठिये प्लीज ! और आप कह रहीं हैं..कमाल है । 
तब शिखा जी ने खङे खङे ही खङी बोली में खङी खङी ( आई मीन.. मतबल खरी खरी ) सुनाते हुये कहा -  मिस्टर राजीव..जब तक मैं नारी को उसका खङा ( ऊँचा ) मुकाम नहीं दिलवा देती । खङी ही रहूँगी । 
( और दूसरी बहना ये काम चैम्बर में बैठे बैठे ) मैंयने खाली सोचा यार ..कहकर पंगा कौन लेता ?
खैर मैंने अपने लेपटाप से कहा -  कम्प्यूटर जी..जरा गुगलवा का कान उमेठ ( सर्च ) कर पता करी । कौन कौन अइसन देवी जी हैं ? जो हम आदमी लोगवा का खटिया खङी करके ही छोङी ।
कम्यूटर जी ने तुरन्त ये लाइने पेश कर दी
" नारी से बेहतर नारी को । कौन समझ पायेगा । मिल जायेगी जहां ये शक्तियां । फिर कौन हरा पायेगा ? बदल देगी हर तस्वीर । संगठन की जीत से । हर राह सुलभ हो जायेगी । एकता की जंजीर से । एक पल ठहरे जहां जग हो अभय । खोज करती हूँ उसी आधार की । " ज्योति सिंह...काव्यांजलि
झूल्लेलाल..मैंने सोचा..ये जोत ( ज्योति ) से जोत जलाते चलो । वाली देवी जी कौन हैं ?
तो मध्यप्रदेश सतना की ज्योति सिंह जी निकलीं । तो जाईये भैया । और देखिये । इनके ब्लाग पर ये कइसन खरी खरी सुनाइलवा । राम राम ..हम तो चले सन्यास लेने ।
ब्लाग..काव्यांजलि..कल्पतरु

शनिवार, 26 मार्च 2011

एक ब्लॉग- -''फिल्म और फिल्मवालों के बारे में

फिल्मों में किसकी रूचि नहीं है ?फिल्मों से सम्बंधित कोई भी खबर हो हम तुरंत पढ़ डालते है .''इंटरवल 'ऐसा ही एक ब्लॉग है जिसके संचालक हैं -श्री रजनीश जैन .ब्लॉग पर शीर्षक के नीचे अपने ब्लॉग का परिचय लिखते हुए आश्वासन देते है -''फिल्म और फिल्मवालों के बारे में काफी लिखा जाता रहा है . मेरा प्रयास तथ्यात्मक , गपशप रहित जानकारी उपलब्ध कराना है ''.इनके ब्लॉग का URL  है -http://rajneeshj.blogspot.com/

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

एक चिडिया जो करती है पढाई

http://atulshrivastavaa.blogspot.com/


उसका नाम है रमली। वह कक्षा चार में पढती है। रोज सुबह स्‍कूल जाती है। पहले प्रार्थना के दौरान कतार में खडी होती है और फिर कक्षा में गिनती, पहाडा, अक्षर ज्ञान। इसके बाद मध्‍यान्‍ह भोजन बकायदा थाली में करती है। फिर और बच्‍चों के साथ मध्‍यांतर की मस्‍ती और फिर कक्षा में। स्‍कूल में वह किसी दिन नागा नहीं करती। रविवार या छुटटी के दिन स्‍कूल नहीं जाती, पता नहीं कैसे उसे स्‍कूल की छुटटी की जानकारी हो जाती है। रमली का मन पढाई में पूरी तरह लग गया है और अब उसने काफी कुछ सीख लिया है।

आप सोच रहे होंगे और बच्‍चे स्‍कूल जाते हैं, तो रमली भी जाती है। इसमें ऐसा क्‍या खास है कि यह पोस्‍ट रमली के स्‍कूल जाने, पढने पर लिखना पडा। दरअसल में रमली है ही खास। जानकर आश्‍चर्य होगा कि रमली कोई छात्रा नहीं एक चिडिया है। देखने में तो रमली पहाडी मैना जैसी है लेकिन वह वास्‍तव में किस प्रजाति की है इसे लेकर कौतूहल बना हुआ है। नक्‍सल उत्‍पात के नाम से प्रदेश और देश भर में चर्चित राजनांदगांव जिले के वनांचल मानपुर क्षेत्र के औंधी इलाके के घोडाझरी गांव में यह अदभुद नजारा रोज देखने में आता है।

इस गांव की प्राथमिक शाला में एक चिडिया की मौजूदगी, न सिर्फ मौजूदगी बल्कि शाला की हर गतिविधि में उसके शामिल होने ने इस गांव को चर्चा में ला दिया है। इस गांव के स्‍कूल में एक चिडिया न सिर्फ प्रार्थना में शामिल होती है बल्कि वह चौथी की कक्षा में जाकर बैठती है। अक्षर ज्ञान, अंक ज्ञान हासिल करती है और फिर जब मध्‍यान्‍ह भोजन का समय होता है तो बकायदा उसके लिए भी एक थाली लगाई जाती है। इसके बाद  बच्‍चों के साथ खेलना और फिर पढाई। यह चिडिया खुद तो पढाई करती ही है, कक्षा में शरारत करने वाले बच्‍चों को भी सजा देती है। मसलन, बच्‍चों को चोंच मारकर पढाई में ध्‍यान देने की हिदायद देती है। अब इस चिडिया की मौजूदगी ही मानें कि इस स्‍कूल के कक्षा चौथी में बच्‍चे अब पढाई में पूरी रूचि लेने लगे हैं और बच्‍चे स्‍कूल से गैर हाजिर नहीं रहते।
इस चिडिया का नाम स्‍कूल के हाजिरी रजिस्‍टर में  तो दर्ज नहीं है लेकिन इसे स्‍कूल के बच्‍चों ने नाम  दिया है, रमली। रमली हर दिन स्‍कूल पहुंचती है और पूरे समय कक्षा के भीतर और कक्षा के आसपास ही रहती है। स्‍कूल की छुटटी होने के बाद  रमली कहां जाती है किसी को नहीं पता लेकिन दूसरे दिन सुबह वह फिर स्‍कूल पहुंच जाती है। हां, रविवार या स्‍कूल की छुटटी के दिन वह स्‍कूल के आसपास भी नहीं नजर आती, मानो उसे मालूम हो कि आज छुटटी है।

इस स्‍कूल की कक्षा चौथी की  छात्रा सुखरी से रमली का सबसे ज्‍यादा लगाव है। सुखरी बताती है कि रमली प्रार्थना के दौरान उसके आसपास ही खडी होती है और कक्षा के भीतर भी उसी के कंधे में सवार होकर पहुंचती है। उसका कहना है कि उन्‍हें यह अहसास ही नहीं होता कि रमली कोई चिडिया है, ऐसा लगता है मानों रमली भी उनकी सहपाठी है। शिक्षक जितेन्‍द्र मंडावी का कहना है कि एक चिडिया का  कक्षा में आकर पढाई में दिलचस्‍पी लेना आश्‍चर्य का विषय तो है पर यह हकीकत है और अब उन्‍हें भी आदत हो गई है, अन्‍य बच्‍चों के साथ रमली को पढाने की। वे बताते हैं कि यदि  कभी रमली की ओर देखकर डांट दिया जाए तो रमली रोने लगती है। घोडाझरी के प्राथमिक स्‍कूल में  कुल दर्ज  संख्‍या 29 है जिसमें 13 बालक और 16 बालिकाएं हैं, लेकिन रमली के आने से कक्षा में पढने वालों की संख्‍या 30 हो गई है।

बहरहाल, रमली इन दिनों आश्‍चर्य का विषय बनी हुई है। जिला मुख्‍यालय तक उसके चर्चे हैं और इन चर्चाओं को सुनने के बाद जब हमने जिला मुख्‍यालय से करीब पौने दो सौ किलोमीटर दूर के इस स्‍कूल का दौरा किया तो हमें भी अचरज हुआ। पहाडी मैना जिसके बारे में कहा  जाता है कि वह इंसानों  की तरह बोल सकती है,  उसी की  तर्ज में रमली भी बोलने की कोशिश करती है, हालांकि उसके बोल स्‍पष्‍ट नहीं होते लेकिन ध्‍यान देकर सुना जाए तो  यह जरूर समझ आ जाता है कि रमली क्‍या बोलना चाह रही है। रमली के बारे में स्‍कूल में पढने वाली उसकी 'सहेलियां' बताती हैं कि पिछले करीब डेढ दो माह से रमली बराबर स्‍कूल पहुंच रही है और अब तक उसने गिनती, अक्षर ज्ञान और पहाडा सीख लिया है। वे बताती हैं  कि रमली जब 'मूड' में होती है तो वह गिनती भी बोलती है और पहाडा भी सुनाती है। उसकी सहेलियां दावा करती हैं कि रमली की बोली स्‍पष्‍ट होती है और वह वैसे ही बोलती है जैसे हम और आप बोलते हैं। हालांकि हमसे रमली ने खुलकर बात नहीं की, शायद अनजान चेहरा देखकर। फिर भी रमली है बडी कमाल  आप भी तस्‍वीरों में रमली को देखिए।  

छत्‍तीसगढ में पहाडी मैना बस्‍तर के कुछ इलाकों में ही मिलती है और अब उसकी संख्‍या भी कम होती जा रही है। राज्‍य के राजकीय पक्षी घोषित किए गए पहाडी मैना को संरक्षित करने के लिए राज्‍य सरकार की ओर से काफी प्रयास किए जा रहे हैं, ऐसे में राजनांदगांव जिले के वनांचल में  पहाडी मैना जैसी दिखाई देने वाली और उसी की तरह बोलने की कोशिश करने वाली इस चिडिया की प्रजाति को लेकर शोध की आवश्‍यकता है।  खैर यह हो प्रशासनिक काम हो गया लेकिन फिलहाल इस चिडिया ने वनांचल में पढने वाले बच्‍चों में शिक्षा को लेकर एक माहौल बनाने का काम कर दिया है।  

एक ब्लॉग यह भी है ...

इस ब्लॉग का नाम है -''रैन बसेरा ''.अफसर पठान जी के इस ब्लॉग पर आप पाएंगे इनके द्वारा प्रस्तुत विविध विधाओं में रचनात्मक प्रस्तुतियां यथा -लघु कथा ,आलेख -पर्यटन के नक़्शे से गुम कार्नवालिस ,आलेख-शहरनामा गाजियों और गुलाबों का शहर गाजीपुर .इनके ब्लॉग का url  है -http://afsarpathan.blogspot.com/  

गुरुवार, 24 मार्च 2011

सोचिये कि किसी को गुमराह करने और बरगलाने पर किस तरह जबाब दिया जा सकता है ।

जब मैंने ब्लागिंग की शुरूआत की थी । उस समय उल्टे सीधे तर्कों यानी कुतर्कों द्वारा एक धर्म के कुछ ब्लागर्स हिन्दू धर्म और हिंदुत्व के प्रति अनर्गल तथ्यहीन और खोखला बेसिर पैर का प्रचार चरमसीमा पर कर रहे थे । मैंने इन्हें उत्तर देने के बारे में सोचा । पर उस समय मेरा उद्देश्य सन्तमत के गूढ दुर्लभ ग्यान के बारे में लोगों को बताना था । इसलिये मैंने विचार किया । ऐसा करने पर मैं लक्ष्य से भटककर व्यर्थ की बहस में उलझ जाऊँगा ।
पर मेरे दिमाग में एक बङे आश्चर्य को पैदा करने वाला सवाल था कि आखिर हिंदुओं में ऐसा कोई नहीं ?? जो इन दुष्प्रचार करने वालों को उचित जबाब दे सके । तव मेरे कुछ शुभचिंतकों ने मुझे कुछ ब्लाग्स और साइट के बारे में बताया । जो इस दिशा में अच्छा कार्य कर रहे हैं । आप भी देखिये इन ब्लाग्स को । और सोचिये कि किसी को गुमराह करने और बरगलाने पर किस तरह जबाब दिया जा सकता है ।



कुरान इन हिंदी 


भंडाफ़ोङू


वन्देमातरम


हर्फ़-ए-ग़लत-ll (उम्मी का दीवान)


मेरा भारत महान


महाजाल पर सुरेश चिपलूनकर 

इस ब्लॉग में कुछ बात है !

अलका शर्मा जी का ब्लॉग ''world  of  my  vision  'पर हर रचना दिल को छू लेने वाली है .कुछ दिन पहले प्रकाशित उनकी रचना ''पिता'' ने तो आँखें नम कर दी .''मुनिया का बस्ता''भी बहुत संवेदनशील रचना है .तो देर किस बात की उनके ब्लॉग पर जाईये और मर्मस्पर्शी रचनाओं का आनंद  लीजिये .इस ब्लॉग पर पहुचने का URL  है -http://worldofalka9626.blogspot.com/ 

बुधवार, 23 मार्च 2011

दर्शन जी का ब्लॉग

आज मैं जिस ब्लॉग से आपका परिचय करवा रही हूँ वह है ''मेरे अरमान ..मेरे सपने '' .यह दर्शन जी का ब्लॉग है .वे कहती हैं ''मेरे मन मै जो भी अरमान है उन्हें पूरा करने कि कोशिश करती हु..मन से बहुत भावुक हूँ ..खुश रहती हु इसलिए चाहती हु की सब खुश रहे .. मेरा जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर शहर मे २८मार्च को हुआ , शिक्षा मनासा और मंदसोर मे हुई ..फिलहाल बॉम्बे मे रहती हु ..बचपन से धुमने का शोक है ..पहाडो पर मेरा दिल बसता है ..वही बसने का अरमान है ...न जाने कब पूरा होगा ..सपने बहुत है ''.बहुत सुन्दर ब्लॉग है .ब्लॉग तक पहुँचने का URL -है ''http://armaanokidoli.blogspot.com/'' 

मंगलवार, 22 मार्च 2011

अफ़सोस कि लोग अच्छे ब्लाग्स पर टिप्पणी नहीं करते ।

त्रेतायुग की बात है । जब सुश्री शिखा जी ने मुझे एक बहुत अच्छा ग्यान खङे खङे ही बताया ( सोचो । आराम से बैठकर बतातीं । तो और भी बहुमूल्य ग्यान बतातीं । ) उन्होंने कहा । राजीव जी..बस एक बात याद रखो । ..कर्म किये जा । फ़ल की इच्छा मत कर रे इंसान । ये है गीता का ग्यान । ये है गीता का ग्यान ।
अब मैं क्योंकि हमेशा टाप की लेप में रहने वाला वाला कामचलाऊ आदमी..मतलब त्रेतायुग में भी मेरे पास लेपटाप था । मैंने शिखा जी के बताये अनुसार गूगल में " गीता का ग्यान " सर्च किया । 
तो ये ब्लाग्स निकलकर आ गये । जीवन की सीख देने वाले अनमोल ग्यान से परिपूर्ण ब्लाग ।..लेकिन अफ़सोस । इन ब्लाग्स पर टिप्पणी उसी तरह गायब थी । जैसे मेरी अक्ल कहीं गायब है । शायद इसी से खीजकर श्री शर्मा जी ने अपने ब्लाग का नाम ही रख दिया ( यहाँ ग्यान की बात )...कौन सुनता है ??
खैर भाई लोगो । आपकी दादागीरी चलती है । टिप्पणी करो या ना करो ।
मैं तो आपको ब्लाग के बारे में ही बता सकता हूँ । करनाल हरियाणा के रहने वाले श्री जे शर्मा भूतपूर्व ( ये ) Ex Asst. Prof. Agric. Engineering. Ex IDA Consultant[Sugarcane mechanization]. Ex Sr.Engineer of a Tractor manufacturing ltd co. हैं ।
और इनके ब्लाग्स..ॐ शान्ति ॐ..कौन सुनता है..गीता के मोती..गीता तत्त्व विज्ञान.. ये हैं ।
 राम राम सबको ।

एक नया ब्लॉग देखा है -M .K .TVFILMS

एक नया ब्लॉग देखा है -M .K .TVFILMS ''इस ब्लॉग को संचालित करते हैं श्री मार्कंड दवे . उम्र-६० साल,  पेशे से गुजराती कॉलमिस्ट और पत्रकार ;ये कवि भी हैं और गद्यकार भी .इनके ब्लॉग पर ''श्री मोबाईल नारायण व्रत कथा ''का आनंद लीजिये .इनका ब्लॉग URL  है-http://mktvfilms.blogspot.com/      

सोमवार, 21 मार्च 2011

ब्लॉग जगत के स्तम्भ.."भोला जी "

 आज आप सभी सोच रहे होंगे की मैं यहाँ किस विशिष्ट हस्ती का ब्लॉग लेकर उपस्थित हुई हूँ.राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ जी इनके बारे में हमें पहले भी बता चुके हैं और इनके ब्लॉग पर जाकर मैं भी संस्मरण और आध्यात्म का मिला जुला स्वरुप देख चुकी हूँ और चाहती हूँ की आप भी इस अद्भुत ज्ञान से परे न रहें.८२ वर्ष की उम्र में भी लम्बी बीमारी को झेलकर भी वे उत्साह से परिपूर्ण हैं और हम सभी से जुड़कर अपनी जिंदगी में कुछ खुशियाँ समेट लेना चाहते हैं तो आइये हम सभी उनके ब्लॉग "महावीर-बिनवाऊ -हनुमाना"से जुड़ें और उन्हें अपने साथ जोड़ लें.वैसे भी हमारे ये बड़े बुज़ुर्ग हमारे लिए एक ऐसी छतरी के सामान हैं जो हमारी धूप पानी आदि विपदाओं से रक्षा करती है.इनके ब्लॉग का लिंक है-

रविवार, 20 मार्च 2011

मिलिए आकाश से ..एक नए चिट्ठाकार

हम अनेक बार नए चिट्ठों  व् चिट्ठाकारों से परिचित होते रहते हैं .समयाभाव हो अथवा अन्य कोई कारण हम उन चिट्ठों को भुला देते हैं .यह ब्लॉग उन सभी चिट्ठों से सबको मिलवाने व् परिचित करवाने का एक प्रयास मात्र है .आप योगदान कर इस प्रयास को सफल बनायें .

आज http://akashsingh307.blogspot.com/एक नए ब्लॉग से मेरा परिचय हुआ जिसका नाम  है - ''आकाश सिंह की अच्छी बातें .दोस्ती पर इन्होने बहुत सुन्दर भावभरी कविता लिखी है .पढ़िए और इन्हें अपने ब्लॉग परिवार में जोड़ लीजिये .
                     शिखा कौशिक
                http://shikhakaushik666.blogspot.com/